मंगलवार, 2 अक्तूबर 2018

👉 माँ की ममता

🔷 75 साल की उस बुढ़िया माँ का वजन लगभग 40 किलो होगा! आज जब तबियत बिगड़ने पर वो डॉक्टर को दिखाने गयी!

🔶 डॉक्टर ने कहा ‘ माताजी आप हेल्थ का ख्याल रखिये! आप का वजन जरूरत से ज्यादा कम है! आप खाने में जूस, सलाद, दूध, फल, घी, मेवा और हेल्थी फ़ूड लिजियें! नहीं तो आपकी सेहत दिनों दिन गिरती जायेगी और हालत नाजुक हो जायेंगे! ‘

🔷 उसने भारी मन से डॉक्टर की बात को सुना और बाहर निकल कर सोचने लगी, इतनी महंगाई में ये सब कहाँ से आएगा……??? और पिछले पचास सालों में, फ्रूट, घी, मेवा घर में लाया कौन है….???

🔶 बहुत ही मामूली पेंशन से जो थोडा बहुत पैसा मिलता है उससे घर के जरुरी सामान तो पति ले आतें है, लेकिन फल, जूस, हरी सब्जी, ये सब पति ने कभी ला कर नहीं दिया,….और खुद भी कभी ये सब खरीदने की हिम्मत नहीं कर सकी….क्यूंकि जब भी मन करता कुछ खाने का, खाली पर्स हमेशा मुंह चिढाने लगता….

🔷 शहर में … मामूली सी नौकरी में और जिंदगी की गहमागहमी में सारी जमा पूंजी, पति का PF, घर की सारी अमानत, संपदा, गहने जेवर सब एक बेटे और दो बेटियों की परवरिश, पढाई लिखाई शादी में में सब कुछ खत्म हो गया…

🔶 दूर दिल्ली में रह रहा एक बहुत बड़ी कंपनी में मैनेजर और मोटी तनख्वाह उठा रहा बेटा भी तो खर्चे के नाम पर सिर्फ पांच सौ रुपये देता है…वो भी महीने के….. बेटियों से अपने दुःख माँ ने सदा छुपाये है…उन्हें कभी अपने गमो में शामिल नहीं किया…आखिर ससुराल वाले क्या सोचेंगे…..???

🔷 अब बेटे के भेजे इन पांच सौं रुपये में बूढ़े माँ बाप तन ढके या मन की करें ????? उसने सोचा चलो एक बार बेटे को डॉक्टर की रिपोर्ट बता दी जाए..

🔶 उसने बेटे को फ़ोन किया और कहा – बेटा डॉक्टर ने बताया है की विटामिन, खून की की कमी, कमजोरी से से चक्कर आये थे….इसी लिए खाने में सलाद, जूस, फ्रूट, दूध, फल, घी, मेवा लेना शुरू करो!

🔷 बेटा – “माँ आप को जो खाना है खाओ, डॉक्टर की बात ना मानों….!” माँ ने कहा – बेटा, थोड़े पैसे अगर भेज देता तो ठीक रहता…..!

🔶 बेटा – ” माँ इस माह मेरा बहुत खर्चा हो रहा है, कल ही तेरी पोती को मैंने फिटनेस जिम जोईन कराया है, तुझे तो पता ही है, वो कितनी मोटी हो रही है, इसी लिए जिम जोईन कराया है…….उसके महीने के सात हजार रुपये लगेंगे…………..जिसमे उसका वजन, चार किलो हर माह कम कराया जाएगा….. और कम से कम पांच माह तो उसे भेजना ही होगा…….पैंतीस हजार का ये खर्चा बैठे बिठाये आ गया….अब जरुरी भी तो है ये खर्चा…!!

🔷 आखिर दो तीन साल में इसकी शादी करनी है और आज कल मोटी लड़कियां, पसंद कोई करता नहीं…..!! ”

🔶 माँ ने कहा – ” हाँ बेटा ये तो जरुरी था…..कोई बात नहीं वैसे भी डॉक्टर लोग तो ऐसे ही कुछ भी कहतें रहते है…..चक्कर तो गर्मी की वजह से आ गयें होंगे, वरना इतने सालों में तो कभी ऐसा नहीं हुआ…..खाना तो हमेशा से यही खा रही हूँ मैं…!!!”

🔷 बेटा – “हाँ माँ…..अच्छा माँ अभी मैं फोन रखता हूँ ….बेटी के लिए डाइट चार्ट ले जाना है और कुछ जूस, फ्रूट और डायट फ़ूड भी ….आप अपना ख्याल रखना!”
फोन कट गया….

🔶 माँ ने एक ग्लास पानी पिया… और साडी पर फोल लगाने मे लग गयी…. एक साड़ी में फोल लगाने के माँ को पन्द्रह रुपये मिलेंगे….....

