सोमवार, 23 जनवरी 2017

👉 प्रेरणादायक प्रसंग 24 Jan 2017


👉 आज का सद्चिंतन 24 Jan 2017


👉 सोशल मीडिया पर उल्लू बनने से ऐसे बचें (भाग 2)


🔴 मनी ट्रैप

आपको वक्त-बेवक्त मेसेज आता है 'सस्ती दर पर लोन चाहिए'... 'क्या आप घर खरीदना चाहते हैं?'... 'क्या आपको इन्वेस्ट करना है?' आदि आदि। 'ट्राई करने में क्या जाता है, कौन-सा अपना पैसा जा रहा है' यह सोचकर लोग ऐसे मेसेज आगे बढ़ा देते हैं। आजकल हर किसी को वट्सऐप पर एक जैसे मेसेज कोई-न-कोई रिश्तेदार या दोस्त भेजता रहता है। सस्ता पाने के लालच में हम ऐसे मेसेज को बढ़ावा देते हैं। ऐसे ही कुछ मेसेज हैं:
- Amazon पर सिर्फ 1 रुपये में पेन ड्राइव
- Flipkart पर सिर्फ 1 रुपये में मोबाइल
- LED बल्ब फ्री में

- या कुछ भी जिसकी ज्यादा बातें हो रही हैं या टीवी/पेपर पर विज्ञापन आ रहे हैं।
दरअसल, ठग सिर्फ 150-200 रुपये में पॉप्युलर साइट के नाम से एक वेबसाइट का नाम (कुछ बदलाव के साथ) बुक करा लेते हैं। यह पेज बिलकुल Flipkart, Amazon या दूसरी पॉप्युलर वेबसाइट जैसा दिखता है। इस पर आपको जो बताया गया होता है, उसका फोटो होता है। फिर आपकी डिटेल्स मांगी जाती हैं। आप डिटेल्स शेयर करते हैं तो वह सारी जानकारी उनके डेटाबेस में जाती है। बस हो गया उनका काम! अब मुफ्त या बेहद सस्ता लेने के चक्कर में लग गया न आपको चूना और हो गई ठगों की चांदी। दरअसल, हर वॉट्सऐप ग्रुप में कम-से-कम 25 लोग होते हैं। आपने अगर 8 ग्रुप में मेसेज शेयर किया तो 200 लोगों के मन में लालच पैदा हुआ। 25 लोगों में से कम-से-कम 5 तो करेंगे, फिर वे और उनके 8 ग्रुप में तो सोचिए सिर्फ एक दिन में यह मेसेज लाखों लोगों तक पहुंच जाएगा। किसी बड़ी कंपनी को टेली-मार्केटिंग करनी होती है तो वह किसी बड़ी मोबाइल कंपनी से लाखों रुपये देकर हमारे नंबरों का डेटाबेस खरीदते हैं, पर यहां तो सिर्फ 150 रु लगाकर ये लोग बहुत कम में (करीब 2-4 लाख) में छोटी कंपनियों को बेच देते हैं। तो यह तो लॉटरी हो गई! 150-200 रुपये का टिकट और लाखों की कमाई, वह भी सिर्फ चंद दिनों में और बिना कोई मेहनत। फंस जाते हैं आप। इसके बाद कुछ-न-कुछ बेचने के लिए भर-भर के SMS और फोन कॉल आने लगते हैं। इसका असली फायदा किसी और को होता है और आप ठगे जाते हैं।

