मंगलवार, 9 अगस्त 2016

👉 समाधि के सोपान (भाग 13) (In The Hours Of Meditation)



अन्त: करण के मौन मैं गुरुदेव की वाणी कहतीं है-
🔴 वत्स ! इन्द्रियाँ सदैव आत्मा के विरुद्ध संघर्ष करती हैं। उन्त: सतत सावधान रहो। जीवन कितना उथला है। इन्द्रियों पर विश्वास न करो। ये सुख तथा दुःख के द्वारा विचलित होती रहती हैं। उनके ऊपर उठ जाओ। तुम आत्मा हो, शरीर का किसी भी क्षण नाश हो सकता है। सचमुच कौन उस क्षण को जानता है! इसलिए सदैव अपनी दृष्टि लक्ष्य पर स्थिर रखो। अपने मन को उन्नत विचारों से परिपूर्ण कर लो। मृत्यु के क्षणों में नहीं किन्तु जीवन के क्षणों में मन को मुक्त और पवित्र रखो। तब यदि मृत्यु अकस्मात् तुम्हें अपना ग्रास बना ले तो भी तुम प्रस्तुत हो। इस प्रकार जीवन जीओ मानो इसी क्षण तुम्हारी मृत्यु होने वाली  है। तभी तुम सच्चा जीवन जी सकोगे। समय भाग रहा है। यदि तुम शाश्वत तथा अमर विचारों में डूबे रहो तभी भागते समय को शाश्वत बना पाओगे।

🔵 जब तुम्हारा शरीर मृत्यु को प्राप्त होगा, तब यदि इस पृथ्वी पर तुमने अपने आदर्श के अनुसार जीवन नहीं बिताया हो तो तुम्हें केवल पश्चाताप ही होगा। यह प्राणान्तक शब्द, 'यदि' लापरवाही और पश्चाताप का सूचक है! हजारों ऐसे जीव हैं जो पश्चातापपूर्वक कह रहे हैं यदि शरीर रहते मैंने ऐसा किया होता तो अभी मैं अपने भगवान के समीप होता। अत: इसी क्षण अपने प्राणों को सर्वान्त:करण पूर्वक अपने आदर्श के लिए समर्पित कर दो। कहो, 'प्रभु मुझे दर्शन दो। मुझे आंतरिकता दो। तुम्हारे लिए व्याकुलता दो। महान् भक्तों की -यह प्रार्थना प्रति दिन दुहराओ। 'प्रभु मैं तुमसे ही प्रेम करूँ, केवल तुमसे ! ''

🔴 मनुष्य की आत्मा अनंत है। तुम्हारे अधिकार में अनंत शक्ति है। अनुभव करो कि तुम परमात्मा के अंश हो। वह तुममें श्वास प्रश्वास ले रहा है। वह तुममें निवास करता है। वह तुममें गमन करता हैं। तुम्हारा अस्तित्व ही परमात्मा में है। जब तुम इस तथ्य की अनुभूति कर लोगे तब  तुम्हारे सभी भय निरस्त हो जायेंगे तथा तुम अभय की स्थिति प्राप्त कर लोगे।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 एफ. जे. अलेक्जेन्डर

👉 आज का सद्चिंतन Aaj Ka Sadchintan 19 Aug 2026

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