गुरुवार, 19 अक्टूबर 2017

👉 देवत्व विकसित करें, कालनेमि न बनें (भाग 7)

🔴 कुछ नई स्कीम है, जो आज गुरुपूर्णिमा के दिन कहना है और वह यह है कि प्रज्ञा विद्यालय तो चलेगा यहीं, क्योंकि केन्द्र तो यही है, लेकिन जगह-जगह प्रज्ञा पाठशालाओं की स्थापना हमें करनी है। इसके लिए आप सब जितने भी आदमी हैं, उनको एक काम सौंपते हैं। एक महीने की प्रज्ञा पाठशालाएँ तो यहीं होंगी, पर पन्द्रह दिन की पाठशाला क्षेत्रों में शक्तिपीठों पर चलेंगी। यहाँ बड़े साइज का प्रमाण-पत्र उत्तीर्ण होने पर दिया जाता है, पर वहाँ छोटे साइज का दिया जाएगा। परीक्षा ली जाएगी और वहाँ भी हम नेता बनाएँगे। आपको हम हिन्दुस्तान का ही नहीं, सारे विश्व का नेता बनाने वाले हैं। हिन्दुस्तान में हमने दस-दस गाँवों के खण्ड काटे हैं और उन्हें एक-एक व्यक्ति के सुपुर्द किया है और कहा कि आप अपने यहाँ प्रज्ञा पाठशालाएँ चलाएँ। पिछले साल आप लोगों ने हमारे कहने पर किसी ने यज्ञ किए, किसी ने शक्तिपीठ बनाए, किसी ने क्या किया, हजारों काम बताए और लोगों ने किए हैं। इस वर्ष अब आप सब लोग यह विचार लेकर जाएँ कि या तो हम प्रज्ञा पाठशाला चलवाएँगे। इस कार्य में कोई रुकावट नहीं आवेगी।
      
🔵 आज गुरुपूर्णिमा के दिन से आप लोग एक काम यह करना कि हमेशा यह अनुभव करना कि आप देवता हैं। रीछ-बन्दर का लिवास पहने बैठे हैं। कोई कुर्ता पहने बैठा है, कोई धोती पहने बैठा है, कोई चश्मा लगाए बैठा है, तो कोई कुछ किए बैठा है, पर आप हैं वास्तव में देवता, जो किसी खास काम के लिए, खास उद्देश्य के लिए, किसी खास निमन्त्रण पर आप काम करने के लिए आए हैं। यह हुई बात नम्बर एक। दो, जो आपको मुश्किल जान पड़ती है कि संसार में से बुराइयाँ कैसे दूर होंगी और बुराईयों की वृद्धि कैसे दूर होंगी और अच्छाइयों की वृद्धि कैसे होगी? इस सम्बन्ध में नोस्ट्राडेमस की राजनीतिक भविष्यवाणी तो हमने बता दी है और अब अपनी स्वयं की भविष्यवाणी बताते हैं कि हमने आपके बैरियों को दुश्मनों को मार दिया है।

🔴 वे मरे हुए रखे हैं और आपके लिए श्रेय जीवित हैं, सौभाग्य जीवित है। आपके लिए मुकुट जीवित है, बड़प्पन जीवित है, आप उस बड़प्पन को उठा लेना। आज आपसे तीसरी बात यह कहनी थी कि नालन्दा विश्वविद्यालय बनाने का हमने संकल्प लिया था कि एक लाख कार्यकर्ता हम देश को, समाज को, विश्व को देंगे। इस काम में आप लोग हमारी मदद कीजिए, और पन्द्रह-पन्द्रह दिन के लिए अपने यहाँ प्रज्ञा पाठशाला चलाने के लिए कोशिश कीजिए। हम वहाँ पढ़ाने के लिए तो नहीं आएँगे, पर अपनी शक्ति देंगे, अपनी बुद्धि देंगे, अपनी भावना देंगे, अपना प्राण देंगे, अपना जीवट देंगे—सब चीज देंगे, इसलिए जब आदमी जाएगा तो कुछ का कुछ होकर जाएगा।
 
🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य (अमृतवाणी)

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