 
🔴 कैसे बचें


- वेबसाइट का नाम और उसकी स्पेलिंग ध्यान से देखें।
- यह भी गौर करें कि क्या उस मेसेज को 5-10 वट्सऐप ग्रुप्स में शेयर करने को कहा गया है?
दरअसल, हम सोचते हैं कि ऐमजॉन या फ्लिपकार्ट जैसी बड़ी कंपनी की तरफ से आया है तो घपला नहीं होगा। वेबसाइट के नाम और पेज पर कंपनी का नाम भी दिख रहा होता है। लेकिन नकली वेबसाइट का नाम लंबा और चिन्हों से बना होता है, कोई भी सिंपल और ऑरिजिनल (www.Amazon.com, www.flipkart.com आदि) नहीं होता। ऐसे मेसेज में आपका नाम, मोबाइल नंबर और अड्रेस की मांग की जाती है।
- ऐसे किसी भी मेसेज को आगे शेयर न करें, जहां जरूरत से ज्यादा सस्ता सामान मिलने का दावा किया जा रहा है।
- अगर किसी अनजान नंबर से ऐसा मेसेज आया हो तो उस नंबर को ब्लॉक कर दें।
- अगर आपका कोई जानकार ऐसे मेसेज शेयर करे तो उसे भी इससे परहेज करने को कहें।
- ऐसे किसी भी मेसेज में दिए URL पर क्लिक करने से बचें और मेसेज को दूसरों के साथ शेयर भी न करें।

- दूसरों को भी ऐसा करने से रोकें और बताएं कि यह फेक मेसेज है।

🔴 पॉलिटिकल ट्रैप

राजनीतिक मकसद के लिए सबसे ज्यादा झूठ बोला जाता है और सोशल मीडिया का भी इसमें जमकर इस्तेमाल हो रहा है। सोशल मीडिया के जरिए राजनीतिक झूठ फैलाने के कई फायदे और मकसद हैं जैसे कि पार्टी या नेता के लिए लोगों के दिल में इज्जत बढ़ाना, किसी दूसरे के खिलाफ नफरत बढ़ाना, किसी पार्टी के अजेंडे को आगे बढ़ाना आदि।
- कोई पॉलिसी या जनता के लिए कोई काम कभी किसी पूर्व मंत्री ने किया हो, उसे भी नया बता कर फैलाया जाता है। या तो उस पॉलिसी के बारे में लोगों को पता ही नहीं होता या फिर लोग उसके बारे में भूल जाते हैं और उस खबर को सही समझने लगते हैं।
- फोन नंबर 104 से आप जरूरत होने पर अपने घर या कहीं भी ब्लड बैंक से खून मंगा सकते हैं। यह नंबर चालू तो बरसों पहले हुआ था, लेकिन अब इसे प्रधानमंत्री मोदी की सौगात के रूप में फैलाया जा रहा है।
- फोन नंबर 1098 को यह कहकर पेश किया जा रहा है कि इस पर फोन करने पर लोग आपका बचा हुआ खाना उठाने आएंगे ताकि जरूरतमंदों के बीच बांटा जा सके। हकीकत यह है कि यह नंबर बरसों पहले एक एनजीओ ने चालू किया था। यह एनजीओ बच्चों की देखरेख करता है। यह नंबर इसलिए शेयर किया गया था कि कहीं कोई गुम हुआ बच्चा मिले तो एनजीओ को फोन करें। लेकिन अब बचे खाने के नाम पर इस नंबर पर इतने फोन आने लगे हैं कि एनजीओ को अपना असली काम करने में दिक्कतें आने लगी हैं।
- फोटो में कंप्यूटर से एडिटिंग करके चेहरा या कुछ और बदल देते हैं, जिससे उसका मतलब बदल जाता है। एक फोटो में प्रधानमंत्री मोदी को सोनिया गांधी और एक शेख के पैर छूते दिखाया गया था जबकि असल फोटो में वह अडवाणी जी के पैर छू रहे थे।
- एक और फोटो में महात्मा गांधी को बाबा साहेब आंबेडकर के पैर छूते दिखाया था जबकि वे दो अलग-अलग फोटो थे। एक आंबेडकर का फैमिली फोटो था, दूसरे में गांधी जी दांडी मार्च में जमीन पर से नमक उठा रहे थे। दोनों को मिक्स करके नया फोटो तैयार किया गया था।
- ट्विटर पर बहुत-से सिलेब्रिटी/नेता हैं जो अपनी मर्जी से कुछ भी लिखते हैं। लोग चाव से उन्हें पढ़ते हैं और जवाब देते हैं। अब यहां दो बातें होती हैं:
1. किसी सिलेब्रिटी या नेता का ट्वीट लेकर कंप्यूटर से उसे बदल कर झूठ फैलाने वाले लोग अपनी मर्जी से कुछ भी लिख देते हैं। यह देखने में असली लगता है, पर होता नहीं है।
2. लोग किसी एक शख्सियत के नाम से छोटे-मोटे बदलाव (कोई निशान या स्पेलिंग बदलकर) के साथ दूसरे हैंडल बना लेते हैं। फिर इनके स्क्रीनशॉट लेकर वट्सऐप या फेसबुक पर हजारों की संख्या में कुछ भी शेयर करते हैं जिससे लोगों पर प्रभाव पड़ता है।
- झूठ के बल पर दंगे भड़काने की कोशिश भी की जाती है। कुछ महीने पहले कश्मीर में काफी तनाव था। लोग परेशान थे पर सोशल मीडिया पर लोग दंगे भड़काने के लिए बरसों पुराने या दूसरे देशों के फोटो नई कह कर शेयर कर रहे थे। इन फोटो के जरिए आपकी देशभक्ति की भावनाओं का फायदा उठाने की कोशिश की जा रही थी। सब फोटो पर एक लाइन होती थी : 'बिका हुआ मीडिया आपको यह सचाई नहीं दिखाएगा। अगर आप सच्चे भारतीय हो तो हर ग्रुप में जरूर फॉरवर्ड करो।' ऐसा पहले भी कई बार हो चुका है।

