🔶 हर रोज चिट्ठियाँ आती हैं, हर शाखाओं में मारकाट-मारकाट मुझे मैनेजर बनाइये, इस मैनेजर को निकालिये। हमने शाखा तथा शक्तिपीठें इसलिए नहीं बनाई थीं, देवता को इसलिए नहीं बैठाया था कि लोगों का अहंकार बढ़े। हमने ट्रस्टी इसलिए नहीं बनाया था कि इसे बरबाद करो। हमने स्वयं गलती की इन लोगों को मालिक, ट्रस्टी बनाकर, इनके अहंकार एवं स्वार्थपरता को आगे बढ़ाकर। अब पंचायत समितियों में जिस प्रकार झगड़ा होते हैं, हमारे शक्तिपीठों में भी हर जगह चाण्डालपन है, हमें क्या दिखता नहीं? क्या हमने शक्तिपीठें इसीलिए बनाई थीं, पूजा इसीलिए प्रारम्भ की थी, इसीलिए संगठन बनाया था कि आप लोग अहंकारी बन जाइये और आपस में ही एक-दूसरे की टाँग-खिचाई कीजिये, आप ऐसी पूजा को बंद कीजिए, पूजा मत कीजिये, पर यह घटियापन बन्द कीजिये। आप नास्तिक हो जाइये, भले ही पर आप इसी तरह के संगठन बनाना बन्द कर दीजिए। आप शक्तिपीठों को बनाना बन्द कर दीजिये।
🔷 यहाँ हम एक बात अवश्य कहेंगे कि आप आध्यात्मिकता के मौलिक सिद्धान्तों को समझिये। पूजा को पीछे हटाइए, आध्यात्मिकता के मौलिक सिद्धान्तों को समझिये। आप यह मत सोचिये कि गुरुजी ने चौबीस-चौबीस लाख का जप किया था। नहीं, हम और चौबीस लाख के जप करने वालों का नाम बता सकते हैं जो आज बिलकुल खाली एवं छूँछ हैं। जप करने वाले कुछ नहीं कर सकते हैं, हम ब्राह्मण की शक्ति, सन्त की शक्ति जगाना चाहते हैं। आप राम का नाम लें या न लें। अब तो मैं यहाँ तक कहता हूँ कि अब माला जप करें या न करें, एक माला जप करें या ८१ माला जप करें, परन्तु मुख्य बात यह है कि आप अपने ब्राह्मणत्व को जगाइए। प्याऊ को कौन चलाएगा। हनुमान चालीसा पाठ करने वालों ने कितनों का भला किया है? ब्राह्मणों ने भला किया है, सन्तों ने भला किया है? ब्राह्मणों की वाणी में, सन्तों की तपस्या में बल होता है। आपको इसी प्रकार कोई मिल जाएगा तो आप नास्तिक हो जाएँगे। आप पूजा का महत्त्व बढ़ाइये। अध्यात्म इन लोगों के द्वारा ही टिका हुआ है।
🔶 आपके पास बैंक में धन जमा नहीं है, तो चैक कैसे काट सकते हैं। आपकी बैंक में पूँजी होनी चाहिए। पहले जमा तो कीजिए कुछ। केवल पूजा से ही काम चलने वाला नहीं है। हमारी सबसे बड़ी पूजा समाज की सेवा है। हमने लाखों आदमियों की ही नहीं, वरन् सारे विश्व की सेवा की है। हमने अपनी अक्ल, धन, अनुष्ठान, वर्चस् सभी इसी में लगाया है। हमने खेती करने वालों, मकान बनाने वालों को देखा है कि सेवा के नाम पर नगण्य हैं।
🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य (अमृतवाणी)
🔷 यहाँ हम एक बात अवश्य कहेंगे कि आप आध्यात्मिकता के मौलिक सिद्धान्तों को समझिये। पूजा को पीछे हटाइए, आध्यात्मिकता के मौलिक सिद्धान्तों को समझिये। आप यह मत सोचिये कि गुरुजी ने चौबीस-चौबीस लाख का जप किया था। नहीं, हम और चौबीस लाख के जप करने वालों का नाम बता सकते हैं जो आज बिलकुल खाली एवं छूँछ हैं। जप करने वाले कुछ नहीं कर सकते हैं, हम ब्राह्मण की शक्ति, सन्त की शक्ति जगाना चाहते हैं। आप राम का नाम लें या न लें। अब तो मैं यहाँ तक कहता हूँ कि अब माला जप करें या न करें, एक माला जप करें या ८१ माला जप करें, परन्तु मुख्य बात यह है कि आप अपने ब्राह्मणत्व को जगाइए। प्याऊ को कौन चलाएगा। हनुमान चालीसा पाठ करने वालों ने कितनों का भला किया है? ब्राह्मणों ने भला किया है, सन्तों ने भला किया है? ब्राह्मणों की वाणी में, सन्तों की तपस्या में बल होता है। आपको इसी प्रकार कोई मिल जाएगा तो आप नास्तिक हो जाएँगे। आप पूजा का महत्त्व बढ़ाइये। अध्यात्म इन लोगों के द्वारा ही टिका हुआ है।
🔶 आपके पास बैंक में धन जमा नहीं है, तो चैक कैसे काट सकते हैं। आपकी बैंक में पूँजी होनी चाहिए। पहले जमा तो कीजिए कुछ। केवल पूजा से ही काम चलने वाला नहीं है। हमारी सबसे बड़ी पूजा समाज की सेवा है। हमने लाखों आदमियों की ही नहीं, वरन् सारे विश्व की सेवा की है। हमने अपनी अक्ल, धन, अनुष्ठान, वर्चस् सभी इसी में लगाया है। हमने खेती करने वालों, मकान बनाने वालों को देखा है कि सेवा के नाम पर नगण्य हैं।
🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य (अमृतवाणी)











































