बुधवार, 30 मार्च 2016

बुद्धि का विकास

बुद्धि का विकास

क्या बुद्धि का विकास बचपन में ही संभव है? उत्तर में कहना चाहिए कि आरंभिक काल की शिक्षा अवश्य ही महत्वपूर्ण एवं सरल है। इनमें बीस वर्ष की आयु तक जो संस्कार जम जाते हैं, वे अगले चार-पाँच वर्षो में पुष्ट होकर जीवन भर बने रहते हैं। उनमें परिवर्तन कठिनाई से और कम होता है, फिर भी यह बात असंभव नहीं कि बड़ी उम्र में भी किसी नवीन विषय में योग्यता प्राप्त की जाए। वर्षा ऋतु में बीज बोने पर बिना परिश्रम के फसल आ जाती है, किंतु अन्य ऋतुओं में पानी आदि की विशेष व्यवस्था करके फसल प्राप्त होती है। बड़ी आयु में किसी विषय की योग्यता प्राप्त करने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि उस विषय में आंतरिक उत्कंठा और तीव्र इच्छा हो। किसी विषय को सीखने की विशेष इच्छा यदि मनुष्य के हृदय में उत्पन्न हो जाय, तो वह उस शक्ति के मुरझाये हुए बीजकोषों को उसी प्रकार चैतन्य कर सकता है जैसे कि जेठ के जलते हुए वातावरण में भी चतुर किसान जल आदि की सहायता से खेत बोता है और पौधों से फल लेता है। यह नहीं समझना चाहिए कि हमारी इतनी उम्र हो गई या हम बुड्ढे हो आए। अब क्या ज्ञान प्राप्त करेंगे ? जीवित मनुष्य के मानसिक कोषों में यह विशेषता है कि वे किसी भी दशा में पूर्णतः नष्ट नहीं होते और अत्यंत वृद्ध होने तक विकसित होने की दशा में बने रहते हैं। जिन लोगों की किशोर अवस्था निकल चुकी, बेशक उन्होंने आसानी से बुद्धि बढ़ाने का एक अवसर खो दिया, फिर भी निराश होने की कोई बात नहीं है। तीव्र इच्छा के द्वारा हर आयु में हर प्रकार की उन्नति कर सकना मनुष्य के हाथ में पूरी तरह से है।

बुद्धि बढ़ाने की वैज्ञानिक विधि - पृ. ४

Development of Intelligence:

Does the intelligence develop during childhood only? Of course, the learning in the early formatting years is very important and easy too. The cultural attitude and behavioral patterns that set the roots until age of 20 years, get further strengthened in next four or five years and influence the entire life forever. Any modification later on is very difficult and rarely to come. However it is not impossible, in old age also, to acquire expertise in a new subject. It is natural to reap the crops without much effort if seeds are sowed timely in monsoon, but to get the same results in other season, a special arrangement of irrigation is required. It is very important to have a burning desire and strong internal initiation to succeed in any field at an old age. Such a desire can revitalize the shriveled or withered seeds just like a farmer who successfully sows the seeds in a hot summer but gets abundant crops with due care and appropriate watering. One should never think that he has grown old or that age has ripen beyond learning. In fact, learning is a process that goes on through out the whole life span. The brain cells never get destroyed; they are ready to grow at any age, as and when required. Those who passed their adolescence unaware, no doubt missed a golden opportunity of easily sharpening their wit and wisdom, but no need to get disappointed. With a keen desire, it is totally in one’s own hands to make progress of any kind at any age.

The Scientific Approach to Sharpen Wit and Wisdom: Page 4.

मुक्ति का अर्थ

मुक्ति का अर्थ

मुक्ति का अर्थ होगा बन्धनों से छूटना । विचार करना है कि कौन से बन्धन हैं जिनसे हम बॅंधे हैं, शरीर को रस्सों से तो किसी ने  जकड़ नहीं रखा है फिर मुक्ति किससे ? मुक्ति वस्तुत: अपने दोष-दुर्गुणों से, स्वार्थ-संकीर्णता से, क्रोध-अंहकार से, लोभ-मोह से, पाप-अविवेक सेप्राप्त करनी चाहिए । यह अंतरंग की दुर्बलता ही सबसे बड़ा बन्धन है।
स्वर्ग और मुक्ति अपने दृष्टिकोण को परिष्कृत करके हम इसी जीवन में
प्राप्त कर सकते हैं, इसके लिए मृत्यु काल तक की प्रतीक्षा करने की
आवश्यकता नहीं ।

युग निर्माण योजना - दर्शन, स्वरूप व कार्यक्रम-६६ (६.१४)

Meaning of Salvation

Salvation would mean freedom from bondage. It has to be thought which bondages are we subjected to, since our physical body is not roped, then from what are we seeking salvation?  

Salvation should be called indeed from one’s flaw and faults, selfishness and narrow mindedness, anger and egoism, greed and attachment, sin and indiscretion. This weakness of inner self is the biggest bondage. We can attain heaven and salvation within this life time, by redefining our perspective; for this we don't have to wait until death period.

Yug Nirman Yojna - philosophy, pattern and program -66 (6.14)

👉 विशेष अनुदान विशेष दायित्व

भगवान् ने मनुष्य के साथ कोई पक्षपात नहीं किया है, बल्कि उसे अमानत के रूप में कुछ विभूतियाँ दी हैं। जिसको सोचना, विचारणा, बोलना, भावनाएँ, सिद...