जलती हुई आग के पास बैठकर घोर शीत में भी सर्दी से बचा जा सकता है। आग अपने आसपास के समीपवर्ती क्षेत्र को भी गर्म करती है। वह अपनी ताप किरणें दूर-दूर तक फैलाती है और निकटवर्ती क्षेत्र को गर्म रखती है। यों शरीर में भी गर्मी होती है। साँस के द्वारा उस गर्मी को अनुभव किया जा सकता है और देह के संपर्क में जो वस्त्र आते हैं वे भी गरम हो जाते हैं। सर्दियों में कपड़े पहनकर सर्दी से इसीलिए बचा जा सकता है कि इन वस्त्रों से शरीर की गर्मी बाहर निकलने से बच जाती है और शरीर गर्म रहता है। मनुष्य में रहने वाली तापशक्ति से भी अधिक महत्वपूर्ण और प्रखर शक्ति है- विचार शक्ति। उसकी प्रचण्डता देखते ही बनती है।
इस शक्ति का- विचार शक्ति एवं इच्छा शक्ति का निर्माण मस्तिष्क में होता है। विचार शक्ति और इच्छा शक्ति की प्रचण्डता तथा प्रखरता के अनेक उदाहरण प्रत्यक्ष जगत में देखे जा सकते हैं। कई लोगों ने तो अपनी इस शक्ति का विकास इस स्तर तक किया है कि उनकी मिसाल दी जा सकती है और सामान्यजनों के लिए वे प्रसंग चमत्कारी ही कहे जा सकते हैं। ड्यूक विश्वविद्यालय की परामनोविज्ञान प्रयोगशाला ‘अमेरिकन सोसाइटी फार साइकिक पावर’ तथा कुछ अन्य विश्वविद्यालयों ने इस सम्बन्ध में रुचि दिखाई है और ऐसे अनेक उदाहरण एकत्रित किए हैं। जिनमें विचार या इच्छा शक्ति का महत्व समझा जा सके।
इन प्रसंगों में रेड सीरियस का उदाहरण बहुत चमत्कारी कहा जा सकता है। रेड के सम्बन्ध में पत्र-पत्रिकाओं में बहुत कुछ प्रकाशित हो चुका है। पिछले दिनों अमेरिका के ही एक व्यक्ति आइजक बोर्न ने स्पेन के समुद्र में डूबे जहाजों का पता लगाने के लिए अपनी विचार शक्ति का प्रयोग किया और तमाम उपाय असफल हो जाने के उपरान्त इस पद्धति से सफलता प्राप्त की। अतीन्द्रिय शक्तियों में से अधिकाँश इन्हीं विचार और इच्छा शक्ति का परिणाम है। दूर-दर्शन, दूरानुभूति पूर्वाभास आदि अतीन्द्रिय विशेषताएँ प्रकारान्तर से इसी विचार शक्ति के परिणाम हैं।
यहाँ यह तथ्य समझ लेना चाहिए कि विचार शक्ति और इच्छा शक्ति में बहुत थोड़ा-सा अन्तर है। इन दोनों का निर्माण मस्तिष्क में होता है, यहाँ तक तो कोई विवाद नहीं है, लेकिन यहाँ आकर इच्छा शक्ति विचार शक्ति का पलड़ा भारी हो जाता है कि इच्छा शक्ति का प्राण है। कहा जा सकता है कि इच्छा शक्ति की प्रबलता से मस्तिष्कीय क्षमता बढ़ती है। मस्तिष्कीय उपचारों से कदाचित ही किन्हीं जड़मति लोगों को बुद्धिमान बनाया जा सकता हो पर इच्छा शक्ति की प्रेरणा से वरदराज जैसे अगणित मन्दमति लोग उच्च श्रेणी के विचारवान बुद्धिमान बन सकते हैं। अन्तःप्रेरणा उनके अविकसित मस्तिष्क को विकसित स्तर का बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका सम्पादित की है।
.....क्रमशः जारी
✍️ परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य
📖 अखण्ड ज्योति जनवरी 1983
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