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बुधवार, 19 अगस्त 2026
👉 आज का सद्चिंतन Aaj Ka Sadchintan 19 Aug 2026
👉 धीरे-धीरे सीख
मुझे हर उस बात पर प्रतिक्रिया नहीं देना चाहिए जो मुझे चिंतित करती है।
मैं धीरे-धीरे सीख रहा हूँ कि...
जिन्होंने मुझे चोट दी है मुझे उन्हें चोट नहीं देना है।
मैं धीरे-धीरे सीख रहा हूँ कि...
शायद सबसे बड़ी समझदारी का लक्षण भिड़ जाने के बजाय अलग हट जाने में है।
मैं धीरे-धीरे सीख रहा हूँ कि...
अपने साथ हुए प्रत्येक बुरे बर्ताव पर प्रतिक्रिया करने में आपकी जो ऊर्जा खर्च होती है वह आपको खाली कर देती है और आपको दूसरी अच्छी चीजों को देखने से रोक देती है।
मैं धीरे-धीरे सीख रहा हूँ कि...
मैं हर आदमी से वैसा व्यवहार नहीं पा सकूंगा जिसकी मैं अपेक्षा करता हूँ।
मैं धीरे-धीरे सीख रहा हूँ कि...
किसी का दिल जीतने के लिए बहुत कठोर प्रयास करना समय और ऊर्जा की बर्बादी है और यह आपको कुछ नहीं देता, केवल खालीपन से भर देता है।
मैं धीरे-धीरे सीख रहा हूँ कि...
जवाब नहीं देने का अर्थ यह कदापि नहीं कि यह सब मुझे स्वीकार्य है, बल्कि यह कि मैं इससे ऊपर उठ जाना बेहतर समझता हूँ।
मैं धीरे-धीरे सीख रहा हूँ कि...
कभी-कभी कुछ नहीं कहना सब कुछ बोल देता है।
मैं धीरे-धीरे सीख रहा हूँ कि...
किसी परेशान करने वाली बात पर प्रतिक्रिया देकर आप अपनी भावनाओं पर नियंत्रण की शक्ति किसी दूसरे को दे बैठते हैं।
मैं धीरे-धीरे सीख रहा हूँ कि...
मैं कोई प्रतिक्रिया दे दूँ तो भी कुछ बदलने वाला नहीं है। इससे लोग अचानक मुझे प्यार और सम्मान नहीं देने लगेंगे। यह उनकी सोच में कोई जादुई बदलाव नहीं ला पायेगा।
मैं धीरे-धीरे सीख रहा हूँ कि...
जिंदगी तब बेहतर हो जाती है जब आप इसे अपने आसपास की घटनाओं पर केंद्रित करने के बजाय उसपर केंद्रित कर देते हैं जो आपके अंतर्मन में घटित हो रहा है।
आप अपने आप पर और अपनी आंतरिक शांति के लिए काम करिए और आपको बोध होगा कि चिंतित करने वाली हर छोटी-छोटी बात पर प्रतिक्रिया 'नहीं' देना एक स्वस्थ और प्रसन्न जीवन का 'प्रथम अवयव' है।
सच कहें तो
कभी कभी कुछ अपनी ही मूर्खता पूर्ण बातों या कामों से पछतावा भी होता है तो कभी कभी कुछ ईमानदारी भरा ठीक कर पाने की खुशी भी।
अब पता नहीं क्यों दूसरों की निंदा प्रशंसा में कुछ ज्यादा अंतर नहीं सा लगता।
पर जो भी हो ये भरोसा सा है कि अब समझदारी की तरफ सुनिश्चित कदम दर कदम बढ़ रहे हैं,
मन में छाई रहने वाली शांति, खुशी, संतुष्टि इसकी गवाह है कि पथिक की राह ठीक है,
एक दिन मंजिल भी मिल ही जाएगी।
उस मंजिल को तय करने का मजा ही शायद जिंदगी के अनूठे से जगह जगह बिखरे रंग हैं।
👉 प्रेम का रहस्य
सच्चा प्रेम करने वाले, इस प्रकार के दो मनुष्य एक दूसरे से चाहे हजारों मील के अन्तर पर हों, पर उनके प्रेम में फर्क नहीं पड़ता। वह नष्ट नहीं होता और न उससे कभी दुख की उत्पत्ति होती है।
