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रविवार, 12 अप्रैल 2026

👉 अनैतिक सफलता-नैतिक असफलता

और दूसरा वह वृक्ष है महात्मन्! देखिये न। आस-पास की सारी भूमि पर उसने अधिकार कर लिया है, छोटे-छोटे पौधों को पनपने नहीं दिया इसने। दूसरे के अधिकार को भी अपना हित मानकर शोषण कर लिया और आज सभी वृक्षों से विशाल दिखाई देने लगा। पर आप हैं कि नैतिकता की प्रशंसा के पुल बाँधे जा रहे हैं। महाराज! संसार में शोषक, शक्तिशाली और हिंसक पनपते हैं। नीति और ईमानदारी को पकड़े रहने वाले बेचारे दूसरे वृक्षों को देखो, कितने कोमल और कमजोर दिखाई देते हैं। उगते, फलते, फूलते तो ये भी हैं पर इनकी करोड़ों की शान और इस मद-मस्ती में झूमते विशाल वृक्ष की शान-क्या तुलना हो सकती है।

साधु मुस्कराये और बोले-वत्स! कुछ प्रश्न ऐसे होते हैं जिनके उत्तर तत्काल नहीं दिये जाते। प्रतीक्षा करो और प्रतिफल देखो। शीघ्र ही समझ में आ जायेगा कि नीति, नीति ही है और अनीति, अनीति ही है। अनीति का अन्त सदैव दुःखद ही होता है।

ग्रीष्म के अन्तिम दिन, वर्षा के पूर्वारम्भ के दिन बड़े बवण्डरी और तूफानी होते हैं। ऐसे ही किसी एक दिन भयंकर तूफान आया। छोटे-छोटे कोमल पौधे झुक-झुक गये, पृथ्वी माता की गोद में लोट-लोट गये। तूफान उन्हें पार करके निकल गया तो जैसे पहले खड़े थे, वैसे ही फिर खड़े होकर अपनी विकास यात्रा में जुट गये।

किन्तु उस महावृक्ष के अभिमान और अहंकार का अब तक भी कोई ठिकाना नहीं था। उसी अकड़ में खड़ा रहा। तूफान अपनी सारी शक्ति समेटकर उस पर टूट पड़ा और लंका में जो स्थिति रावण के दस शीश और बीस भुजाओं की हुई थी, वही स्थिति उस भीमकाय वृक्ष की कर डाली। दनुजाकार डालें, तने सब क्षत-विक्षत लोटने लगे, जड़ें भी संभाल न पाईं। पेड़ पल भर में ढेर हो गया।

प्रातःकाल जो भी ग्रामीण उधर से निकलता, हाहाकारी वृक्ष की यह विनाश-लीला देखकर उधर ही खिंचा चला आता। देखते-देखते ग्राम वासियों की भीड़ एकत्रित हो गई। इतना बड़ा पेड़ ढहकर भूमि पर बिखरा पड़ा है और छोटे-छोटे पौधे आनन्द की हिलोरें ले रहे हैं-यह देखकर सभी को आश्चर्य हो रहा था, तभी साधु भी उधर आ पहुँचे।

वृक्ष की ओर देखकर हँसे और बोले-यही है उस दिन के प्रश्न का उत्तर। अनीति और अधर्म से प्रारम्भ में लोग तेजी से बढ़ते हैं, पर अन्त उनका ऐसा ही अनिष्टकारी होता है, जैसे इस वृक्ष का।

📖 अखण्ड ज्योति जून 1970

शनिवार, 15 दिसंबर 2018

👉असफलताओं की लंबी रात्रि के बाद होता है सफलता का सूर्योदय

जीवन में सफल होने की मंशा हर कोई अपने मन में पाले हुए है, मगर यह ऐसा नायाब उपहार है, जो सभी को नहीं मिलता । इसके हकदार तो सिर्फ वे लोग ही होते हैं, जिनके सिर पर कुछ कर गुजरने का जुनून होता है या फिर वे जो समाज में अपनी एक अलग पहचान बनाने के लिए आतुर होते हैं ।

आज के तकनीकी युग में युवा वर्ग जीवन में सफलता की सीढ़ी चढ़ने के लिए लालायित है, लेकिन थोड़ा-सा परिश्रम या फिर कड़ी मेहनत के बावजूद नकारात्मक परिणाम उन्हें पूरी तरह से निराश कर देता है ।

यही वक्त मानव जीवन का अहम मोड़ होता है, क्योंकि ऐसे समय पर जो व्यक्ति हिम्मत हार कर असफलता को अपनी किस्मत मान लेता है, वे जिंदगी भर सिर्फ दूसरों की सफलता का दर्शक मात्र बन कर रह जाता हैं ।

मगर अपनी कमियों एवं खामियों को दूर कर सही दिशा में मेहनत करने का मार्ग चुनने और उस पर चलने वाले ही सफलता हासिल करते हैं ।

हालांकि ऐसे लोगों की सफलता की इबारत के पीछे कई बार मुंह की  खाने (हार) वाली कहानी भी छिपी होती है, क्योंकि जीवन में मिलने वाली अनेक विफलताएं ही व्यक्ति की सफलता का आधार रखती हैं ।

बस शर्त इतनी है कि व्यक्ति अपनी विफलताओं से सबक ले और दोगुनी ऊर्जा के साथ निर्धारित लक्ष्य (Goal) की ओर बढ़े।
आज के युवा वर्ग को यह बात हमेशा अपने जेहन में रखनी चाहिए कि सफलता के आयाम स्थापित करने वाला व्यक्ति कोई भी हो, हम सब को केवल उसकी सफलता नजर आती है, मगर उसके पीछे का कड़ा परिश्रम, लक्ष्य पाने का जुनून और इच्छाओं का त्याग नहीं दिखाई देता ।

समाज में अनेक ऐसे उदाहरण (Successful People) है, जिन्हें आज का युवा वर्ग अपना आदर्श मानता है, मगर उनके सफल होने से पहले का संघर्षपूर्ण जीवन जानने तक की कोशिश नहीं की जाती । हां लोगों को नजर आती है, तो सिर्फ उनकी सफलता ।

कोई माने या फिर न माने, यह सच्चाई है कि हर सफल व्यक्ति का जीवन कभी न कभी संघर्षपूर्ण रहता है । हम इस बात से भी इंकार नहीं कर सकते कि जिंदगी का दूसरा नाम संघर्ष (Struggle) है ।

इसलिए आज के युवा वर्ग को यह बात समझनी होगी कि संघर्ष (Struggle), सही दिशा में की गई कड़ी मेहनत, विपरीत परिस्थितियों एवं असफलताओं की लंबी रात के बाद ही सफलता का सूर्योदय होता है ।

👉 आज का सद्चिंतन Aaj Ka Sadchintan14 Sep 2026

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