🔷 माँ के पास आज साड़ी में फोल लगाने के तीन आर्डर है…माँ ने मन ही मन श्री गणेश का शुक्रिया अदा किया क्यूंकि आज वो आधा किलो लड्डू खरीद ही लेंगी गणेश जी की पूजा के लिए इन पैसो से…और मन ही मन अपने बेटे की सुखी और समृद्ध जिंदगी के लिए प्रभु श्री गणेश से प्रार्थना भी की!!

👉 आज का सद्चिंतन 2 October 2018


👉 प्रेरणादायक प्रसंग 2 October 2018


👉 परिवर्तन के महान् क्षण (भाग 18)

👉 त्रिधा भक्ति एवं उसकी अद्भुत सिद्धि 
 
🔷 इस प्रयोग के अन्तर्गत अपना आहार-विहार वस्त्र-विन्यास रहन-सहन व्यवहार, अभ्यास ऐसा रखा गया जो न्यूनतम था। आहार इतना सस्ता जितना कि देश के गरीब से गरीब व्यक्ति को मिलता है। वस्त्र ऐसे जैसे कि श्रमिक स्तर के लोग पहनते हैं। महत्त्वाकांक्षा न्यूनतम। आत्म प्रदर्शन ऐसा जिसमें किसी सम्मान, प्रदर्शन और अखबारों में नाम छपने जैसी ललक के लिए कोई गुंजायश न रहे। व्यवहार ऐसा जैसा बालकों का होता है। यह पृष्ठभूमि बना लेने के उपरान्त शारीरिक और मानसिक श्रम इतना जितना कि कोई पुरुषार्थ परायण कर सकता है, इसे पूजा उपासना तो नहीं पर जीवन साधना अवश्य कहा जा सकता है।    
  
🔶 इसके उपरान्त उपासना की निर्धारित पद्धति की बारी आई। उसमें श्रद्धा-विश्वास का गहरा पुट रहा और ध्यान रहा कि किसी भी अधिक आवश्यक काम के बहाने उसे किसी भी प्रकार चुकाए जाने का अवसर न मिलने पाए। चिन्तन निजी लाभ का नहीं, परमार्थ सम्पादन का ही रहा। यही कारण है कि अपने पास निजी कहे जाने योग्य एक कानी-कौड़ी की भी कोई संचित सम्पदा नहीं है। पैतृक सम्पदा बड़ी थी पर उसका भी एक-एक पैसा उपयोगी परमार्थिक इमारतों में लगा दिया। यह सारा जंजाल सिर पर से उतर जाने के उपरान्त व्यामोह से विरक्त मन इतना खाली हो गया जिसका ‘‘वैक्यूम’’ एक सशक्त चुम्बक की तरह ईश्वरीय अनुकम्पा की अजस्र वर्षा करने लगा। सामर्थ्य भी इतनी आ धमकी जिसके लिए अपनी ओर से नगण्य जितना ही प्रयत्न बन पड़ा।
  
🔷 अध्यात्म सिद्धियों के साथ जुड़ा हुआ माना जाता है। क्या वे हमें हस्तगत हुईं? इसके उत्तर में यही कहा जा सकता है ‘‘हाँ’’। उनमें से यहाँ कुछ ऐसे प्रसंगों की ही चर्चा की जा सकती है जो सर्वविदित हैं, जिनके लिए हर किसी को अपनी आँखें और अपनी निज की जानकारी ही साक्षी रूप में पर्याप्त हो सकती है। उसके लिए किसी प्रकार की खोजबीन करने की कदाचित ही किसी को आवश्यकता पड़े।

.... क्रमशः जारी
✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
📖 परिवर्तन के महान् क्षण पृष्ठ 21

👉 Life will give you back....

A son and his father were walking on the mountains.
Suddenly, his son falls, hurts himself and screams.
To his surprise, he hears the voice repeating,
somewhere in the mountain.
Curious, he yells: ‘‘Who are you?’’
He receives the answer: ‘‘Who are you?’’
And then he screams to the mountain: ‘‘I admire you!’’
The voice answers: ‘‘I admire you!’’
Angered at the response, he screams: ‘‘Coward!’’
He receives the answer: ‘‘Coward!’’
He looks to his father and asks: ‘‘What’s going on?’’
The father smiles and says: ‘‘My son, pay attention.’’
Again the man screams: ‘‘You are a champion!’’
The voice answers: ‘‘You are a champion!’’
The boy is surprised, but does not understand.
Then the father explains: ‘‘People call this ECHO, but really this is LIFE.
It gives you back everything you say or do.
Our life is simply a reflection of our actions.
If you want more love in the world, create more love in your heart.
If you want more competence in your team, improve your competence.
This relationship applies to everything, in all aspects of life;
Life will give you back everything you have given to it.

