बुधवार, 4 जुलाई 2018

👉 आओ देखे समस्या कहां है

👉 अचानक इस देश मे #रेप क्यो बढ़ गए ?

आओ देखे समस्या कहां है कुछ समझने की कोशिश करें कुछ उद्धारण से समझते हैं

🔷 1) लोग कहते हैं कि #रेप क्यों होता है?

एक 8 साल का लडका सिनेमाघर मे राजा हरिशचन्द्र फिल्म देखने गया और फिल्म से प्रेरित होकर उसने सत्य का मार्ग चुना और वो बडा होकर महान व्यक्तित्व से जाना गया ।

#परन्तु
🔷 आज 8 साल का लडका #टीवी पर क्या देखता है ?
सिर्फ #नंगापन और #अश्लील वीडियो और #फोटो, मैग्जीन में अर्धनग्न फोटो, पडोस मे रहने वाली भाभी के छोटे कपडे!!

लोग कहते हैं कि रेप का कारण बच्चों की #मानसिकता है।
पर वो मानसिकता आई कहा से?
उसके जिम्मेदार कहीं न कहीं हम खुद जिम्मेदार है। क्योकि हम #joint family में नही रहते।
हम अकेले रहना पसंद करते हैं। और अपना परिवार चलाने के लिये माता पिता को बच्चों को अकेला छोड़कर काम पर जाना है। और बच्चे अपना अकेलापन दूर करने के लिये #टीवी और #इन्टरनेट का सहारा लेते हैं।
और उनको देखने के लिए क्या मिलता है सिर्फ वही #अश्लील# #वीडियो और #फोटो तो वो क्या सीखेंगे यही सब कुछ ना?
अगर वही बच्चा अकेला न रहकर अपने दादा दादी के साथ रहे तो कुछ अच्छे संस्कार सीखेगा ।
कुछ हद तक ये भी जिम्मेदार है।

👉 2) पूरा देश रेप पर उबल रहा है,

छोटी छोटी बच्चियो से जो दरिंदगी हो रही उस पर सबके मन मे गुस्सा है, कोई सरकार को कोस रहा, कोई समाज को तो कई feminist सारे लड़को को बलात्कारी घोषित कर चुकी है !

लेकिन आप सुबह से रात तक
कई बार sunny leon के कंडोम के add देखते है ..!!
फिर दूसरे add में रणवीर सिंह शैम्पू के ऐड में लड़की पटाने के तरीके बताता है ..!!
ऐसे ही Close up, लिम्का, Thumsup भी दिखाता है #लेकिन तब आप को गुस्सा नही_आता है, है ना ?

आप अपने छोटे बच्चों के साथ music चैनल पर सुनते हैं
दारू बदनाम कर दी,
कुंडी मत खड़काओ राजा,
मुन्नी बदनाम, चिकनी चमेली, झण्डू बाम, तेरे साथ करूँगा गन्दी बात, और न जाने ऐसी कितनी मूवीज गाने देखते सुनते है
#तब आप को गुस्सा नहीआता??

मम्मी बच्चों के साथ Star Plus, जी TV, सोनी TV देखती है जिसमें एक्टर और एक्ट्रेस सुहाग रात मनाते है। किस करते है। आँखो में आँखे डालते है
और तो और भाभीजी घर पर है, जीजाजी छत पर है, टप्पू के पापा और बबिता जिसमे एक व्यक्ति दूसरे की पत्नी के पीछे घूमता लार टपकता नज़र आएगा
पूरे परिवार के साथ देखते है।-
#इन सबserial को देखकर आप को गुस्सा नहीआता ??

फिल्म्स आती है जिसमे किस (चुम्बन, आलिंगन), रोमांस से लेकर गंदी कॉमेडी आदि सब कुछ दिखाया जाता है।
पर आप बड़े मजे लेकर देखते है
इन सबको देखकर आप को गुस्सा नही_आता ??

