शनिवार, 9 फ़रवरी 2019

👉 बेटे की शादी में केवल 18 हजार रुपये खर्च करेंगे आईएएस अधिकारी

हाइलाइट्स

IAS अधिकारी पी. बसंत कुमार बेटे की शादी में खर्च करेंगे 18 हजार

बेटी की शादी में मात्र 16 हजार तथा अपनी में ढाई हजार किया था खर्च

बैंक मैनेजर है बेटा और वधू डॉक्टर, दोनों पक्ष करेंगे 18-18 हजार खर्च

शोऑफ के इस जमाने में जहां सामान्य परिवार भी शादियों में लाखों रुपये खर्च करने से नहीं चूकते हैं, वहीं आंध्र प्रदेश के एक आईएएस अधिकारी अपने बेटे की शादी में मात्र 18 हजार रुपये खर्च करने जा रहे हैं। बसंत कुमार नामक अधिकारी ने अपनी शादी में भी ढाई हजार रुपये का ही खर्च किया था।

विशाखापत्तनम मेट्रोपॉलिटन रीजन डिवेलपमेंट अथॉरिटी (वीएमआरडीए) के आयुक्त पटनाला बसंत कुमार अपने बेटे की शादी पर सिर्फ 18 हजार रुपये खर्च करेंगे। पटनाला के बेटे की शादी 10 फरवरी को होनी है। बेटे अभिनव बैंक मैनेजर हैं, जबकि वधू लावन्या पेशे से डॉक्टर हैं। हमारे सहयोगी टीओआई से बातचीत में उन्होंने बताया, 'यह मेरे सहयोगियों, राधा स्वामी सत्संग सभा के सदस्यों तथा अन्य लोगों के सहयोग से ही संभव हुआ है।'

उन्होंने बताया, 'राधा स्वामी सत्संग का फॉलोअर होने की वजह से मैं बेटे की शादी में 18 हजार से अधिक की राशि खर्च नहीं कर सकता था। शादी में वर और वधू दोनों के परिवार 18 हजार रुपये प्रत्येक खर्च वहन करेंगे, जिसमें अतिथियों का दोपहर का भोज भी शामिल है। दोनों पक्ष मिलाकर 100 से अधिक गेस्ट नहीं होंगे। खाने-पीने पर भी 15 से 20 रुपये प्रति प्लेट का खर्च किया जाएगा। पुजारी को एक हजार रुपये दिए जाएंगे।'

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के राज्यपाल ई.एस.एल नरसिम्हन शुक्रवार को एक सादे समारोह में जोड़े को आशीर्वाद देंगे। बसंत कुमार ने 2017 में अपनी बेटी की शादी भी इसी सादगी के साथ सिर्फ 16,100 रुपये में की थी।

👉 अनमोल रिश्तें

"अच्छे अच्छे महलों मे भी एक दिन कबूतर अपना घोंसला बना लेते है...

सेठ घनश्याम के दो पुत्रों में जायदाद और ज़मीन का बँटवारा चल रहा था और एक चार पट्टी के कमरे को लेकर विवाद गहराता जा रहा था, एकदिन दोनो भाई मरने मारने पर उतारू हो चले, तो पिता जी बहुत जोर से हँसे। पिताजी को हँसता देखकर दोनो भाई  लड़ाई को भूल गये, और पिताजी से हँसी का कारण पुछा। तो पिताजी ने कहा-- इस छोटे से ज़मीन के टुकडे के लिये इतना लड़ रहे हो छोड़ो इसे आओ मेरे साथ एक अनमोल खजाना बताता हूँ मैं तुम्हे !

पिता घनश्याम जी और दोनो पुत्र पवन और मदन उनके साथ रवाना हुये पिताजी ने कहा देखो यदि तुम आपस मे लड़े तो फिर मैं तुम्हे उस खजाने तक नही लेकर जाऊँगा और बीच रास्ते से ही लौटकर आ जाऊँगा! अब दोनो पुत्रों ने खजाने के चक्कर मे एक समझौता किया की चाहे कुछ भी हो जाये पर हम लड़ेंगे नही प्रेम से यात्रा पे चलेंगे!

गाँव जाने के लिये एक बस मिली पर सीट दो की मिली, और वो तीन थे, अब पिताजी के साथ थोड़ी देर पवन बैठे तो थोड़ी देर मदन ऐसे चलते-चलते लगभग दस घण्टे का सफर तय किया फिर गाँव आया।

घनश्याम दोनो पुत्रों को लेकर एक बहुत बड़ी हवेली पर गये हवेली चारों तरफ से सुनसान थी। घनश्याम ने जब देखा की हवेली मे जगह जगह कबूतरों ने अपना घोसला बना रखा है, तो घनश्याम वहीं पर बैठकर रोने लगे। दोनो पुत्रों ने पुछा क्या हुआ पिताजी आप रो क्यों रहे है?

