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मंगलवार, 22 मार्च 2022

👉 हारिय न हिम्मत दिनांक :: २२

चिंतन और चरित्र का समन्वय  

अपने दोष दूसरों पर थोपने से कुछ काम न चलेगा। हमारी शारीरिक एवं मानसिक दुर्बलताओं के लिए दूसरे उत्तरदायी नहीं वरन् हम स्वयं ही हैं। दूसरे व्यक्तियों,, परिस्थितियों एवं प्रारब्ध भोगों का भी प्रभाव होता है। पर तीन चौथाई जीवन तो हमारे आज के दृष्टिकोण एवं कर्तव्य का ही प्रतिफल होता है। अपने को सुधारने का काम हाथ में लेकर हम अपनी शारीरिक और मानसिक परेशानियों को आसानी से हल कर सकते हैं।

प्रभाव उनका नहीं पड़ता जो बकवास तो बहुत करते हैं पर स्वयं उस ढाँचे में ढलते नहीं। जिन्होंने चिंतन और चरित्र का समन्वय अपने जीवन क्रम में किया है, उनकी सेवा साधना सदा फलती- फूलती रहती है।

✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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👉 हारिय न हिम्मत दिनांक: २१

लगन और श्रम का महत्व   

लगन आदमी के अंदर हो तो सौ गुना काम करा लेती है। इतना काम करा लेती है कि हमारे काम को देखकर आपको आश्चर्य होगा। इतना साहित्य लिखने से लेकर इतना बड़ा संगठन खड़ा करने तक और इतनी बड़ी क्रान्ति करने से लेकर इतने आश्रम बनाने तक जो काम शुरू किये हैं वे कैसे हो गए? यह लगन और श्रम है।

यदि हमने श्रम से जी चुराया होता तो उसी तरीके से घटिया आदमी होकर के रह जाते जैसे कि अपना पेट पालना ही जिनके लिए मुश्किल हो जाता है। चोरी से ,, ठगी से ,, चालाकी से जहॉं कहीं भी मिलता पेट भरने के लिए ,, कपड़े पहनने के लिए और अपना मौज- शौक पूरा करने के लिए पैसा इकट्ठा करते रहते पर हमारा यह बड़ा काम संभव न हो पाता।

✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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👉 हारिय न हिम्मत दिनांक :: २०

भटकना मत   

लोभों के झोंके, मोहों के झोंके, नामवरी के झोंके, यश के झोंके, दबाव के झोंके ऐसे हैं कि आदमी को लंबी राह पर चलने के लिए मजबूर कर देते हैं और कहॉं से कहॉं घसीट कर ले जाते हैं। हमको भी घसीट ले गये होते। ये सामान्य आदमियों को घसीट ले जाते हैं। बहुत से व्यक्तियों में जो सिद्धान्तवाद की राह पर चले इन्हीं के कारण भटक कर कहॉं से कहॉं जा पहुँचे।

आप भटकना मत। आपको जब कभी भटकन आये तो आप अपने उस दिन की उस समय कीमन:स्थिति को याद कर लेना, जब कि आपके भीतर से श्रद्धा का एक अंकुर उगा था। उसी बात को याद रखना कि परिश्रम करने के प्रति जो हमारी उमंग और तरंग होनी चाहिए उसमें कमी तो नहीं आ रही।

✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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शुक्रवार, 11 मार्च 2022

👉 हारिय न हिम्मत दिनांक :: ११

अकेला चलो

महान व्यक्ति सदैव अकेले चले हैं और इस अकेलेपन के कारण ही दूर तक चले हैं। अकेले व्यक्तियों ने अपने सहारे ही संसार के महानतम कार्य संपन्न किए हैं। उन्हें एकमात्र अपनी ही प्रेरणा प्राप्त हुई है। वे अपने ही आंतरिक सुख से सदैव प्रफुल्लित रहे हैं। दूसरे से दु:ख मिटाने की उन्होंने कभी आशा नहीं रखी। निज वृतियों में ही उन्होंने सहारा नहीं देखा।

अकेलापन जीवन का परम सत्य है। किंतु अकेलेपन से घबराना, जी तोडऩा, कर्तव्यपथ से हतोत्साहित या निराश होना सबसे बड़ा पाप है। अकेलापन आपके निजी आंतरिक प्रदेश में छिपी हुई महान शक्तियों को विकसित करने का साधन है। अपने ऊपर आश्रित रहने से आप अपनी उच्चतम शक्तियों को खोज निकालते हैं।

~ पं श्रीराम शर्मा आचार्य


👉 Lose Not Your Heart Day 11
Walk Alone

Great men go far on their paths because they walk alone. Their inspiration comes from within. They alone spur their happiness and remove their sadness and they are helped along only by their own ideas.

