(17 अप्रैल 1974 को शान्तिकुञ्ज में दिया गया उद्बोधन)
🔶 मित्रो! आपको समय से पहले बदल जाना चाहिए, नहीं तो आपको पश्चाताप ज्यादा करना पड़ेगा। जब कोई डाकू चीजें छीन ले जाता है, तो आदमी को ज्यादा अफसोस होता है, लेकिन अगर अपने हाथों से किसी भिखारी को दे देता है, स्कूल की इमारत बनाने के लिए दे देता है, तो उसको संतोष होता है। पैसा तो चला गया न, चाहे वह डाकू ले गया हो तो भी और चाहे स्कूल बनाने के लिए दे दिया तो भी। लेकिन अपने हाथ से देने पर संतोष रहता है। अतः आपको लोगों से यह कहने के लिए जाना है क अब युग बदल रहा है, समय बदला रहा है, युग की धाराएँ बदल रही हैं। धन के बारे में मूल्यांकन बदल रहा है। धन लोगों के पास रहने वाला नहीं है।
🔷 धन बहुत तेजी से चला जाने वाला है। आप देख नहीं रहे हैं क्या? गवर्नमेंट क्या-क्या कर रही है? मृत्यु टैक्स लगा रही है। संपत्ति टैक्स लगा रही है और दूसरे टैक्स लगा रही है। सब अगले दिनों जो गवर्नमेंट आने वाली है, अगले दिनों जो समय आने वाला है, उसमें रशिया वाला कानून लागू हो जाएगा, चाइना वाला कानून लागू हो जाएगा। हमको और आपको बस हाथ-पाँव से मेहनत करनी पड़ेगी, परिश्रम करना पड़ेगा और उस मेहनत के बदले में जो खुराक हमको मिलनी चाहिए, जो रोटी मिलनी चाहिए, वह मिल जाएगी। खुराक की सारी-की-सारी चीजें मिल जाएँगी।
🔶 साथियो! लोगों से कहना कि आपको भगवान् ने जो विभूतियाँ दी हैं, क्षमताएँ दी हैं, उसका सवाब आप उठा सकते हैं, लाभ उठा सकते हैं, जीवात्मा को शांति दे सकते हैं। जीवात्मा की शांति के लिए, पुण्य के लिए अपने आपको तैयार कर लेना चाहिए, ताकि आपका अंतःकरण शांति में रहे और समाज को भी आपके बदले का अनुदान मिले और हमारा सिर भी गर्व से ऊँचा उठ जाए। समय से पहले हम अंगद के तरीके से इसीलिए आपके पास आए हैं, ताकि यह बता सकें कि आपको वक्त रहते बदल जाना चाहिए और लाभ उठा लेना चाहिए।
.... क्रमशः जारी
✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य (अमृत वाणी)
🔶 मित्रो! आपको समय से पहले बदल जाना चाहिए, नहीं तो आपको पश्चाताप ज्यादा करना पड़ेगा। जब कोई डाकू चीजें छीन ले जाता है, तो आदमी को ज्यादा अफसोस होता है, लेकिन अगर अपने हाथों से किसी भिखारी को दे देता है, स्कूल की इमारत बनाने के लिए दे देता है, तो उसको संतोष होता है। पैसा तो चला गया न, चाहे वह डाकू ले गया हो तो भी और चाहे स्कूल बनाने के लिए दे दिया तो भी। लेकिन अपने हाथ से देने पर संतोष रहता है। अतः आपको लोगों से यह कहने के लिए जाना है क अब युग बदल रहा है, समय बदला रहा है, युग की धाराएँ बदल रही हैं। धन के बारे में मूल्यांकन बदल रहा है। धन लोगों के पास रहने वाला नहीं है।
🔷 धन बहुत तेजी से चला जाने वाला है। आप देख नहीं रहे हैं क्या? गवर्नमेंट क्या-क्या कर रही है? मृत्यु टैक्स लगा रही है। संपत्ति टैक्स लगा रही है और दूसरे टैक्स लगा रही है। सब अगले दिनों जो गवर्नमेंट आने वाली है, अगले दिनों जो समय आने वाला है, उसमें रशिया वाला कानून लागू हो जाएगा, चाइना वाला कानून लागू हो जाएगा। हमको और आपको बस हाथ-पाँव से मेहनत करनी पड़ेगी, परिश्रम करना पड़ेगा और उस मेहनत के बदले में जो खुराक हमको मिलनी चाहिए, जो रोटी मिलनी चाहिए, वह मिल जाएगी। खुराक की सारी-की-सारी चीजें मिल जाएँगी।
🔶 साथियो! लोगों से कहना कि आपको भगवान् ने जो विभूतियाँ दी हैं, क्षमताएँ दी हैं, उसका सवाब आप उठा सकते हैं, लाभ उठा सकते हैं, जीवात्मा को शांति दे सकते हैं। जीवात्मा की शांति के लिए, पुण्य के लिए अपने आपको तैयार कर लेना चाहिए, ताकि आपका अंतःकरण शांति में रहे और समाज को भी आपके बदले का अनुदान मिले और हमारा सिर भी गर्व से ऊँचा उठ जाए। समय से पहले हम अंगद के तरीके से इसीलिए आपके पास आए हैं, ताकि यह बता सकें कि आपको वक्त रहते बदल जाना चाहिए और लाभ उठा लेना चाहिए।
.... क्रमशः जारी
✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य (अमृत वाणी)


















