सोमवार, 15 फ़रवरी 2021

👉 जुट पड़ें निर्माण में



फिर से गूँजा है बसन्ती राग अब जागें सभी,
जुट पड़ें निर्माण में अब छोड़कर आलस सभी।

पौष में हम जम गए थे, राह में हम थम गये थे,
बैठे थे खुद में सिमटकर, अपने में ही रम गए थे,
जो न अब भी जाग पाया, जाग पायेगा कभी?
फिर से गूँजा है बसन्ती राग अब जागें सभी।

माघ है लाया नया संदेश  फिर  उत्साह का,
फिर उठो पाथेय ले चिंतन करो नव राह का,
जो समय आया है  दुर्लभ वो न आएगा कभी,
फिर से गूँजा है बसन्ती राग अब जागें सभी।

ये न समझो है कठिन भव बंधनो को तोड़ना,
त्यागकर निज स्वार्थ सब जन-जन से खुद को जोड़ना,
फागुनी उल्लास में अब मन मुदित होंगे सभी,
फिर से गूँजा है बसन्ती राग अब जागें सभी।

रंग बसंती है मिला गुरुवर से ये अनुदान में,
हम नहीं पीछे हटेंगे, त्याग में बलिदान में,
संकल्प पूरे होते हैं जब मिलके करते हैं सभी,
फिर से गूँजा है बसन्ती राग अब जागें सभी।

~ सुधीर भारद्वाज

👉 तपोभूमि है गुरुवर की



तपोभूमि है गुरुवर की, यह जनजन  का गुरुधाम ।
शांतिकुंज  चैतन्य  तीर्थ  को,  बारम्बार  प्रणाम।।

गुरुकुल आरण्यक आश्रम है, होता जनकल्याण है। 
दिव्य प्रखर उर्जा गुरुवर की,संचारित अविराम है।। 
ऋषियों की यह दिव्य भूमि है, गंगा गोद ललाम। 
शांतिकुंज  चैतन्य  तीर्थ  को,  बारम्बार  प्रणाम।।

कठिन तपस्या से गुरुवर ने, जाग्रत तीर्थ बनाया।
गायत्री के महाशक्ति को,जन जन तक  पहुँचाया।।
स्वर्ण जयंती  है  शांतिकुंज की, माँ गायत्री धाम।
शांतिकुंज  चैतन्य  तीर्थ  को,  बारम्बार  प्रणाम।।

रोम रोम पुलकित हो जाता,शांतिकुंज में आने से।
अंतर्मन पुष्पित हो जाता, तीर्थ वास कर पाने से।।
जप ध्यान यज्ञ और योग यहाँ,होते रहते अविराम। 
शांतिकुंज  चैतन्य  तीर्थ  को,  बारम्बार  प्रणाम।।

उमेश यादव

👉 स्वाध्याय मंडल, प्रज्ञा संस्थान और प्रज्ञा केन्द्र (भाग १)

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