Loneliness is an undeniable truth. To be afraid of it, feel inferior because of it, or lose sight of your duties because of it is the greatest sin. What you believe to be loneliness is actually a kind of solitude, given to you to develop your own inner strength. When you depend on yourself, you are better able to realize your full potential.

 ~ Pt. Shriram Sharma Acharya

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गुरुवार, 10 मार्च 2022

👉 हारिय न हिम्मत दिनांक :: १०

अंतःकरण के धन को ढ़ूंढो

तुम्हें अपने मन को सदा कार्य में लगाए रखना होगा। इसे बेकार न रहने दो। जीवन को गंभीरता के साथ बिताओ। तुम्हारे सामने आत्मोन्नति का महान कार्य है और पास में समय थोड़ा है। यदि अपने को असावधानी के साथ भटकने दोगे तो तुम्हें शोक करना होगा और इससे भी बुरी स्थिति को प्राप्त होगे।

धैर्य और आशा रखो तो शीघ्र ही जीवन की समस्त स्थिति का सामना करने की योग्यता तुम में आ जाएगी। अपने बल पर खड़े हेाओ। यदि आवश्यक हो तो समस्त संसार को चुनौती दे दो। परिणाम में तुम्हारी हानि नहीं हो सकती। तुम केवल सबसे महान से संतुष्ट रहो। दूसरे भौतिक धन की खोज करते हैं और तुम अंत:करण के धन केा ढूंढो।

 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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👉 Lose Not Your Heart Day 10
Look for the Treasure Within Yourself


Keep your mind engaged in useful tasks; do not let it go idle. Take life seriously. The task of spiritual growth is before you, and time is very short. If you are led astray by your own negligence, you alone will have to pay the price.

Patience and hope will enable you to face any situation. Stand on your own feet and challenge the entire world if you need to, but you should only be satisfied after attaining your highest goals. When others look outside for worldly treasure, look inside for the treasure within yourself.

~Pt. Shriram Sharma Acharya
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👉 हारिय न हिम्मत दिनांक: ९

नम्रता, सरलता, साधुता, सहिष्णुता

सहिष्णुता का अभ्यास करो। अपने उत्तरदायित्व को समझो। किसी के दोषों को देखने और उन पर टीका- टिप्पणी करने के पहले अपने बड़े- बड़े दोषों का अन्वेषण करो। यदि अपनी वाणी कानियत्रंण नहीं कर सकते तो उसे दूसरों के प्रतिकूल नहीं बल्कि अपने प्रतिकूल उपदेश करने दो।

सबसे पहले अपने घर को नियमित बनाओ क्योंकि बिना आचरण के आत्मानुभव नहीं हो सकता।नम्रता, सरलता,, साधुता,, सहिष्णुता ये सब आत्मानुभव के प्रधान अंग हैं।
दूसरे तुम्हारे साथ क्या करते हैं इसकी चिंता न करो। आत्मोन्नति में तत्पर रहो। यदि यह तथ्य समझ लिया तो एक बड़े रहस्य को पा लिया।

~पं श्रीराम शर्मा आचार्य
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👉 Lose Not Your Heart Day 9
Courtesy, Simplicity, Empathy, Compassion


It is your responsibility to cultivate courtesy, simplicity, empathy, and compassion. Before looking for and criticizing faults in others, address the glaring flaws in yourself. If you are unable to control your speech, use it against yourself instead of others.

First, discipline yourself. Without discipline, you cannot experience your true nature. Courtesy, simplicity, empathy, and compassion are all manifestations of this true nature.