हम निग्रहित होते हैं, बन्धन में पड़ते हैं, कैसे इसलिये नहीं कि हम कुछ देते हैं बल्कि इसलिए कि कुछ चाहते हैं। प्रेम करके हम दुख पाते है। परन्तु दुख हमें इसलिए नहीं मिलता कि प्रेम किया है। दुख का कारण यह है कि हम प्रेम के बदले प्रेम प्राप्त करना चाहते हैं। जहाँ इच्छा नहीं है चाह नहीं है, वहाँ दुख, क्लेश भी नहीं है। निस्वार्थ भाव से दूसरों को देते रहो, तभी सुखी हो सकोगे यह प्रकृति का अखण्ड नियम है।
✍🏻 स्वामी विवेकानन्द
📖 अखण्ड ज्योति दिसंबर 1941 पृष्ठ 11
गुरुवार, 6 अगस्त 2026
👉 सुख और दुःख दृष्टिकोण मात्र हैं। (अंतिम भाग)
👉 प्रेरणादायक प्रसंग 06 Aug 2026
👉 आज का सद्चिंतन Aaj Ka Sadchintan 06 Aug 2026
भगवान सब को देखता है।
एक बार एक भला आदमी बेकारी से दुखी था। उसकी यह दशा देखकर एक चोर को सहानुभूति उपजी। उसने कहा-मेरे साथ चला करो ‘चोरी में बहुत धन मिला करेगा। ‘वह बेकार आदमी तैयार हो गया। पर उसे चोरी आती न थी। उसने साथी से कहा मुझे चोरी आती तो है नहीं करूँगा कैसे? चोर ने कहा इसकी चिन्ता न करो मैं सब सिखा लूँगा। पहले हलका काम कराऊँगा फिर कठिनाई के मौके पर चलना। वह तैयार हो गया।
चोर एक किसान का पका हुआ खेत काटने गया। वह खेत
गाँव से कुछ दूर जंगल में था। वैसे तो रात में उधर कोई रखवाली नहीं थी। तो भी चोर ने
उस नये साथी को खेत के मेंड़ पर खड़ा कर दिया कि वह निगरानी करता रहे कि कही कोई देखता
तो नहीं है। वह खुद खेत काटने लग गया।
नये चोर ने थोड़ी ही देर में आवाज लगाई कि -भाई
जल्दी उठों ,यहाँ से भाग चलें ,खेत का मालिक
पास ही खड़ा देख रहा है, मैं तो भागता हूँ।, चोर काटना छोड़ कर उठ खड़ा हुआ ओर वह भी भागने लगा। कुछ दूर जाकर दोनों खड़े
हुए तो चोर ने साथी से पूछा-मालिक कहाँ था? कैसे देख रहा था?
उसने कहा- ईश्वर सब का मालिक है। इस संसार में जो कुछ है, उसी का है। वह हर जगह मौजूद है और सब कुछ देखता है। मेरी आत्मा ने कहा-ईश्वर
यहाँ भी मौजूद है और हमारी चोरी को देख रहा है। ऐसी दशा में हमारा भागना ही उचित था।
भगवान सब जगह है और सब को देख रहा है। उसके न्याय
और दंड से कोई बच नहीं सकता। यह विश्वास करने वाला मनुष्य ही पापों से बच सकता है।
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बुधवार, 5 अगस्त 2026
👉 सुख और दुःख दृष्टिकोण मात्र हैं। (भाग 2)
👉 सामयिक चेतावनी (अंतिम भाग)
👉 प्रेरणादायक प्रसंग 05 Aug 2026
👉 आज का सद्चिंतन Aaj Ka Sadchintan 05 Aug 2026
मंगलवार, 4 अगस्त 2026
👉 आज का सद्चिंतन Aaj Ka Sadchintan 04 Aug 2026
सोमवार, 3 अगस्त 2026
👉 सुख और दुःख दृष्टिकोण मात्र हैं। (भाग 1)
👉 आज का सद्चिंतन Aaj Ka Sadchintan 19 Aug 2026
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