 
🔴 कैसे बचें

 
- किसी भी फोटो या मेसेज पर आंख मूंदकर भरोसे करने से बचें। अगर आप गौर से देखेंगे और सोचेंगे तो कई तरह के झूठ खुद ही पकड़ लेंगे।
- किसी भी नंबर को आगे फॉरवर्ड करने से पहले एक बार खुद मिलाकर जांच लें।
- किसी के नाम से फैल रहे मेसेज की सचाई खुद भी इंटरनेट पर जाकर जरूर चेक कर लें।
- ट्विट को चेक करने के लिए सामने वाले का अकाउंट वेरिफाइड या है नहीं, यह जरूर चेक करें। वेरिफाइड अकाउंट के सामने एक नीले गोले में सफेद टिकमार्क होता है जिससे पता चलता है कि वह असली है। जिनके हैंडल पर ऐसा नहीं होता तो देखें कि उनके कितने फॉलोअर्स हैं और वह कैसा ट्वीट करते हैं? जैसे कि किसी हीरो के नाम (थोड़ी स्पेलिंग बदल कर) का हैंडल होगा, पर उसके सिर्फ 1000-2000 ही फॉलोअर्स होंगे और करीबन सारे ट्वीट राजनीति से भरे होंगे। साथ ही, फिल्म/अवॉर्ड फंक्शन आदि के बारे में कुछ खास नहीं होगा। ऐसे में मान लें कि वह फेक हैंडल है।


🌹 अगले अंक में समाप्त  

 
👉 सोशल मीडिया पर उल्लू बनने से ऐसे बचें (भाग 1) 

http://awgpskj.blogspot.in/2017/01/1_22.html

👉 जीवन देवता की साधना-आराधना (भाग 17) 24 Jan

🌹 त्रिविध भवबन्धन एवं उनसे मुक्ति
🔴 लोभ, मोह और अहंकार के तीन भारी पत्थर जिन्होंने सिर पर लाद रखे हैं, उनके लिये जीवन साधना की लम्बी और ऊँची मंजिल पर चल सकना, चल पड़ना असम्भव हो जाता है। भले ही कोई कितना पूजा-पाठ क्यों न करता रहे! जिन्हें तथ्यान्वेषी बनना है, उन्हें इन तीन शत्रुओं से अपना पीछा छुड़ाना ही चाहिये।             

🔵 हलकी वस्तुएँ पानी पर तैरती हैं, किन्तु भारी होने पर वे डूब जाती हैं। जो लोभ, मोह और अहंकार रूपी भारी पत्थर अपनी पीठ पर लादे हुए हैं, उन्हें भवसागर में डूबना ही पड़ेगा। जिन्हें तरना, तैरना है, उन्हें इन तीनों भारों को उतारने का प्रयत्न करना चाहिये। 