Disregard how others treat you and stay focused on your own growth. If you can grasp this, you have understood a great secret.

~Pt. Shriram Sharma Acharya

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मंगलवार, 8 मार्च 2022

👉 हारिय न हिम्मत दिनांक :: ८

अपने आपकी समालोचना करो

जो कुछ हो, होने दो। तुम्हारे बारे में जो कहा जाए उसे कहने दो। तुम्हें ये सब बातें मृगतृष्णा के जल के समान असार लगनी चाहिए। यदि तुमने संसार का सच्चा त्याग किया है तो इन बातों से तुम्हें कैसे कष्ट पहुँच सकता है। अपने आपकी समालोचना में कुछ भी कसर मत रखना तभी वास्तविक उन्नति होगी।

प्रत्येक क्षण और अवसर का लाभ उठाओ। मार्ग लंबा है। समय वेग से निकला जा रहा है। अपने संपूर्ण आत्मबल के साथ कार्य में लग जाओ, लक्ष्य तक पहुँचोगे।

किसी बात के लिए भी अपने को क्षुब्ध न करो। मनुष्य में नहीं, ईश्वर में विश्वास करो। वह तुम्हें रास्ता दिखाएगा और सन्मार्ग सुझाएगा।

~ पं श्रीराम शर्मा आचार्य


👉 Lose Not Your Heart Day 8
Introspect


Whatever happens, let it happen. Whatever is said about you, let it be said. You should consider these things as illusory as a mirage. If you have really detached yourself from the world, then why should such things affect you? Focus on inspecting yourself thoroughly for weaknesses. Only then can you begin the process of growth.

Take advantage of every moment and every opportunity. Your path is very long, and time is very short. Concentrate your inner strength on reaching your goal.

Do not despair in any situation. Have faith not in the capacity of man, but in the capacity of God. God will show you the right path.

~ Pt. Shriram Sharma Acharya

सोमवार, 7 मार्च 2022

👉 हारिय न हिम्मत दिनांक :: ७

मार्गदर्शन के लिए अपनी ही ओर देखो

साक्षात्कार संपन्न पुरूष न तो दूसरों को दोष लगाता है और न अपने को अधिक शक्तिमान वस्तुओं से आच्छादित होने के कारण वह स्थितियों की अवहेलना करता है।

अहंकार से उतना ही सावधान रहो जितना एक पागल कुत्ते से। जैसे तुम विष या विषधर सर्प को नहीं छूते ,, उसी प्रकार सिद्धियों से अलग रहो और उन लोगों से भी जो इनका प्रतिवाद करते हैं। अपने मन और हृदय की संपूर्ण क्रियाओं को ईश्वर की ओर संचारित करो।

दूसरों का विश्वास तुम्हें अधिकाधिक असहाय और दु:खी बनाएगा। मार्गदर्शन के लिए अपनी ही ओर देखो, दूसरों की ओर नहीं ।। तुम्हारी सत्यता तुम्हें दृढ़ बनाएगी। तुम्हारी दृढ़ता तुम्हें लक्ष्य तक ले जाएगी।

~ पं श्रीराम शर्मा आचार्य


👉 Lose Not Your Heart Day 7
Look to Yourself for Guidance

One who knows himself to be part of God neither blames failure on others nor attributes success to himself. He does not become blinded by his own power and fail to see the real situation. Be as cautious of your own ego as you would of a rabid dog. Avoid attachment to your achievements as you would avoid a poisonous snake, and avoid people who will mock you for this. Direct every effort of your mind and heart towards God.

Depending on others for your happiness ultimately leads to helplessness and misery. Look within yourself for direction and not to others. Your true nature will help you become determined, and this determination will help you each your goal.