खुले आम TV- फिल्म वाले आपके बच्चों को बलात्कारी बनाते है, उनके कोमल मन मे जहर घोलते है।
#तब आपको गुस्सा नही आता ?
क्योकि
आपको लगता है कि
रेप रोकना सरकार की जिम्मेदारी है। पुलिस, प्रशासन, न्यायव्यवस्था की जिम्मेदारी है ....
लेकिन क्या समाज, मीडिया की कोई जिम्मेदारी नही। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में कुछ भी परोस दोगे क्या?

आप तो अखबार पढ़कर, News देखकर बस गुस्सा निकालेंगे, कोसेंगे सिस्टम को, सरकार को, पुलिस को, प्रशासन को, DP बदल लेंगे, सोशल मीडिया पे खूब हल्ला मचाएंगे, बहुत ज्यादा हुआ तो कैंडल मार्च या धरना कर लेंगे लेकिन....

TV, चैनल्स, वालीवुड, मीडिया को कुछ नही कहेंगे। क्योकि वो आपके मनोरंजन के लिए है ।
सच पुछिऐ तो TV Channels अश्लीलता परोस रहे है ...
पाखंड परोस रहे है ,
झूंठे विषज्ञापन परोस रहे है ,
झूंठेऔर सत्य से परे ज्योतिषी पाखंड से भरी कहानियां एवं मंत्र, ताबीज आदि परोस रहै है।
उनकी भी गलती नही है, क्योंकि हम आप खरीददार हो .....??
बाबा बंगाली, तांत्रिक बाबा, स्त्री वशीकरण के जाल में खुद फंसते हो।

👉 3) अभी टीवी का खबरिया चैनल मंदसौर के गैंगरेप की घटना पर समाचार चला रहा है |

जैसे ही ब्रेक आये :
पहला विज्ञापन बोडी स्प्रे का जिसमे लड़की आसमान से गिरती है,
दूसरा कंडोम का ,
तीसरा नेहा स्वाहा-स्नेहा स्वाहा वाला,
और चौथा प्रेगनेंसी चेक करने वाले मशीन का......
जब हर विज्ञापन, हर फिल्म में नारी को केवल भोग की वस्तु समझा जाएगा तो बलात्कार के ऐसे मामलों को बढ़ावा मिलना निश्चित है ......

क्योंकि
"हादसा एक दम नहीं होता,
वक़्त करता है परवरिश बरसों....!"
ऐसी निंदनीय घटनाओं के पीछे निश्चित तौर पर भी बाजारवाद ही ज़िम्मेदार है ..

👉 4) आज सोशल मीडिया इंटरनेट और फिल्मों में @पोर्न परोसा जा रहा है ।
तो बच्चे तो बलात्कारी ही बनेंगे ना
😢😢😢

ध्यान रहे समाज और मीडिया को बदले बिना ये आपके कठोर सख्त कानून कितने ही बना लीजिए।
ये घटनाएं नही रुकने वाली है।

इंतज़ार कीजिये बहुत जल्द आपको फिर केंडल मार्च निकालने का अवसर
हमारा स्वछंद समाज, बाजारू मीडिया और गंदगी से भरा सोशल मीडिया देने वाला है ।

अगर अब भी आप बदलने की शुरुआत नही करते हैं तो समझिए  कि ......

फिर कोई भारत की बेटी
निर्भया
आसिफा
गीता
दिव्या
संस्कृति
की तरह बर्बाद होने वाली है।

आपको आपकी बेटियां बचाना है तो सरकार कानून पुलिस के भरोसे से बाहर निकलकर समाज मीडिया और सोशल मीडिया की गंदगी साफ करने की आवश्यकता है।

👉 Motivational Story 4 July

🔶 A rich man was extremely miser. He had instructed even the ladies of his house never to give alms to the beggars. One day a crippled beggar came to the house. The newly-wed daughter-in-law of the house was from a noble family. She told the beggar that the house had nothing to give him. He beggar asked, “Then what do you people eat?” Came the reply, “We eat the left overs and stale foods, and when even these will be consumed, we too will start begging like you.”
  