तो रोते हुये उस वृद्ध पिता ने कहा जरा ध्यान से देखो इस घर को, जरा याद करो वो बचपन जो तुमने यहाँ बिताया था, तुम्हे याद है पुत्र इस हवेली के लिये मैं ने अपने भाई से बहुत लड़ाई की थी, सो ये हवेली तो मुझे मिल गई पर मैंने उस भाई को हमेशा के लिये खो दिया, क्योंकि वो दूर देश में जाकर बस गया और फिर वक्त्त बदला और एक दिन हमें भी ये हवेली छोड़कर जाना पड़ा!

अच्छा तुम ये बताओ बेटा की जिस सीट पर हम बैठकर आये थे, क्या वो बस की सीट हमें मिल जायेगी? और यदि मिल भी जाये तो क्या वो सीट हमेशा-हमेशा के लिये हमारी हो सकती है? मतलब की उस सीट पर हमारे सिवा कोई न बैठे। तो दोनो पुत्रों ने एक साथ कहा की ऐसे कैसे हो सकता है, बस की यात्रा तो चलती रहती है और उस सीट पर सवारियाँ बदलती रहती है। पहले कोई और बैठा था, आज कोई और बैठा होगा और पता नही कल कोई और बैठेगा। और वैसे भी उस सीट में क्या धरा है जो थोड़ी सी देर के लिये हमारी है!
               
पिताजी फिर हँसे फिर रोये और फिर वो बोले देखो यही तो मैं तुम्हे समझा रहा हूँ, कि जो थोड़ी देर के लिये तुम्हारा है, तुमसे पहले उसका मालिक कोई और था बस थोड़ी सी देर के लिये तुम हो और थोड़ी देर बाद कोई और हो जायेगा।
              
बस बेटा एक बात ध्यान रखना की इस थोड़ी सी देर के लिये कही अनमोल रिश्तों की आहुति न दे देना, यदि कोई प्रलोभन आये तो इस घर की इस स्थिति को देख लेना की अच्छे अच्छे महलों में भी एक दिन कबूतर अपना घोसला बना लेते है। बस बेटा मुझे यही कहना था-- कि  बस की उस सीट को याद कर लेना जिसकी रोज उसकी सवारियां बदलती रहती है उस सीट के खातिर अनमोल रिश्तों की आहुति न दे देना जिस तरह से बस की यात्रा में तालमेल बिठाया था बस वैसे ही जीवन की यात्रा मे भी तालमेल बिठा लेना !

दोनो पुत्र पिताजी का अभिप्राय समझ गये, और पिता के चरणों में गिरकर रोने लगे !

शिक्षा :-

मित्रों, जो कुछ भी ऐश्वर्य - सम्पदा हमारे पास है वो सबकुछ बस थोड़ी देर के लिये ही है, थोड़ी-थोड़ी देर मे यात्री भी बदल जाते है और मालिक भी। रिश्तें बड़े अनमोल होते है छोटे से ऐश्वर्य या सम्पदा के चक्कर मे कहीं किसी अनमोल रिश्तें को न खो देना...


Yug Parivartan Ka Samay
Dr Chinmay Pandya
👇👇👇
https://youtu.be/PIee0RdEE3Y

👉 जानवर भी सिखाते है प्यार की भाषा

हर व्यक्ति के जीवन मे, उसके रिश्तो मे कभी न कभी उतार-चढाव अवश्य आते है। कुछ लोग अपने प्रेम, धैर्य व समझदारी से हर रिश्ते को आसानी से संजो लेते हैँ, वही कुछ लोग रिश्तोँ व प्यार मे खरे उतरने मे नाकाम हो जाते है। अगर आप भी रिश्तो को सम्भालने मे असमर्थ महसूस करते है तो एक बार अपने पालतू जानवर की ओर नजर घुमाकर देखिए। वह भी आपको प्यार का पाठ पढाएंगे। जरूरी नही है कि आप प्यार की भाषा सीखने के लिए किसी डॉक्टर या विशेषज्ञ के कमरे मे घंटो बिताएँ। आप चाहे तो इन पालतू जानवरो से भी बहुत कुछ सीख सकते है !