~ Pt. Shriram Sharma Acharya

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👉 हारिय न हिम्मत दिनांक :: ६

आत्म समर्पण करो

तुम्हें यह सीखना होगा कि इस संसार में कुछ कठिनाइयाँ हैं जो तुम्हें सहन करनी हैं। वे पूर्व कर्मों के फलस्वरूप तुम्हें अजेय प्रतीत होती हैं। जहाँ कहीं भी कार्य में घबराहट, थकावट और निराशाऐं हैं, वहाँ अत्यंत प्रबल शक्ति भी है। अपना कार्य कर चुकने पर एक ओर खड़े होओ। कर्म के फल को समय की धारा में प्रवाहित हो जाने दो।

अपनी शक्ति भर कार्य करो और तब अपना आत्मसमर्पण करो। किन्हीं भी घटनाओं में हतोत्साहित न हेाओ। तुम्हारा अपने ही कर्मों पर अधिकार हो सकता है। दूसरों के कर्मों पर नहीं। आलोचना न करो, आशा न करो, भय न करो, सब अच्छा ही होगा ।। अनुभव आता है और जाता है। खिन्न न होओ। तुम दृढ़ भित्ति पर खड़े हुए हो।

 ~ पं श्रीराम शर्मा आचार्य


👉 Lose Not Your Heart Day 6
Surrender Yourself

You must be prepared to face hardships in your life. You may be predisposed to feel that you cannot face them, but where you find doubt, tiredness, and despair in yourself, you will also find immense strength. Finish your work wholeheartedly and step aside. Let the results come to you in due course of time.

Work to your full potential. Do not get discouraged by any situation. The only actions you can control are your own, not those of others. Do not criticize others, and do not hold any expectations of them. There is no need to be afraid; everything will turn out for the best. Do & note despair. You are standing on firm ground.

 ~ Pt. Shriram Sharma Acharya

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शनिवार, 5 मार्च 2022

👉 हारिय न हिम्मत दिनांक :: ५

हँसते रहो, मुस्कराते रहो

उठो! जागो! रूको मत!!! जब तक की लक्ष्य न प्राप्त हो जाए। कोई दूसरा हमारे प्रति बुराई करे या निंदा करे, उद्वेगजनक बात कहे तो उसको सहन करने और उसे उत्तर न देने से बैर आगे नहीं बढ़ता। अपने ही मन में कह लेना चाहिए कि इसका सबसे अच्छा उत्तर है मौन। जो अपने कर्तव्य कार्य में जुटा रहता है और दूसरों के अवगुणों की खोज में नहीं रहता है उसे आंतरिक प्रसन्नता रहती है।

जीवन में उतार- चढ़ाव आते ही रहते हैं।

हँसते रहो, मुस्कुराते रहो।

ऐसा मुख किस काम का जो हँसे नहीं ,, मुस्कराए नहीं।

जो व्यक्ति अपनी मानसिक शक्ति स्थिर रखना चाहते हैं उनको दूसरों की आलोचनाओं से चिढऩानहीं चाहिए।

~ पं श्रीराम शर्मा आचार्य


👉 Lose Not Your Heart Day 5
Keep Smiling, Keep Laughing

Wake up! Do not rest until you have achieved your goal. If you regard gossip and ill-will as trivial and refuse to acknowledge them, hostility will not increase. For such things, silence is the best response. True happiness comes from focusing on one's duty rather than on shortcomings in others.

Life is full of ups and downs, but we must always remain cheerful. What good is a face that cannot smile or laugh? Do not be irritated by, criticism from others, and you will retain your mental equilibrium.

~ Pt. Shriram Sharma Acharya


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शुक्रवार, 4 मार्च 2022

👉 हारिय न हिम्मत दिनांक :: ४

जीवन को यज्ञमय बनाओ

मन में सबके लिए सद्भावनाएँ रखना, संयमपूर्ण सच्चरित्रता के साथ समय व्यतीत करना, दूसरों की भलाई बन सके उसके लिए प्रयत्नशील रहना, वाणी को केवल सत्प्रयोजनों के लिए ही बोलना, न्यायपूर्ण कमाई पर ही गुजारा करना, भगवान का स्मरण करते रहना, अपने कर्तव्य पथ पर आरूढ़ रहना, अनुकूल- प्रतिकूल परिस्थितियों में विचलित न होना- यही नियम हैं जिनका पालन करने से जीवन यज्ञमय बन जाता है। मनुष्य जीवन को सफल बना लेना ही सच्ची दूरदर्शिता औरबुद्धिमता है।

जब तक हम में अहंकार की भावना रहेगी तब तक त्याग की भावना का उदय होना कठिन है।

✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य


👉 Lose Not Your Heart Day 4
Make Your Life an Offering

To make your life an offering, make sure that you comply with the following:

•    See every person as worthy of kindness.
•    Utilize your time with honesty and discipline.
•    Work for the welfare of others.
•    Limit your speech to worthy causes.
•    Accept only that which you have honestly earned.
•    Constantly keep God in your thoughts.
•    Stay focused on your duties.
•    Maintain your mental equilibrium.

