शनिवार, 7 अक्तूबर 2017

👉 कर्म फल:-

🔴  इन्सान जैसा कर्म करता है कुदरत या परमात्मा उसे वैसा ही उसे लौटा देता है।

🔵  एक बार द्रोपदी सुबह तडके स्नान करने यमुना घाट पर गयी भोर का समय था तभी उसका ध्यान सहज ही एक साधु की ओर गया जिसके शरीर पर मात्र एक लँगोटी थी। साधु स्नान के पश्चात अपनी दुसरी लँगोटी लेने गया तो वो लँगोटी अचानक हवा के झोके से उड पानी मे चली गयी ओर बह गयी।

🔴  सँयोगवस साधु ने जो लँगोटी पहनी वो भी फटी हुई थी। साधु सोच मे पड़ गया कि अब वह अपनी लाज कैसे बचाए थोडी देर मे सुर्योदय हो जाएगा और घाट पर भीड बढ जाएगी।

🔵  साधु तेजी से पानी के बाहर आया और झाडी मे छिप गया। द्रोपदी यह सारा दृश्य देख अपनी साडी जो पहन रखी थी, उसमे आधी फाड कर उस साधु के पास गयी ओर उसे आधी साडी देते हुए बोली-तात मै आपकी परेशानी समझ गयी। इस वस्त्र से अपनी लाज ढँक लीजिए।

🔴  साधु ने सकुचाते हुए साडी का टुकडा ले लिया और आशीष दिया। जिस तरह आज तुमने मेरी लाज बचायी उसी तरह एक दिन भगवान तुम्हारी लाज बचाएगे। और जब भरी सभा मे चीरहरण के समय द्रोपदी की करुण पुकार नारद ने भगवान तक पहुचायी तो भगवान ने कहा-कर्मो के बदले मेरी कृपा बरसती है क्या कोई पुण्य है द्रोपदी के खाते मे।

🔵  जाँचा परखा गया तो उस दिन साधु को दिया वस्त्र दान हिसाब मे मिला जिसका ब्याज भी कई गुणा बढ गया था।

🔴  जिसको चुकता करने भगवान पहुच गये द्रोपदी की मदद करने, दुस्सासन चीर खीचता गया और हजारो गज कपडा बढता गया।

🔵  इंसान यदि सुकर्म करे तो उसका फल सूद सहित मिलता है और दुस्कर्म करे तो सूद सहित भोगना पडता है।

25 टिप्‍पणियां:

kuldeep sharma ने कहा…

acche karm hi insan ki pahchan h

Sanjay Yadav ने कहा…

EK COMMNET TO BANTA HAI BOSS

VIMAL KHANDURI ने कहा…

mera manna h ki karam acche karo.., kabhi dar nhi rehta h or dil ko sahnt milti h.., iske alwa oar kuch nhi milta.., ye kalyug h.., bhagwan ek darshak ki tarh h jo hamara abhinay dekh raha h or kuch nhi..,

ashish mishra ने कहा…

insaan ke acche karm hi use insaan banate hai

Unknown ने कहा…

To good get better

angesh ray ने कहा…

To good get better

Harish Singh ने कहा…

Kya mai jaan sakta hu ki kabhi kabhi un logo ke saath bura ho jata hai jinhe pata hi nahi hota ki sukarm aur duskarm kya hote hai like 3to 4 yr beby to uske baare me aaplog kya kehna chahenge agar aapka kehna hai ki ye sub agle junm ka fal hota hai to m sorry mai ni jaanta ki agle janam ki ke Hui galtiya hame yaad hoti hai ya uska fal hame milna chahiye agar aaplogo ka manna kuch aur hai to plzzz cumnt m waiting

Harish Singh ने कहा…

Kya mai jaan sakta hu ki kabhi kabhi un logo ke saath bura ho jata hai jinhe pata hi nahi hota ki sukarm aur duskarm kya hote hai like 3to 4 yr beby to uske baare me aaplog kya kehna chahenge agar aapka kehna hai ki ye sub agle junm ka fal hota hai to m sorry mai ni jaanta ki agle janam ki ke Hui galtiya hame yaad hoti hai ya uska fal hame milna chahiye agar aaplogo ka manna kuch aur hai to plzzz cumnt m waiting

Prateek shukla ने कहा…

hamesha aache karam kerna chaiye

Jagdamba Prasad Verma ने कहा…

जीवन को सत्कर्मों की ओर प्रेरित करने के लिए अति प्रेरणादायक

Sujit Kumar ने कहा…

Nice line

Creative Ideas ने कहा…

Yehe GITA KA GYAN.

Creative Ideas ने कहा…

Yehe GITA KA GYAN.

Rupesh Patanker ने कहा…

kabhi kabhi apno ya dusro ki vajha se bhi dukh bhogna pad jata he. jis prakar gehu ke sath ghun pis jata he

priyanka panwar ने कहा…

Nice

Anurag ने कहा…

Good one

kashi ने कहा…

सुन्दर

vinod kumar meena ने कहा…

Exactly

BALDANIYA SUNIL ने कहा…

सुन्दर

Vishal Jaiswal ने कहा…

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Unknown ने कहा…

Apne jeevan me sada sukarm kare

Pawan Agarwal ने कहा…

Apne jeevan me sada sukarm kare

बेनामी ने कहा…

kahani sahi nahi h

एक साधक ने कहा…

प्रेरणा तो सही है , इतना काफी है . कहानी न तो किसो ने भी नहीं देखि.है. प्रेरणा सही मिल जाये और जीवन की दिशा सुधर जाये , यह काम नहीं है.

एक साधक ने कहा…

गेहूं बोने से गेहूं मिलता है। आम बोने से आम खाने को मिलते हैं। कांटे बोने से कांटे ही मिलते हैं , किसी को भी गाली देने से गाली ही खाने को मिलती है । ये तो प्रकृति के सामान्य नियम हैं। इसकी और गहराई में उतर कर कर्म फल के सिद्धान्त को समझना हो तो वह बड़ा ही बिलक्षण और जटिल तथा गहन है। गहना कर्मणो गतिः , नामक एक पुस्तक है उसे पढ़ने की कृपा करें। शांतिकुंज का प्रकाशन है। से awgpstore.com से on line मंगा सकते हैं।

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