🔷 The master of the house upstairs was overhearing this dialogue. He was greatly annoyed. The daughter-in-law explained, “Whatever we have earned as a result of good deeds in our previous births, we are reaping and consuming only that. We in this life are adding nothing to that asset, devoid as we are completely of the qualities of charity and munificence. Naturally when the previously wealth of ‘punya’ is exhausted, we too will be left distitute. The rich man highly appreciated the wisdom of the young damsel and thence onwards started devoting his time and money towards the general weal.

📖 From Pragya Puran

👉 अपने और पराये

🔶 ईसा ने कहा, दुश्मन को प्यार करो। एक भाई ने विनोद में कहा था कि ये गाँधी के चेले दुश्मन को ही प्यार करते हैं, लेकिन मित्र को प्यार नहीं करते! बिल्कुल ठीक है। अगर प्यार करने में पक्षपात करना हो, तो दुश्मन पर ही पक्षपात करूँगा, क्योंकि मित्र पर सहज प्यार है ही। मित्र के लिये खास ध्यान न रहा और परवाह न रही, तो भी उनके लिये तो सहज प्यार होता ही है। इसीलिये दुश्मन पर सविशेष प्यार करूँगा। यह हमारी प्रतिज्ञा है कि जो हमको सकारण दूर मानते हैं, उन पर प्यार करना हमारा फर्ज हैं। निष्पक्ष प्यार के लिये यह आवश्यक शर्त है कि शत्रु के लिये पक्षपात हो।

🔷 मित्रों पर प्यार करो, यह फिजूल आज्ञा है। जैसे पानी को कहा जाय कि नीचे की तरफ बहे, तो यह व्यर्थ आज्ञा होगी। नीचे की तरफ बहना उसका सहल धर्मं हैं, वैसे ही मित्र का प्यार तो सहज प्राप्त है, दुश्मन पर प्यार सहज प्राप्त नहीं होता है, बल्कि दुःख की बात हे कि दुश्मन के लिये सहज प्राप्त द्वेष ही है। इस हालत में उनके बारे में प्रेम का प्रकाश ज्यादा ही होना चाहिये, यह अहिंसा का एक विशेष दर्शन है। इसलिये जो निष्पक्ष अहिंसक हैं, वह दूसरों पर ज्यादा अनुराग रखेगा।

🔶 मेरी माँ का एक किस्सा याद आता है। मेरे पिताजी हमारे घर में हमेशा बाहर के कोई-न-कोई एक लड़के को रख लेते थे और उस लड़के को ठीक घर के जैसे ही रखा जाता था, उसी प्रकार खाना-पीना अध्ययन आदि उसका चलता था। पिताजी को तो उसमें पुण्य-प्राप्ति होती थी, लेकिन सारी सेवा माँ को करनी पड़ती थी। घर में कभी-कभी रोटी बच जाती थी, पहले तो माँ ही दोपहर की उस ठंडी रोटी को खा लेती थी, लेकिन उसके खाने के बाद भी बची, तो वह मुझको देती थी। उस लड़के को तो ताजी रोटी ही मिलती थी। उसको कभी ठंडी रोटी नहीं दी जाती थी। तो मैं कभी-कभी माँ के साथ विनोद कर लेता था, क्योंकि वही एक मेरे विनोद का म्यान थी। मैं उसको विनोद में कहता था कि अभी तेरा भेदभाव मिटा नहीं, मुझको दोपहर की रोटी देती है और उस लड़के को ताजी रोटी खिलाती हो। तिस पर उसने जवाब दिया था, क्या जवाब दिया था? वाह रे वाह! डसने कहा कि “वह मुझे भगवत् स्वरूप दीखता है और तू मुझे पुत्र-स्वरूप दीखता है। तुझमें मेरी आसक्ति पड़ी है तेरे लिये मेरे दिल में पक्षपात है ही, तू भी मुझे जब भगवत् स्वरूप दिखेगा, तब यह भेदभाव नहीं करूँगी।

🔷 रामदास ने भगवान के बारे लिखते हुये कहा है कि वह दयादक्ष, दया करने में प्रवीण है। वह सब के लिये समान हैं, फिर भी वह दुखियों का पक्षपात करता है। वह साक्षी होते हुये भी पक्षपात करता है। यह पक्षपात जो भगवान में रहता हे, वह समत्व होते हुये भी रहता है। हम उसका अनुकरण करना चाहेंगे, तो यही होगा कि जो लोग हमसे भिन्न हैं, उसके लिये ज्यादा अनुराग हमारे दिल में रहेगा।