Making your life an offering is the sign of true intelligence and farsight. Your life cannot truly be considered an offering until you give up your ego.

~ Pt. Shriram Sharma Acharya

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👉 हारिय न हिम्मत दिनांक :: ३

अंतरात्मा का सहारा पकड़ो

यदि तुम शांति, सामर्थ्य और शक्ति चाहते हो तो अपनी अंतरात्मा का सहारा पकड़ो। तुम सारे संसार को धोखा दे सकते हो किंतु अपनी आत्मा को कौन धेाखा दे सका है। यदि प्रत्येक कार्य में आप अंतरात्मा की सम्मति प्राप्त कर लिया करेंगे तो विवेक पथ नष्ट न होगा ।। दुनियाँ भर का विरोध करने पर भी यदि आप अपनी अंतरात्मा का पालन कर सकें तो कोई आपको सफलता प्राप्त करने से नहीं रोक सकता।

जब कोई मनुष्य अपने आपकेा अद्वितीय व्यक्ति समझने लगता है और अपने आपको चरित्र में सबसे श्रेष्ठ मानने लगता है, तब उसका आध्यात्मिक पतन होता है।

✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य


👉 Lose Not Your Heart Day 3
Take Refuge in Your Conscience

If you desire peace, capabilities, and energy, then take refuge in your conscience. Even if you deceive the entire world, you will never be able to deceive your conscience. If you consult it on every occasion, you will never lose your ability for moral discretion, and no matter the opposition, you will be able to succeed.

When you begin to think of yourself as the most virtuous and exemplary individual, your spiritual decay begins and you lose contact with your conscience.

~Pt. Shriram Sharma Acharya

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👉 हारिय न हिम्मत दिनांक :: २

मानवमात्र को प्रेम करो

हम जिस भारतीय संस्कृति, भारतीय विचारधारा का प्रचार करना चाहते हैं, उससे आपके समस्त कष्टों का निवारण हो सकता है। राजनीतिक शक्ति द्वारा आपके अधिकारों की रक्षा हो सकती है। पर जिस स्थान से हमारे सुख- दु:ख की उत्पत्ति होती है उसका नियंत्रण राजनीतिक शक्ति नहीं कर सकती। यह कार्य आध्यात्मिक उन्नति से ही संपन्न हो सकता है।

मनुष्य को मनुष्य बनाने की वास्तविक शक्ति भारतीय संस्कृति में ही है। यह संस्कृति हमें सिखाती है कि मनुष्य- मनुष्य से प्रेम करने को पैदा हुआ है, लडऩे- मरने को नहीं। अगर हमारे सभी कार्यक्रम ठीक ढंग से चलते रहें तो भारतीय संस्कृति का सूर्योदय अवश्य होगा।

✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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👉 हारिय न हिम्मत दिनांक :: १

आध्यात्मिक चिंतन अनिवार्य

जो लोग आध्यात्मिक चिंतन से विमुख होकर केवल लोकोपकारी कार्य में लगे रहते हैं, वे अपनी ही सफलता पर अथवा सद्गुणों पर मोहित हो जाते हैं। वे अपने आपको लोक सेवक के रूप में देखने लगते हैं। ऐसी अवस्था में वे आशा करते हैं कि सब लोग उनके कार्यों की प्रशंसा करें, उनका कहा मानें। उनका बढ़ा हुआ अभिमान उन्हें अनेक लेागों का शत्रु बना देता है। इससे उनकी लोक सेवा उन्हें वास्तविक लोक सेवक न बनाकर लोक विनाश का रूप धारण कर लेती है।

आध्यात्मिक चिंतन के बिना मनुष्य में विनीत भाव नहीं आता और न उसमें अपने आपको सुधारने की क्षमता रह जाती है। वह भूलों पर भूल करता चला जाता है और इस प्रकार अपने जीवन को विफल बना देता है।

✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

👉 Lose Not Your Heart Day 1


Recognize the Need for Spiritual Contemplation

Performing social service without a spiritual outlook makes people obsessed with own virtue. They consider themselves great They expect obedience and praise. Because of this, their increased arrogance makes them enemies of many. They become not philanthropists, but destroyers. Without a spiritual outlook, they can never develop humility, nor do they have the ability to change themselves. Such people go on committing endless mistakes and make their own lives unbearable.