👉 कर्त्तव्य पालन का अविरल आनन्द

🔷 समराँगण की लीला में तलवार आनन्द पाती है, तीर अपनी उड़ान और सनसनाहट में मजा लेता है। पृथ्वी इस आकाश में अपना अन्धाधुन्ध चक्कर लगाने के आनन्द में विभोर है, सूर्यनारायण अपने जगमगाते वैभव में तथा अपनी सनातन गति में सदा सम्राट्-सदृश आनन्द का भोग कर रहा है, तो फिर सचेतन यन्त्र, तू भी अपने नियत कर्म को करने का आनन्द उठा।

🔶 तलवार अपने बनाये जाने की माँग नहीं करती, न अपने उपयोगकर्ता के कार्य में बाधा ही डालती है, और टूट जाने पर विलाप भी नहीं करती। बनाए जाने में एक प्रकार का आनन्द है, प्रयुक्त किए जाने में भी एक आनन्द है। इसी के सम आनन्द की तू खोज कर।

🔷 क्योंकि तूने यन्त्र को कार्यकर्ता और स्वामी समझने की भूल की है और क्योंकि तू अपनी अज्ञानमयी इच्छा के कारण, अपनी निजी उपयोगिता का विचार करना पसंद करता है, तुझे दुःख और यातनाएँ झेलनी पड़ती हैं, बार-बार लाल दहकती हुई भट्टी के नरक में घुसना पड़ता है, और यह जब तक कि तू अपना मनुष्योचित पाठ पूरा नहीं कर लेगा।

✍🏻 योगी अरविन्द
📖 अखण्ड ज्योति अप्रैल 1967 पृष्ठ 1
http://literature.awgp.org/akhandjyoti/1967/April/v2.1

👉 फैशन का कलंक धो डालिये (भाग 1)

🔷 यह बात सही है कि कोई भी मनुष्य नहीं चाहता है कि वह किसी दूसरे की दृष्टि में भद्दा, कुरूप अथवा अनाकर्षक लगे। प्रत्येक व्यक्ति की यही इच्छा रहती है कि वह देखने वालों की नजरों में समाये। लोग उसे देख कर अनुभव करें कि यह कायदे-करीने का विशेष व्यक्ति है। यथा-शक्य दर्शनीय बनने का लोग प्रयत्न भी करते हैं।

🔶 आकर्षक दिखाई देने की इच्छा अपने आप में कोई बुरी बात नहीं है। हर प्रबुद्ध प्राणी सौन्दर्य-प्रेमी होता है। जब हम या आप ऐसी वेश-भूषा में दीखते हैं जो आकर्षक हो तो एक प्रकार से लोगों की सौन्दर्य दृष्टि को सन्तुष्ट करते हैं, उन्हें प्रसन्न करते हैं, जिससे सद्भाव एवं सौहार्द का वातावरण उत्पन्न होता है। समाज में स्वच्छता, सुन्दरता और समीचीनता की प्रवृत्तियां बढ़ती हैं। इसलिए भली प्रकार का रहन-सहन किसी प्रकार से आलोचना का विषय नहीं माना जाता।

🔷 किन्तु जब यही अच्छी बात अपनी अपेक्षित सीमा के बाहर चली जाती है, तब बुराई की संज्ञा पाकर आक्षेप का विषय बन जाती है।

🔶 आज ढंग से रहने-सहने का अर्थ फैशन मान लिया गया है। अधिक से अधिक प्रदर्शन के साथ सजे बजे रहने में ही सुन्दरता, सुरूपता तथा आकर्षण का निवास समझना आज की एक विशेष अल्पज्ञता है। अंग्रेजी का ज्ञान तो दूर—भाषा का भी एक अक्षर न जानने वाले निरक्षर व्यक्ति तक कोट-पैंट, टाई और हैट-बूट में देखे जाते हैं। जाने कितने लोग बेजरूरत सैर-सपाटे और दिखावे के ही लिए मोटरें, बघ्घियां, हाथी, घोड़े आदि सवारियों को रखा करते हैं। अनेक बड़े आदमी अपनी मोटरकारों में रेडियो, ट्रांजिस्टर लगाये हुये शहर की सड़कों पर बजाते हुए चले जाते हैं।

.... क्रमशः जारी
✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
📖 भारतीय संस्कृति की रक्षा कीजिए पृष्ठ 109
 

👉 वास्तविक सौंदर्य

राजकुमारी मल्लिका इतनी खूबसूरत थी कि कईं राजकुमार व राजा उसके साथ विवाह करना चाहते थे, लेकिन वह किसी को पसन्द नहीं करती थी। आखिरकार उन र...