शर्तो मे रिश्ता नही

प्रेम व रिश्ते कभी भी शर्तो के आधार पर नही बनते। जिन रिश्तो मे शर्ते होती है, उनका लम्बे समय तक टिकना बेहद ही मुश्किल होता है। आपके पालतू जानवर भी जब आपको प्रेम देते है या आपके लिए कोई कार्य करते है तो उसके पीछे उनका कोई मकसद या शर्त नही होती। इतना ही नही, वह अपने फायदे के लिए न तो आपको धोखा देते है और न ही झूठ बोलते है। एक बार सोच कर देखिए कि यदि आपके रिश्ते भी इतने ही पाक हो तो वह आपको कितना सुकून पहुंचाएंगे।

सीखे माफ करना

दुनिया मे ऐसे बहुत कम मनुष्य ही है जो आसानी से दूसरो को माफ कर पाते है। गलतियाँ सभी से होती है, इसलिए उन्हे माफ करना भी सीखेँ। जिस मनुष्य मे क्षमा करने का गुण नही है तो वह दूसरो का नही बल्कि खुद का जीवन ही बेहद कठिन बना लेता है। लेकिन जानवर ऐसे नही होते। अगर आप कभी अपने पालतू जानवर को डांट भी दे तो भी वह आपसे गुस्सा नही होते बल्कि वह लौटकर आपके पास आते है और आपको बेशुमार प्यार करते हैँ।

समय से सीचे प्रेम

आपने कभी नोटिस किया है कि जब भी आप घर पर होते है तो आपके प्यारे पालतू आपको एक पल के लिए भी अकेला नही छोडते। किचन से लेकर ड्राइंग रूम यहाँ तक कि बेडरूम मे भी अक्सर वह आपके साथ खेल रहे होते है। चाहे आप परेशान हो या खुश, वह आपके साथ हर फीलिंग शेयर करते है। इतना ही नही, उनके साथ समय बिताकर आप अपनी परेशानी भूलकर एकदम फ्रेश हो जाते है। लेकिन रिश्तो को समय देने के लिए आपके पास वक्त नही होता। एक बात गांठ बान्ध ले कि जब तक आप अपने रिश्ते रूपी पौधे को समय व प्रेम की खाद से नही सीचेंगे तो वह कभी भी मजबूत पेड नही बनेगा।

रहे रियल

मनुष्य अपना जीवन कई मुखौटो के साथ जीता है, फिर चाहे बात घर की हो या बाहर की। हर जगह के लिए हमारे पास एक मुखौटा है। मुखौटो के साथ जीवन जीते हुए हम अपने वास्तविक चेहरे को ही नही पहचान पाते। लेकिन जानवर हमेशा रियल ही होते हैँ। वह जगह, लोग और अपनी सुविधा के अनुसार अपना व्यक्तित्व व व्यवहार नही बदलते। एक बार आप भी अपने रिलेशनशिप मे रियल होकर देखिए। यकीनन आपको प्यार की एक नई परिभाषा देखने को मिलेगी और आप पहले से काफी खुश रहना सीख जाएंगे।

Duniya Mai Kimat Asli Ki hai
Dr Chinmay Pandya
👇👇👇
https://youtu.be/eBBsumdWoPo

👉 आज का सद्चिंतन 9 Feb 2019



Bhartiya Sanskirti Ke Mul Me Hai Adhyatam
Dr Chinmay Pandya
👇👇👇
https://youtu.be/T9mM_uHFNmY

👉 प्रेरणादायक प्रसंग 9 Feb 2019


👉 बेईमानी से लाभ - बस एक भ्रम

बेईमानी की गरिमा स्वीकारने तथा आदर्श के रूप में अपनाने वाले वस्तुतः वस्तुस्थिति का बारीकी से विश्लेषण नहीं कर पाते। वे बुद्धि भ्रम से ग्रसित हैं। सच तो यह है, बेईमानी से धन कमाया ही नहीं जा सकता। इस आड़ में कमा भी लिया जाए तो वह स्थिर नहीं रह सकता। लोग जिन गुणों से कमाते हैं, वे दूसरे ही हैं । साहस, सूझ-बूझ, मधुर भाषण, व्यवस्था, व्यवहारकुशलता आदि वे गुण हैं जो उपार्जन का कारण बनते हैं।

बेईमानी से अनुपयुक्त रूप से अर्जित किए गए लाभ का परिणाम स्थिर नहीं और अंततः दुःखदायी ही सिद्ध होता है। ऐसे व्यक्ति यदि किसी प्रकार राजदंड से बच भी जाएँ तो भी उन्हें अपयश, अविश्वास, घृणा, असहयोग जैसे सामाजिक और आत्मप्रताड़ना तथा आत्मग्लानि जैसे आत्मिक कोप का भाजन अंततः बनना पड़ता है। बेईमानी से भी कमाई तभी होती है जब उस पर ईमानदारी का आवरण चढ़ा हो। किसी को ठगा तभी जा सकता है जब उसे अपनी प्रामाणिकता एवं विश्वसनीयता पर आश्वस्त कर दिया जाए। यदि किसी को यह संदेह हो जाए कि हमें ठगने का ताना बाना बुना जा रहा है तो वह उस जाल में नहीं फँसेगा तथा दूसरे को अपनी धूर्तता का लाभ नहीं मिल सकेगा।