🔶 संत तुकाराम जबरदस्त प्रतिभावान कवि थे। उनके वाक्य चुभ जाते है। उनके वाक्य दिल को नहीं, लेकिन दिमाग को चुभ जाते है। उसने लिखा है कि अपनी देह और अपनी देह से संबंधियों की निन्दा करनी चाहिये और दूसरे जो हैं, उनकी वन्दना करनी चाहिये। श्वान-शूकर की भी वंदना करनी चाहिये।

✍🏻 सन्त विनोबा
📖 अखण्ड ज्योति जुलाई 1961 पृष्ठ 21

👉 ज्योति फिर भी बुझेगी नहीं (भाग 1)

🔶 अखण्ड-ज्योति की प्रकाश प्रेरणा से अनेकों महत्वपूर्ण और दर्शनीय सेवा संस्थाओं की निर्धारण हुआ है। वे अपने-अपने प्रयोजन को आशातीत सफलता के साथ सम्पन्न कर रहे हैं। उनमें से मथुरा में विनिर्मित गायत्री तपोभूमि युग निर्माण योजना से प्रज्ञा परिवार का हर सदस्य परिचित है। आचार्य जी की जन्मभूमि में स्थित शक्तिपीठ से जुड़े लड़कों के इण्टरमीडिएट कालेज लड़कियों के इण्टर महाविद्यालय तो अधिकाँश ने देखे है। इसके अतिरिक्त देश के कोने-कोने में विनिर्मित चौबीस सौ प्रज्ञा संस्थानों की गणना होती है। इन सभी को दूसरे शब्दों में “चेतना विस्तार केन्द्र” कहना चाहिए। इन सभी में प्रधानतया जन-मानस के परिष्कार को प्रशिक्षण ही अपनी-अपनी सुविधा और शैली से अनुशासन में बद्ध रहकर चलता है।

🔷 हरिद्वार का शांतिकुंज-गायत्री तीर्थ और ब्रह्मवर्चस देखने में इमारतों की दृष्टि से अपनी स्वतंत्र इकाई जैसे दीखते है। पर यदि कोई इनके निर्माण का मूलभूत आधार गहराई में उतरकर देखे तो वे सभी अखण्ड-ज्योति के अण्डे-बच्चे दिखाई पड़ेंगे। यहाँ यह समझ लेना भी आवश्यक होगा कि वह पत्रिका मात्र नहीं है, उसमें लेखक का सूत्र संचालक का दिव्य प्राण भी आदि से अन्त तक घुला है अन्यथा मात्र सफेद कागज को काला करके न कहीं किसी न इतनी बड़ी युग-सृजेताओं की सेवा वाहिनी खड़ी की है और न इतने ऊँचे स्तर के इतनी बड़ी संख्या में सहायक-सहयोगी अनुयायी ही मिले है। फिर इन अनुयायियों की भी यह विशेषता है कि जिस लक्ष्य को उनने हृदयंगम किया है। उसके लिए निरन्तर प्राणपण से मरते-खपते भी रहते है।

🔶 देश के कोने-कोने में बिखरी हुई प्रज्ञा पीठें, हरिद्वार और मथुरा की संस्थाएँ जो कार्य करती दीखती है उनके पीछे इन्हीं सहयोगियों का रीछ-वानरों जैसा भी और अंगद-हनुमान, नल-नील जैसा पराक्रम एवं त्याग काम करता देखा जा सकता है। यह सब अनायास ही नहीं हो गया। उन्हें बनाने, पकाने और शानदार बनाने में कोई अदृश्य ऊर्जा काम करती देखी जा सकती है। उसकी तेजस्विता और यथार्थता हजारों बार हजारों कसौटियों पर कसी जाती रही है और सौ टंच सोने की तरह खरी उतरती रही है। चमत्कार उसी का है। कौतूहलवर्धक कौतुक तो मदारी, बाजीगर भी दिखा लेते है पर व्यक्तित्व को साधारण से असाधारण बनाकर उन्हें कठिन कार्य क्षेत्र में उतार देना ऐसा कार्य है जिसकी तुलना करने के लिए किसी सामयिक प्रजापति की ही कल्पना उठती है; बुद्ध के धर्मचक्र प्रवर्तन और गान्धी के सत्याग्रह आन्दोलन का स्मरण दिलाती है।