🔴 अनेकानेक दोष-दुर्गुणों कषाय-कल्मषों का वर्गीकरण विभाजन करने पर उनकी संख्या हजारों हो सकती है, पर उनके मूल उद्गम यही तीन लोभ, मोह और अहंकार हैं। इन्हीं भव बन्धनों से मनुष्य के स्थूल, सूक्ष्म और कारण शरीर जकड़े पड़े हैं। इनका उन्मूलन किये बिना आत्मा को उस स्वतन्त्रता का लाभ नहीं मिल सकता जिसे मोक्ष कहते हैं। इन तीनों पर कड़ी नजर रखी जाय। इन्हें अपना संयुक्त शत्रु माना जाये। इनसे पीछा छुड़ाने के लिये हर दिन नियमित रूप से प्रयास जारी रखा जाये। एकदम तो सब कुछ सही हो जाना कठिन है, पर उन्हें नित्यप्रति यथासम्भव घटाते-हटाते चलने की प्रक्रिया जारी रखने पर सुधार क्रम में सफलता मिलती ही चलती है और एक दिन ऐसा भी आता है, जब इनसे पूरी तरह छुटकारा पाकर बन्धन मुक्त हुआ जा सके।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

👉 आखिरी प्रयास

 🔴 किसी दूर गाँव में एक पुजारी रहते थे जो हमेशा धर्म कर्म के कामों में लगे रहते थे। एक दिन किसी काम से गांव के बाहर जा रहे थे तो अचानक उनकी नज़र एक बड़े से पत्थर पे पड़ी। तभी उनके मन में विचार आया कितना विशाल पत्थर है क्यूँ ना इस पत्थर से भगवान की एक मूर्ति बनाई जाये। यही सोचकर पुजारी ने वो पत्थर उठवा लिया।

🔵 गाँव लौटते हुए पुजारी ने वो पत्थर के टुकड़ा एक मूर्तिकार को दे दिया जो बहुत ही प्रसिद्ध मूर्तिकार था। अब मूर्तिकार जल्दी ही अपने औजार लेकर पत्थर को काटने में जुट गया। जैसे ही मूर्तिकार ने पहला वार किया उसे एहसास हुआ की पत्थर बहुत ही कठोर है। मूर्तिकार ने एक बार फिर से पूरे जोश के साथ प्रहार किया लेकिन पत्थर टस से मस भी नहीं हुआ। अब तो मूर्तिकार का पसीना छूट गया वो लगातार हथौड़े से प्रहार करता रहा लेकिन पत्थर नहीं टुटा। उसने लगातार 99 प्रयास किये लेकिन पत्थर तोड़ने में नाकाम रहा।

🔴 अगले दिन जब पुजारी आये तो मूर्तिकार ने भगवान की मूर्ति बनाने से मना कर दिया और सारी बात बताई। पुजारी जी दुखी मन से पत्थर वापस उठाया और गाँव के ही एक छोटे मूर्तिकार को वो पत्थर मूर्ति बनाने के लिए दे दिया। अब मूर्तिकार ने अपने औजार उठाये और पत्थर काटने में जुट गया, जैसे ही उसने पहला हथोड़ा मारा पत्थर टूट गया क्यूंकि पत्थर पहले मूर्तिकार की चोटों से काफी कमजोर हो गया था। पुजारी यह देखकर बहुत खुश हुआ और देखते ही देखते मूर्तिकार ने भगवान शिव की बहुत सुन्दर मूर्ति बना डाली।

🔵 पुजारी जी मन ही मन पहले मूर्तिकार की दशा सोचकर मुस्कुराये कि उस मूर्तिकार ने 99 प्रहार किये और थक गया, काश उसने एक आखिरी प्रहार भी किया होता तो वो सफल हो गया होता।

🔴 मित्रों यही बात हर इंसान के दैनिक जीवन पे भी लागू होती है, बहुत सारे लोग जो ये शिकायत रखते हैं कि वो कठिन प्रयासों के बावजूद सफल नहीं हो पाते लेकिन सच यही है कि वो आखिरी प्रयास से पहले ही थक जाते हैं। लगातार कोशिशें करते रहिये क्या पता आपका अगला प्रयास ही वो आखिरी प्रयास हो जो आपका जीवन बदल दे।

