कालिदास एक गया बीता व्यक्ति था, बुद्धि की दृष्टि से शून्य एवं काला कुरूप। जिस डाल पर बैठा था, उसी को काट रहा था। जंगल में उसे इस प्रकार बैठे देख राज्य सभा से विद्योत्तमा अपमानित पण्डितों ने उस विदुषी को शास्त्रार्थ में हराने व उसी से विवाह कराने का षड्यन्त्र रचने के लिए कालिदास को श्रेष्ठ पात्र माना। शास्त्रार्थ में अपनी कुटिलता से उसे मौन विद्वान् बताकर उन्होंने प्रत्येक प्रश्न का समाधान इस तरह किया कि विद्योत्तमा ने उस महामूर्ख से हार मान उसे अपना पति स्वीकार कर लिया।
पहले ही दिन जब उसे वास्तविकता का पता चला जो उसने उसे घर से निकाल दिया। धक्का देते समय जो वाक्य उसने उसकी भर्त्सना करते हुए कहे- वे उसे चुभ गये। दृढ़ संकल्प- अर्जित कर वह अपनी ज्ञान वृद्धि में लग गया। अन्त में वही महामूर्ख अपने अध्ययन से कालान्तर में महाकवि कालिदास के रूप में प्रकट हुआ और अपनी विद्वता की साधना पूरी कर विद्योत्तमा से उसका पुनर्मिलन हुआ।
लेकिन जो अवसर की महत्ता नहीं पहचानते, उन्हें तो अन्तत : पछताना ही पड़ता है।
📖 प्रज्ञा पुराण भाग १
पहले ही दिन जब उसे वास्तविकता का पता चला जो उसने उसे घर से निकाल दिया। धक्का देते समय जो वाक्य उसने उसकी भर्त्सना करते हुए कहे- वे उसे चुभ गये। दृढ़ संकल्प- अर्जित कर वह अपनी ज्ञान वृद्धि में लग गया। अन्त में वही महामूर्ख अपने अध्ययन से कालान्तर में महाकवि कालिदास के रूप में प्रकट हुआ और अपनी विद्वता की साधना पूरी कर विद्योत्तमा से उसका पुनर्मिलन हुआ।
लेकिन जो अवसर की महत्ता नहीं पहचानते, उन्हें तो अन्तत : पछताना ही पड़ता है।
📖 प्रज्ञा पुराण भाग १
















