~Pt. Shriram Sharma Acharya

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👉 हारिय न हिम्मत ( Lose Not Your Heart)

दूसरे के छिद्र देखने से पहले अपने छिद्रों को टटोलो। किसी और की बुराई करने से पहले यह देख लो कि हम में तो कोई बुराई नहीं है। यदि हो तो पहले उसे दूर क रो। दूसरों की निन्दा करने में जितना समय देते हो उतना समय अपने आत्मोत्कर्ष में लगाओ। तब स्वयं इससे सहमत होंगे कि परनिंदा से बढऩेवाले द्वेष को त्याग कर परमानंद प्राप्ति की ओर बढ़ रहे हो।

संसार को जीतने की इच्छा करने वाले मनुष्यों! पहले अपनेकेा जीतने की चेष्टा करो। यदि तुम ऐसा कर सके तो एक दिन तुम्हारा विश्व विजेता बनने का स्वप्न पूरा होकर रहेगा। तुम अपने जितेंद्रिय रूप से संसार के सब प्राणियों को अपने संकेत पर चला सकोगे। संसार का कोई भी जीव तुम्हारा विरोधी नहीं रहेगा।


👉 Lose Not Your Heart

Before pointing out the faults of others, search for faults in yourself and do your best to fix them first. Spend as much time doing this as you do criticizing others. Then you will realize that the harm caused by criticizing others can replace your happiness. Therefore happiness only comes from removing this harm.

People who wish to conquer the world should conquer themselves first. If you can do this, then you can conquer anything. People
will not stand against you, but will be influenced by you.

✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य


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शुक्रवार, 28 जुलाई 2017

👉 हारिय न हिम्मत दिनांक :: २८

🌹  विचार और कार्य संतुलित करो
🔵 एक साथ बहुत सारे काम निबटाने के चक्कर में मनोयोग से कोई कार्य पूरा नहीं हो पाता। आधा- अधूरा कार्य छोडक़र मन दूसरे कार्यों की ओर दौडऩे लगता है। यहीं से श्रम, समय की बर्बादी प्रारंभ होती है तथा मन में खीझ उत्पन्न होती है। विचार और कार्य सीमित एवं संतुलित कर लेने से श्रम और शक्ति का अपव्यय रूक जाता है और व्यक्ति सफलता के सोपानों पर चढ़ता चला जाता है।  

🔴 कोई भी काम करते समय अपने मन को उच्च भावों से और संस्कारों से ओत- प्रोत रखना हीसाँसारिक जीवन में सफलता का मूल मंत्र है। हम जहाँ रह रहे हैं उसे नहीं बदल सकते पर अपने आपको बदल कर हर स्थिति में आनंद ले सकते हैं।

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य

गुरुवार, 27 जुलाई 2017

👉 हारिय न हिम्मत दिनांक :: २७

🌹  संतोष भरा जीवन जीयेंगे  

🔵 समझदारी और विचारशीलता का तकाजा है कि संसार चक्र के बदलते क्रम के अनुरूप अपनीमन:स्थिति को तैयार रखा जाए। लाभ, सुख, सफलता, प्रगति, वैभव आदि मिलने पर अहंकार से ऐंठने की जरूरत नहीं है। कहा नहीं जा सकता कि वह स्थिति कब तक रहेगी। ऐसी दशा में रोने-झींकने ,खीजने, निराश होने में शक्ति नष्ट करना व्यर्थ है। परिवर्तन के अनुरूप अपने को ढालने में,, विपन्नता को सुधारने में सोचने, हल निकालने और तालमेल बिठाने में मस्तिष्क को लगाया जाए तो यह प्रयत्न रोने और सिर धुनने की अपेक्षा अधिक श्रेयस्कर होगा। 