👉 अच्छाइयाँ देखिए अच्छाइयाँ फैलेंगी

🔵 जैसा हम देखते, सुनते या व्यवहार में लाते हैं, ठीक वैसा ही निर्माण हमारे अंतर्जगत् का होता है। जो- जो वस्तुएँ हम बाह्य जगत् में देखते हैं, हमारी अभिरुचि के अनुसार उनका प्रभाव पड़ता है। प्रत्येक अच्छी मालूम होने वाली प्रतिक्रिया से हमारे मन में एक ठीक मार्ग बनता है। क्रमश: वैसा ही करने से वह मानसिक मार्ग दृढ़ बनता जाता है। अंत में वह आदत बनकर ऐसा पक्का हो जाता है कि मनुष्य उसका क्रीतदास बना रहता है।

🔴 जो व्यक्ति अच्छाइयाँ देखने की आदत बना लेता है, उसके अंतर्जगत् का निर्माण शील, गुण, दैवी तत्त्वों से होता है। उसमें ईर्ष्या, द्वेष, स्वार्थ की गंध नहीं होती। सर्वत्र अच्छाइयाँ देखने से वह स्वयं शील गुणों का केन्द्र बन जाता है।

🔵 अच्छाई एक प्रकार का पारस है। जिसके पास अच्छाई देखने का सद्गुण मौजूद है, वह पुरुष अपने चरित्र के प्रभाव से दुराचारी को भी सदाचारी बना देता है। उस केन्द्र से ऐसा विद्युत प्रभाव प्रसारित होता है जिससे सर्वत्र सत्यता का प्रकाश होता है। नैतिक माधुर्य जिस स्थान पर एकीभूत हो जाता है, उसी स्थान में समझ लो कि सच्चा माधुर्य तथा आत्मिक सौंदर्य विद्यमान है। अच्छाई देखने की आदत सौंदर्य रक्षा एवं शील रक्षा दोनों को समन्वय करने वाली है।
🔴 जो व्यक्ति गंदगी और मैल देखता है, वह दुराचारी, कुरूप, विषयी और कुकर्मी बनता है। अच्छाई को मन में रोकने से अच्छाई की वृद्धि होती है। दुष्प्रवृत्ति को रोकने से हिंसा, मारना, पीटना, ठगना, अनुचित भोग विलास इत्यादि बढ़ता है। यदि संसार में लोग नीर- क्षीर विवेक करने लगें और अपनी दुष्प्रवृत्तियों को निकाल दें, तो सतयुग आ सकता है और हम पुनः उन्नत हो सकते हैं।

🌹 -अखण्ड ज्योति- दिसंबर 1946 पृष्ठ 19

http://literature.awgp.org/magazine/AkhandjyotiHindi/1946/December.19

👉 आत्मचिंतन के क्षण 24 Jan 2017

🔴 मनुष्य शरीर में प्रसुप्त देवत्व का जागरण करना ही आज की सबसे बड़ी ईश्वर पूजा है। युगधर्म इसी के लिए प्रबुद्ध आत्माओं का आवाहन कर रहा है। नवयुग निर्माण की आधारशिला यही है। जिस असुरता की दुष्प्रवृत्तियों ने संसार को दुःख दारिद्रय भरा नरक बनाया, जिस अविवेक ने परमात्मा के पुत्र आत्मा को निकृष्टतम कीड़े से गये गुजरे स्तर पर ला पटका, उसका उन्मूलन देवत्व के अभिवर्धन से ही होना है। अंधकार को मिटाने के लिए प्रकाश उत्पन्न करने के अतिरिक्त और कोई मार्ग नहीं।

🔵 देवत्व का जागरण एवं पोषण करने की तैयारी ही वह प्रयत्न है जिसके फलस्वरूप वर्तमान असुर अंधकार का निराकरण होगा। परिपुष्ट देवत्व से वह व्यापक प्रभाव उत्पन्न होगा जिससे प्रभावित होकर लोग पशुता और पिशाच वृत्ति का दुष्परिणाम समझ सकने योग्य विवेक एवं उन दुष्प्रवृत्तियों को त्याग सकने योग्य साहस कर सकें।

