शुक्रवार, 7 जून 2019
👉 आध्यात्मिक चिकित्सा एक समग्र उपचार पद्धति (भाग 9)
👉 मानवी जीवन आध्यात्मिक रहस्यों से भरा
मानव जीवन के आध्यात्मिक रहस्य अद्भुत हैं। अनुभव कहता है कि ये इतने आश्चर्यों से भरे हैं कि सामान्य बुद्धि इन पर भरोसा करने में स्वयं को असहाय पाती है। जिस देह से हमें जीवन का परिचय मिलता है, उसके बारे में हमारी जानकारी बड़ी आधी- अधूरी है। ऊपर से देखने पर भले ही यह मांस और चमड़े से मढ़ा हुआ हड्डियों का ऐसा ढाँचा नजर आता हो, जिसके भीतर रक्त और प्राण चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि कहती है कि इसके भीतर अनेकों ऐसी सूक्ष्मताएँ हैं, जिसके बारे में आधुनिकतम शोध भी कुछ कह पाने में असमर्थ है। अंतःस्रावी ग्रन्थियों की संरचनाएँ, मांस पेशियों में लिपटे तन्त्रिकाओं के गुच्छक, मस्तिष्क की आधे से अधिक कोशिकाओं की निष्क्रिय स्थिति ने तीसरी सहस्राब्दी के महावैज्ञानिकों को हैरान कर रखा है।
इनमें से कइयों का तो यह मानना है कि विज्ञान और वैज्ञानिकता देह की जिस सूक्ष्म संरचनाओं को भेद पाने में अक्षम है, सम्भव है वही आध्यात्मिक रहस्यों के प्रवेश द्वार हो। अभी कुछ सालों पहले तीसरी सहस्राब्दी के प्रवेश की शुभ घड़ी में एक ग्रन्थ प्रकाशित हुआ है ‘प्रेडिक्शन फॉर द नेक्स्ट मिलेनियम’। इस ग्रन्थ का सम्पादन डेविड क्रिस्टॉफ एवं टॉड डब्ल्यू निकरसन नाम के विशेषज्ञ वैज्ञानिकों ने किया है। इस ग्रन्थ में दो सौ सत्तर विशिष्ट वैज्ञानिकों के विचार प्रकाशित किए गए हैं। जिनके माध्यम से भविष्य के मानव विकास पर दृष्टि डाली गयी है। संक्षेप में इस पुस्तक का सार कहें तो इसमें यह उम्मीद जतायी गयी है कि भविष्य का मानव अपने जीवन के आध्यात्मिक रहस्यों को वैज्ञानिक रीति से जानने योग्य बन सकेगा।
जहाँ तक अभी वर्तमान की बात है तो न केवल देह के रहस्य अनजाने, बल्कि प्राण के प्रवाह भी अबूझ हैं। नाड़ी संस्थान में बहने वाला प्राण विश्व प्राण से कैसे सम्बन्धित है? इस प्रश्र का कोई सटीक वैज्ञानिक उत्तर नहीं है। जबकि आध्यात्मिकता के भव्य भवन की समूची नींव प्राण विद्या पर ही टिकी हुई है। प्राण के भेद, उपभेद, इसके भावनाओं एवं विचारों पर प्रभाव इतने अनोखे हैं, जिसकी अनुभूति पर कोई भी जीवन की डेार अपने हाथें में ले सकता है।
.... क्रमशः जारी
✍🏻 डॉ. प्रणव पण्ड्या
📖 आध्यात्मिक चिकित्सा एक समग्र उपचार पद्धति पृष्ठ 14
मानव जीवन के आध्यात्मिक रहस्य अद्भुत हैं। अनुभव कहता है कि ये इतने आश्चर्यों से भरे हैं कि सामान्य बुद्धि इन पर भरोसा करने में स्वयं को असहाय पाती है। जिस देह से हमें जीवन का परिचय मिलता है, उसके बारे में हमारी जानकारी बड़ी आधी- अधूरी है। ऊपर से देखने पर भले ही यह मांस और चमड़े से मढ़ा हुआ हड्डियों का ऐसा ढाँचा नजर आता हो, जिसके भीतर रक्त और प्राण चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि कहती है कि इसके भीतर अनेकों ऐसी सूक्ष्मताएँ हैं, जिसके बारे में आधुनिकतम शोध भी कुछ कह पाने में असमर्थ है। अंतःस्रावी ग्रन्थियों की संरचनाएँ, मांस पेशियों में लिपटे तन्त्रिकाओं के गुच्छक, मस्तिष्क की आधे से अधिक कोशिकाओं की निष्क्रिय स्थिति ने तीसरी सहस्राब्दी के महावैज्ञानिकों को हैरान कर रखा है।
इनमें से कइयों का तो यह मानना है कि विज्ञान और वैज्ञानिकता देह की जिस सूक्ष्म संरचनाओं को भेद पाने में अक्षम है, सम्भव है वही आध्यात्मिक रहस्यों के प्रवेश द्वार हो। अभी कुछ सालों पहले तीसरी सहस्राब्दी के प्रवेश की शुभ घड़ी में एक ग्रन्थ प्रकाशित हुआ है ‘प्रेडिक्शन फॉर द नेक्स्ट मिलेनियम’। इस ग्रन्थ का सम्पादन डेविड क्रिस्टॉफ एवं टॉड डब्ल्यू निकरसन नाम के विशेषज्ञ वैज्ञानिकों ने किया है। इस ग्रन्थ में दो सौ सत्तर विशिष्ट वैज्ञानिकों के विचार प्रकाशित किए गए हैं। जिनके माध्यम से भविष्य के मानव विकास पर दृष्टि डाली गयी है। संक्षेप में इस पुस्तक का सार कहें तो इसमें यह उम्मीद जतायी गयी है कि भविष्य का मानव अपने जीवन के आध्यात्मिक रहस्यों को वैज्ञानिक रीति से जानने योग्य बन सकेगा।
जहाँ तक अभी वर्तमान की बात है तो न केवल देह के रहस्य अनजाने, बल्कि प्राण के प्रवाह भी अबूझ हैं। नाड़ी संस्थान में बहने वाला प्राण विश्व प्राण से कैसे सम्बन्धित है? इस प्रश्र का कोई सटीक वैज्ञानिक उत्तर नहीं है। जबकि आध्यात्मिकता के भव्य भवन की समूची नींव प्राण विद्या पर ही टिकी हुई है। प्राण के भेद, उपभेद, इसके भावनाओं एवं विचारों पर प्रभाव इतने अनोखे हैं, जिसकी अनुभूति पर कोई भी जीवन की डेार अपने हाथें में ले सकता है।
.... क्रमशः जारी
✍🏻 डॉ. प्रणव पण्ड्या
📖 आध्यात्मिक चिकित्सा एक समग्र उपचार पद्धति पृष्ठ 14
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