.... क्रमशः जारी
✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
📖 अखण्ड ज्योति जनवरी पृष्ठ 28

👉 प्रेरणादायक प्रसंग 4 July 2018


👉 आज का सद्चिंतन 4 July 2018

👉 मजबूत आधारशिला रखना है—

🔶 युग निर्माण योजना की मजबूत आधारशिला रखे जाने का अपना मन है। यह निश्चित है कि निकट भविष्य में ही एक अभिनव संसार का सृजन होने जा रहा है। उसकी प्रसव पीड़ा में अगले दस वर्ष अत्यधिक अनाचार, उत्पीड़न, दैवीय कोप, विनाश और क्लेश, कलह से भरे बीतने हैं। दुष्प्रवृत्तियों का परिपाक क्या होता है, इसका दंड जब भरपूर मिल लेगा, तब आदमी बदलेगा। यह कार्य महाकाल करने जा रहा है। हमारे हिस्से में नवयुग की आस्थाओं और प्रक्रियाओं को अपना सकने योग्य जनमानस तैयार करना है। लोगों को यह बताना है कि अगले दिनों संसार का एक राज्य, एक धर्म, एक अध्यात्म, एक समाज, एक संस्कृति, एक कानून, एक आचरण, एक भाषा और एक दृष्टिकोण बनने जा रहा है, इसलिए जाति, भाषा, देश, सम्प्रदाय आदि की संकीर्णताएँ छोड़ें और विश्वमानव की एकता की, वसुधैव कुटुंबकम् की भावना स्वीकार करने के लिए अपनी मनोभूमि बनाएँ।

🔷 लोगों को समझाना है कि पुराने से सार भाग लेकर विकृत्तियों को तिलांजलि दे दें। लोकमानस में विवेक जाग्रत् करना है और समझाना है कि पूर्व मान्यताओं का मोह छोड़कर जो उचित उपयुक्त है केवल उसे ही स्वीकार शिरोधार्य करने का साहस करें। सर्वसाधारण को यह विश्वास कराना है कि धन की महत्ता का युग अब समाप्त हो चला, अगले दिनों व्यक्तिगत संपदाएँ न रहेंगी, धन पर समाज का स्वामित्व होगा। लोग अपने श्रम एवं अधिकार के अनुरूप सीमित साधन ले सकेंगे। दौलत और अमीरी दोनों ही संसार से विदा हो जाएँगी। इसलिए धन के लालची बेटे-पोतों के लिए जोड़ने-जाड़ने वाले कंजूस अपनी मूर्खता को समझें और समय रहते स्वल्प संतोषी बनने एवं शक्तियों को संचय उपयोग से बचाकर लोकमंगल की दिशाओं में लगाने की आदत डालें। ऐसी-ऐसी बहुत बातें लोगों के गले उतारनी हैं, जो आज अनर्गल जैसी लगती हैं।

🔶 संसार बहुत बड़ा है, कार्य अति व्यापक है, हमारे साधन सीमित हैं। सोचते हैं एक मजबूत प्रक्रिया ऐसी चल पड़े जो अपने पहिए पर लुढ़कती हुई उपरोक्त महान लक्ष्य को सीमित समय में ठीक तरह पूरा कर सके।

✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी
📖 अखण्ड ज्योति, मार्च 1969 पृष्ठ 59-60
http://literature.awgp.in/magazine/AkhandjyotiHindi/1969/March.59

👉 बुरी आदत:-

एक अमीर आदमी अपने बेटे की किसी बुरी आदत से बहुत परेशान था। वह जब भी बेटे से आदत छोड़ने को कहते तो एक ही जवाब मिलता, “अभी मैं इतना छोटा ह...