🔶 अपने सुधार के बिना परिस्थितियाँ नहीं सुधर सकतीं। अपना दृष्टिकोण बदले बिना जीवन की गतिविधियाँ नहीं बदली जा सकतीं। इस तथ्य को मनुष्य जितना जल्दी समझ ले उतना ही अच्छा है। हम दूसरों को सुधारना चाहते हैं, पर इसके लिए समर्थ वही हो सकता है, जो पहले सुधार के प्रयोग को अपने ऊपर आजमाकर अपनी योग्यता की परीक्षा दे। दूसरे लोग अपना कहना न मानें यह हो सकता है; पर हम अपनी बात स्वयं ही न माने इसका क्या कारण है? अपनी मान्यताओं को यदि हम स्वयं ही कार्यरूप में परिणत न करें, तो फिर सभी स्त्री-बच्चों से, मित्र-पड़ोसियों से या सारे संसार से यह आशा कैसे करेंगे कि वे अपनी बुरी आदतों को छोड़कर उस उत्तम मार्ग पर चलने लगें, जिसकी कि आप शिक्षा देते हैं।
🔷 हम भारतीय संस्कृति को मेज पर खड़ा करके यह कहना चाहते हैं कि यह वह संस्कृति है, जिसने दुनिया का कायाकल्प कर दिया। आज भी यह पूरी तरह से मार्गदर्शन देने में सक्षम है। मनीषी इसने ही पैदा किए। यदि मनीषी जाग जाएँ, तो देश, समाज, संस्कृति व सारे विश्व का कल्याण होगा। भगवान् करे मनीषी जगे, जागे, जगाए व जमाना बदले-हमारा यह संकल्प है।
🔶 भगवान् के द्वार निजी प्रयोजनों के लिए अनेकों खटखटाते पाये जाते हैं; पर अब की बार भगवान् ने अपना प्रयोजन पूरा करने के लिए साथी-सहयोगियों को पुकारा है। जो इसके लिए साहस जुटायेंगे, वे लोक और परलोक की, सिद्धियों, विभूतियों से अलंकृत होकर रहेंगे। शांतिकुंज के संचालकों ने यही सम्पन्न किया और अपने को अति सामान्य होते हुए भी अत्यन्त महान् कहलाने का श्रेय पाया है। जाग्रत आत्माओं से भी इन दिनों ऐसा अनुकरण करने की अपेक्षा की जा रही है।
✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
🔷 हम भारतीय संस्कृति को मेज पर खड़ा करके यह कहना चाहते हैं कि यह वह संस्कृति है, जिसने दुनिया का कायाकल्प कर दिया। आज भी यह पूरी तरह से मार्गदर्शन देने में सक्षम है। मनीषी इसने ही पैदा किए। यदि मनीषी जाग जाएँ, तो देश, समाज, संस्कृति व सारे विश्व का कल्याण होगा। भगवान् करे मनीषी जगे, जागे, जगाए व जमाना बदले-हमारा यह संकल्प है।
🔶 भगवान् के द्वार निजी प्रयोजनों के लिए अनेकों खटखटाते पाये जाते हैं; पर अब की बार भगवान् ने अपना प्रयोजन पूरा करने के लिए साथी-सहयोगियों को पुकारा है। जो इसके लिए साहस जुटायेंगे, वे लोक और परलोक की, सिद्धियों, विभूतियों से अलंकृत होकर रहेंगे। शांतिकुंज के संचालकों ने यही सम्पन्न किया और अपने को अति सामान्य होते हुए भी अत्यन्त महान् कहलाने का श्रेय पाया है। जाग्रत आत्माओं से भी इन दिनों ऐसा अनुकरण करने की अपेक्षा की जा रही है।
✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य















