🔴 आशा करनी चाहिए कि वह दिन हम लोग अपनी इन्हीं आँखों से इसी जीवन में देखेंगे, जबकि अगणित देव प्रवृत्ति के व्यक्ति अपने-अपने स्वार्थों को तिलांजलि देकर विश्व के नवनिर्माण में ऐतिहासिक महापुरुषों की तरह प्रवृत्त होंगे और इन दिनों जिस पशुता एवं पैशाचिक प्रवृत्ति ने लोकमानस पर अपनी काली चादर बिछा रखी है उसे तिरोहित करेंगे। अनाचार का अंत होगा और हर व्यक्ति अपने चारों ओर प्रेम, सौजन्य, सद्भाव, न्याय, उल्लास, सुविधा एवं सज्जनता से भरा सुख-शान्तिपूर्ण वातावरण अनुभव करेगा। उस शुभ दिन को लाने का उत्तरदायित्व देव वर्ग का है।

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य

👉 तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा

🔴 नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा में कटक के एक संपन्न बंगाली परिवार में हुआ था। बोस के पिता का नाम 'जानकीनाथ बोस' और माँ का नाम 'प्रभावती' था। जानकीनाथ बोस कटक शहर के मशहूर वक़ील थे। प्रभावती और जानकीनाथ बोस की कुल मिलाकर 14 संतानें थी, जिसमें 6 बेटियाँ और 8 बेटे थे। सुभाष चंद्र उनकी नौवीं संतान और पाँचवें बेटे थे। अपने सभी भाइयों में से सुभाष को सबसे अधिक लगाव शरदचंद्र से था। नेताजी ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई कटक के रेवेंशॉव कॉलेजिएट स्कूल में हुई। तत्पश्चात् उनकी शिक्षा कलकत्ता के प्रेज़िडेंसी कॉलेज और स्कॉटिश चर्च कॉलेज से हुई, और बाद में भारतीय प्रशासनिक सेवा (इण्डियन सिविल सर्विस) की तैयारी के लिए उनके माता-पिता ने बोस को इंग्लैंड के केंब्रिज विश्वविद्यालय भेज दिया। अँग्रेज़ी शासन काल में भारतीयों के लिए सिविल सर्विस में जाना बहुत कठिन था किंतु उन्होंने सिविल सर्विस की परीक्षा में चौथा स्थान प्राप्त किया। 1921 में भारत में बढ़ती राजनीतिक गतिविधियों का समाचार पाकर बोस ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली और शीघ्र भारत लौट आए।
 
🔴 नेताजी' के नाम से प्रसिद्ध सुभाष चन्द्र ने सशक्त क्रान्ति द्वारा भारत को स्वतंत्र कराने के उद्देश्य से 21 अक्टूबर, 1943 को 'आज़ाद हिन्द सरकार' की स्थापना की तथा 'आज़ाद हिन्द फ़ौज' का गठन किया इस संगठन के प्रतीक चिह्न पर एक झंडे पर दहाड़ते हुए बाघ का चित्र बना होता था। नेताजी अपनी आजाद हिंद फौज के साथ 4 जुलाई 1944 को बर्मा पहुँचे। यहीं पर उन्होंने अपना प्रसिद्ध नारा, "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा" दिया।
🔵 18 अगस्त 1945 को टोक्यो (जापान) जाते समय ताइवान के पास नेताजी का एक हवाई दुर्घटना में निधन हुआ बताया जाता है, लेकिन उनका शव नहीं मिल पाया। नेताजी की मौत के कारणों पर आज भी विवाद बना हुआ है।
 
 
🔴 याद रखिये – सबसे बड़ा अपराध, अन्याय को सहना और गलत व्यक्ति के साथ समझौता करना हैं।

🔵 यह हमारा फर्ज हैं कि हम अपनी आजादी की कीमत अपने खून से चुकाएं। हमें अपने त्याग और बलिदान से जो आजादी मिले, उसकी रक्षा करनी की ताकत हमारे अन्दर होनी चाहिए।

👉 अपना अपना भाग्‍य

एक राजा के तीन पुत्रियाँ थीं और तीनों बडी ही समझदार थी। वे तीनो राजमहल मे बडे आराम से रहती थी। एक दिन राजा अपनी तीनों पुत्रियों सहित भोज...