वास्तवकिता प्रकट होने पर तो बेईमानी करने वाला न केवल उस समय के लिए वरन् सदा के लिए लोगों का अपने प्रति विश्वास खो बैठता है और लाभ कमाने के स्थान पर उल्टा घाटा उठाता है। रिश्वत लेते, मिलावट करते, धोखाधड़ी बरतते, सरकारी टैक्स हड़पते, काला बाजारी करते पकड़े जाने वाले सरकारी दंड पाते तथा समाज में अपनी प्रतिष्ठा गँवाते आए दिन देखे जाते हैं। उनकी असलियत प्रकट होते ही हर व्यक्ति घृणा करने लगता है।

✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
📖 बड़े आदमी नहीं महामानव बनें, पृष्ठ 14

Hamara Chintan Kesa Ho
Dr Chinmay Pandya
👇👇👇
https://youtu.be/r67_3tKR69I

👉 Profit From Dishonesty - Merely An Illusion

Those who accept dishonesty as dignified, and adopt it to be their ideal, are failing to analyze the situation in a thorough enough manner. They are disillusioned. The truth is that money simply cannot be earned by dishonest means. Even when we do acquire some wealth temporarily, the wealth can not stay permanent and really be ours. True living can only be earned through courage, wisdom, discipline, dexterity, and skillfulness.

Dishonest earnings through inappropriate means lead to results that are not only unstable but that are also eventually painful. There might be temporary escape from direct punishment, but eventually, in the long term, dishonesty invariably leads to public anger, outrage, hate, isolation, and sadness. In practice, deceit and corruption must be sugar coated with a fake layer of honesty for it to work. Conning does require establishing trust and confidence. If any suspicion arises, the person being conned is likely to jump out of the trap. Once proven guilty, the con man loses credibility forever and ends up bearing more eventual losses than profits.

There could be scores of everyday examples where the people who are caught bribing, cheating, evading tax, doing back marketing, and illegally hoarding not only get severely punished by the law but they also loose their social status and prestige. Once their deeds become public, everyone starts hating them.

✍🏻 Pt. Shriram Sharma Aacharya
📖 Badein Aadmi Nahi, Mahamanav Baniyein (Not a Big-Shot, Be Super-Human), Page 14

Guru Ki Kripa Jeevan Badal Deti Hai
Dr Chinmay Pandya
👇👇👇
https://youtu.be/OOFeP7obVf8

👉 मानव देवों से श्रेष्ठ या पशुओं से हीन?

एक सभा में वाद- विवाद चल रहा था। एक पक्ष ने कहा- 'मनुष्य सर्वश्रेष्ठ प्राणी है क्योंकि वह सभी जीवधारियों को वश में कर लेता है। ' दूसरा पक्ष कहता था' अन्य प्राणी श्रेष्ठ हैं, क्योकि वे जिन्दगी भर बिना कुछ माँगे मनुष्य की सेवा करते हैं। ' निर्णय नहीं हो पा रहा था। विवाद बढ़ता ही गया। एक ज्ञानी उधर से जा रहे थे। सबने उनकी सम्मति माँगी। ज्ञानी ने दोनों पक्षों की बात सुनी और बोले- भाई, मानवी स्वतन्त्रता की भी अपनी सीमा है। हर कोई जीवन जीने का मर्म नहीं जानता। मनुष्य जब तक सत्कर्म करता है तब तक ही श्रेष्ठ है और जब वह दुष्कर्म करने लगता है तो वह नीचे गिर जाता है। जब भी ऐसे चयन के अवसर आये- हैं, मानवी बुद्धिमत्ता की पूरी परीक्षा हुई।

📖 प्रज्ञा पुराण भाग १

Bhoutikta Ya Aadhyatmikta Kis Baat Ki Chinta jyada?
Dr Chinmay Pandya
👇👇👇
https://youtu.be/xcmgfUeKONo

👉 पहले अपने अंदर झांको Pehle Apne Andar Jhanko

पुराने जमाने की बात है। गुरुकुल के एक आचार्य अपने शिष्य की सेवा भावना से बहुत प्रभावित हुए। विधा पूरी होने के बाद शिष्य को विदा करते समय...