शनिवार, 8 अप्रैल 2017
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👉 सुख और दुःख दृष्टिकोण मात्र हैं। (अंतिम भाग)
सुख-दुःख के प्रति यदि मनुष्य का दृष्टिकोण सम हो जाये तो उसके लिये चिन्ता, शोक, व्यग्रता तथा विकलता के सारे ही कारण समाप्त हो जायें। अपने प्र...

1 टिप्पणी:
Mangal panday ji vo mahan krantikaari the , jinhone kranti ki aag bhadkau thi logo ke dilo me
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