शनिवार, 18 जुलाई 2026

👉 हमारी आध्यात्मिक जिज्ञासा और आकांक्षा (अंतिम भाग)

इतिहास में किसी अत्याचारी अथवा आततायी का वर्णन पढ़कर मनुष्य के हृदय में यह भाव नहीं आता कि वह भी उसी की तरह रक्त पात करता, दूसरों को पीड़ा पहुँचता अथवा किसी का धन अथवा समान लूटता तो बड़ा आनन्द रहता। एक ओर जहाँ मनुष्य की सत्य, शिव और सुंदरम् से प्रेम होता है, वहाँ दूसरी ओर दुष्टता, दुराचार और दुराशा से घृणा और विकर्षण भी होता है। यह विवेकपूर्ण अनुभूति बतलाती है कि मनुष्य का स्वरूप वास्तविक स्वरूप सत्य, शिव और सुन्दर का प्रतिरूप है, उसके उस रूप में कुरूपता, असत्य सत्य, शिव और सुन्दर के सिवाय और कुछ नहीं है, अस्तु उसका अंश भी अपने आदि स्त्रोत के समान उसी का स्वरूप है।

निश्चय ही मनुष्य का सत्य रूप ईश्वर रूप ही है। अपने इस स्वरूप के विपरीत कार्य करने वाले या तो पूरे मनुष्य नहीं माने जा सकते अथवा वह मानना होगा कि वे वह सब करके एक मौलिक अपराध कर रहे है, एक पाप कर रहे है, जो उन्हें नहीं करना चाहिये।

यह निश्चय हो जाने पर कि मनुष्य आत्मा रूप में परमात्मा ही है, यदि वह अपने गौरव, अपनी गरिमा और अपने महत्व का प्रतिपादन नहीं कर पाता तो यह उसकी कमी ही कही जायेगी किसी महान पिता का पुत्र होकर भी, किसी शक्तिशाली का अंग होकर भी यदि कोई अपने आपमें निकृष्ट और दीन हीन बना रहना चाहता है तो यह उसका दुर्भाग्य ही माना जायेगा। अन्यथा अपने उच्च से उच्च सर्वोच्च स्वरूप का ज्ञान हो जाने पर निकृष्ट न होगा। ऐसे महान, व्यक्तित्व के पास ईर्ष्या द्वेष, छल कपट, शोषण, क्रूरता आदि आसुरी वृत्तियों का क्या काम रह सकता है।

आइए अपने अन्दर जिज्ञासा जागृत कर अनुभव के आधार पर अपने सत्यस्वरूप का साक्षात्कार करे, उसमें विश्वास और उसी के अनुरूप अपना आचरण बनायें। यदि इस विकास में हमारी निम्न वृत्तियाँ बाधक बनती है तो मान ले कि यही वह अवरोध है, यह वह आवरण है जो हमें अपने वास्तविक स्वरूप की ओर जाते और उसे देखने में बाधा डाल रहा है। सौंदर्यानुभूति और सत्कर्मों की ओर से चलकर और ईर्ष्या द्वेष, मद मत्सर, लोभ, क्रोध आदि दूषणों को छोड़ते हुए आत्मा स्वरूप की ओर सरलतापूर्वक पहुँचा जा सकता है।

हम सब परमपिता परमात्मा, उस सर्वव्यापक और सर्वशक्तिमान तत्व उस आदि एवं अंतिम स्त्रोत से निकली इकाइयाँ है, जिनका वास्तविक स्वरूप वही एक प्रभु एवं विभु है, अपने उस स्वरूप को पहचाने और तद्रूप होकर उसी स्वरूप को प्राप्त करें।

✍️ परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य
📖 अखण्ड ज्योति फरवरी 1969

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👉 आज का सद्चिंतन Aaj Ka Sadchintan 18 July 2026



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👉 प्रेरणादायक प्रसंग 18 July 2026



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