🔴 बुद्धिमानी इसी में है कि जो उपलब्ध है उसका आनंद लिया जाय और संतोष भरा संतुलन बनाए रखा जाए।

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य

बुधवार, 26 जुलाई 2017

👉 हारिय न हिम्मत दिनांक :: २६

🌹  खिलाड़ी भावना अपनाओ
🔵 आपके विषय में, आपकी योजनाओं के विषय में,, आपके उद्देश्यों के विषय में अन्य लोग जो कुछ विचार करते हैं, उस पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है। अगर वे आपको कल्पनाओं के पीछे दौडऩे वाला उन्मुक्त अथवा स्वप्न देखने वाला कहें तो उसकी परवाह मत करो। तुम अपने व्यक्तित्व पर श्रद्धा को बनाए रहेा। किसी मनुष्य के कहने से,, किसी आपत्ति के आने से अपने आत्मविश्वास को डगमगाने मत दो। आत्मश्रद्धा को कायम रखोगे और आगे बढ़ते रहोगे तो जल्दी या देर में संसार आपको रास्ता देगा ही। 

🔴 आगे भी प्रगति के प्रयास तो जारी रखें ही जाएँ पर वह सब खिलाड़ी भावना से ही किया जाए।

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य

मंगलवार, 25 जुलाई 2017

👉 हारिय न हिम्मत दिनांक :: २५

🌹  आप अपने मित्र भी हो और शत्रु भी

🔵 इस बात का शोक मत करो कि मुझे बार- बार असफल होना पड़ता है। परवाह मत करो क्योंकि समय अनन्त है। बार- बार प्रयत्न करो और आगे की ओर कदम बढ़ाओ। निरन्तर कर्तव्य करते रहो, आज नहीं तो कल तुम सफल होकर रहोगे।

🔴 सहायता के लिए दूसरों के सामने मत गिड़गिड़ाओ क्योंकि यथार्थ में भी इतनी शक्ति नहीं है जो तुम्हारी सहायता कर सके। किसी कष्ट के लिए दूसरों पर दोषरोपण मत करो, क्योंकि यथार्थ में कोई भी तुम्हें द़:ख नहीं पहुँचा सकता। तुम स्वयं ही अपने मित्र हो और स्वयं ही अपने शत्रु हो। जो कुछ भली बुरी स्थितियाँ सामने हैं वह तुम्हारी ही पैदा की हुई हैं। अपना दृष्टिकोण बदल दोगे तो दूसरे ही क्षण यह भय के भूत अंतरिक्ष में तिरोहित हो जावेंगे।

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य

सोमवार, 24 जुलाई 2017

👉 हारिय न हिम्मत दिनांक :: २४

🌹  आत्मविश्वास जागृत करो

🔵 जब निराशा और असफलता को अपने चारों ओर मंडराते देखो तो समझो कि तुम्हारा चित्त स्थिर नहीं, तुम अपने ऊपर विश्वास नहीं करते।

🔴 वर्तमान दशा से छुटकारा नहीं हो सकता जब तक कि अपने पुराने सड़े गले विचारों को बदल नडालेा। जब तक यह विश्वास न हो जाए कि तुम अपने अनुकूल चाहे जैसी अवस्था निर्माण कर सकते हो तब तक तुम्हारे पैर उन्नति की ओर बढ़ नहीं सकते। अगर आगे भी न संभलोगे तो हो सकता है कि दिव्य तेज किसी दिन बिलकुल ही क्षीण हो जाए। यदि तुम अपनी वर्तमान अप्रिय अवस्था से छुटकारा पाना चाहते हो तो अपनी मानसिक निर्बलता को दूर भगाओ। अपने अंदर आत्मविश्वास जागृत करो।

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य

👉 परमार्थ की उपेक्षा न करें ( भाग 2)

पुण्य परमार्थ की इस आवश्यकता को प्रायः सज्जन व्यक्ति अनुभव करते हैं। किन्तु उसको कार्यान्वित करने में प्रमाद बरतते हैं। इस प्रमाद का व्यवहार...