शनिवार, 23 मार्च 2019

👉 'यार' की तौहीन

एक बार एक संत अपने चेले के साथ किसी कीचड़ भरे रास्ते पर जा रहा था, उसी रास्ते पर एक अमीरजादा अपनी प्रेमिका के साथ जा रहा था, जब संत उस के पास से गुजरा तो कुछ छींटे अमीरजादे की प्रेमिका पर पड़ गए।

अमीरजादे ने गुस्से में दो तीन चांटे उस संत को जड़ दिए, संत चुपचाप आगे चला गया, संत के चेले ने पूछा आप ने उसे कुछ कहा क्यों नहीं, इस पर भी संत चुप रहे, पीछे चलता अमीरजादा अचानक फिसल कर कीचड़ में गिर गया और बुरी तरह से लिबड़ गया, साथ ही उसकी एक बाजु भी टूट गई, तब संत ने अपने चेले से कहा देख:- जैसे वो 'अमीरजादा' अपनी 'यार' की तौहीन नहीं देख सका, ठीक उसी तरह ऊपर बैठा "वो ऊपर वाला" भी अपने 'यार' की तौहीन नहीं देख सकता।

👉 आज का सद्चिंतन 23 March 2019


👉 प्रेरणादायक प्रसंग 23 March 2019


👉 Amrit Chintan

■ Family life is best for most of us. But it is so, subject to condition that one develops and gives a proper decorum to all the members. Parents will have to bear the responsibility of mutual harmony, education, manners. Love and affection and also observe proper development of children. Marriage is not simply a atmosphere of  physical relation but a team for moral and spiritual progress in a blissful way.

□ What are needed for a happy blissful life are good health, ability and high moral values. One should develop all this by constant practice. Instead of planning for high ambitions, one should go on earning virtues and distributing side by side to other needy. Self satisfaction in the availing – circumstances is an art in life. Beyond sensual pleasures, there are other higher dimensions for growth in life, which can easily be attained under discipline and ethos.

◆ Man has control on his destiny. Based on practice of virtues and velour. Nothing is beyond his reach. There is along history that man has earned great height through his hard work and intellect, why you can not. Be sure you have every thing in you in a seed form. But you will have to grow that. That is the royal path which leads historic people to their summits. Thoughts are the power to push you up to great success of life. 

◇ Enchanting mantra is a vocal ritual, but this is one dimension of spiritual growth, other important dimensions are of self-development and self-rectification. Rituals are good but behind that are actuals, which should be cultivated in life. Rituals only show results when these dimensions are also taken care-of for a blissful life.

👉 जीवन वीणा बजे तो ही सार्थक

मन्दिर के जिस प्रकोष्ठ में भगवान् सुब्रह्मण्यम की मूर्ति थी, उसी के सामने वाले भाग में एक सुन्दर वीणा रखी हुई थी। मन्दिर में कई लोग तो वीणा के दर्शन कर लेते और चले जाते। कुछ उसे बजाने की इच्छा करते, पर वहाँ बैठा हुआ मन्दिर का रक्षक उनसे मना करता और वे वहाँ से चल देते है।। इस प्रकार सुन्दर स्वरों वाली यह वीणा जहाँ थी वहीं रखी रहती थी, उसका कभी कोई उपयोग न होता था।

एक दिन एक व्यक्ति आया। उसने वीणा बजाने की इच्छा व्यक्त की, पर उस व्यक्ति ने उसे भी मना कर दिया। वह व्यक्ति वही चुपचाप खड़ा रहा। थोड़ी देर में सब लोग मन्दिर से निकल कर बाहर चेले गये तो उस व्यक्ति ने वीणा उठाली और उसका लयपूर्वक वादन करने लगा। वीणा का मधुर स्वर लोगों के कानों तक पहुँचा तो लोग पीछे लौटने लगे और उस मधुर संगीत का रसास्वादन करने लगे। वाद्य घण्टों चला और लोग मन्त्र मुग्ध सुनते रहे। जब वह बन्द हुआ तब भी लोग ईश्वरीय आनन्द की अनुभूति करते रहे। लोगों ने कहा- ''आज वीणा सार्थक हो गई।''

भावार्थ यह है कि भगवान् काया तो सबको देता है पर कुछ लोग अज्ञानवश व कुछ अभिमान वश इस वीणा रूपी यन्त्र का सदुपयोग नहीं कर पाते। यदि इन दो दोषों से दूर रहकर कोई शरीररूपी वीणा से मधुर लहरियाँ निकाले तो उस आनन्द से न केवल वह स्वयं वरन् सम्पर्क के सैकड़ों लोग उसमें ईश्वरीय आनन्द की झलक पाते है। ऐसी जीवन- वीणा सभी बजा सकें यही तत्ववेत्ताओं का निर्देश है, महामानवों का उपदेश है एवं प्रत्यक्ष अनुभत सत्य है। पर दूसरा पक्ष भी ऐसा हठी है कि उस पर काबू पाना, अन्त : की दुष्प्रवृत्तियों से संघर्ष कर जीवन रूपी मणि का उपयोग कर पाना हर किसी के लिए सम्भव नहीं हो पाता।

📖 प्रज्ञा पुराण भाग 1

👉 निर्माण से पूर्व सुधार की सोचें (भाग ५)

कुरीतियों की दृष्टि से यों अपना समाज भी अछूता नहीं हैं, पर अपना देश तो इसके लिए संसार भर में बदनाम है। विवाह योग्य लड़के लड़कियों के उपयुक...