एक दिन एक राजा और महात्मा में भेंट हुई। दोनों अपने-अपने क्षेत्रों की प्रशंसा करने लगें। महात्मा ने आत्मा की महत्ता बताई, राजा ने अपने राज्य की। महात्मा ने कहा- राज्य आत्मा से बड़ा नहीं हो सकता। उनने राजा से पूछा-यदि तुम रेगिस्तान में घिर जाओ और प्यास से प्राण निकलें और उस समय कोई पानी के बदले आधा राज्य माँगें तो दोगे या नहीं ? राजा ने कहा-दूँगा फिर महात्मा ने पूछा-यदि तुम बीमार हो जाओ और रोग इतना बढ़े कि बचने की कोई आशा न रहे ऐसी दशा में यदि कोई वैध शर्त के साथ इलाज करे और अच्छा करने की कीमत आधा राज्य माँगे तो दोगे या नहीं ? राजा ने कहा-दूँगा
महात्मा जी खिलखिला कर हँस पड़े उनने कहा-जो राज्य एक लोटा पानी और एक शीशी दवा के बदले दिया जा सकता है उसका महत्व आत्मा से बढ़ कर किस प्रकार हो सकता है? जिस जीवन की रक्षा के लिए जब मनुष्य बड़े से बड़ा काम कर सकता है तो उस जीवन के उत्कर्ष के लिए तो उसे राजपाट से भी बड़ी चीज का त्याग करने को उद्धत होना चाहिए।
📖 अखण्ड ज्योति नवम्बर 1961
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