🔶 आप अकेले चलें। हमारे गुरु अकेले चले हैं। हम अकेले चले हैं। आप भी अकेले चलिये। संगठन के फेर में मत पड़िये। आपको बोलना नहीं आता है। आप कहते हैं कि व्याख्यान सिखा दीजिये। आप हैं कौन? हमें बतलाइये। भाषण से क्या होगा? आप हमारी बात मानिये। आपको बोलना नहीं आता है तो हम क्या करें? आप पोस्टमैन का काम करिये। हम बोलना सिखा देंगे। लड़कियों को सिखा दिया था। महाराज जी हमें भी बोलना सिखा दीजिए। आप त्याग करके तो हमें बतलाइये। जवाहरलाल नेहरू एवं शास्त्री जी को गाँधी जी ने खादी बेचने को कहा था। वे घर-घर जाकर खादी बेचते थे। घर-घर धकेल गाड़ी लेकर जाते थे तथा लोगों से कहते थे कि आप खादी पहनिये तो क्या वे खादी बेचते थे? हाँ बेटे, खादी बेचते थे।
🔷 आप अपने आप को निचोड़िये। ये हमारा बेटा, यह हमारी पत्नी। देखना यही तुझे ऐसा मारेंगे कि तुझे याद रहेगा। हमारा बेटा, हमारी पत्नी-यही रटता रहेगा कि कुछ समाज के लिए, भगवान् के लिए भी करेगा। नहीं गुरुजी हम तो हनुमान चालीस पढ़ते हैं, गायत्री चालीसा पढ़ते हैं। अरे स्वार्थी कहीं का, तेरी तो अक्ल खराब हो गयी है। अहंकार बढ़ गया है। हमने आपमें से हर किसी को कहा है कि आप ब्राह्मण बनिये। नहीं गुरुजी, हमने तो चन्दा इकट्ठा कर लिया, तो हम क्या करेंगे इसका? आप आदमी तो बनें पहले। आप आदमी बनना सीखें। आप घटियापन छोड़िये, सुबह से शाम तक काम कीजिये। पात्रता बढ़ाइये।
🔶 ऋषियों ने अपने रक्त को एक घड़े में भरा था, जिससे सीताजी उत्पन्न हुई थीं। आपको भी संस्कृति की सीता की खोज करनी है। समाज के लिए, संस्कृति के लिए आप भी अपना समय, अपना पैसा निकालिये, अपना रक्त निकालिये। आप अपने आप को निचोड़िये तो सही। निचोड़ने के नाम पर अँगूठा दिखाते हैं, त्याग के नाम पर जीभ निकालते हैं। बकवास के नाम पर, घूमने के नाम पर बिना मतलब के आडम्बर बना रखे हैं। अपने आपको निचोड़िये। आप अपने को यदि निचोड़ेंगे तो फिर देख लेना आप क्या बन जाते हैं? हमने अपने आपको निचोड़ा तो देखिये क्या बन गये?
🌹 क्रमशः जारी
✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य (अमृतवाणी)
🔷 आप अपने आप को निचोड़िये। ये हमारा बेटा, यह हमारी पत्नी। देखना यही तुझे ऐसा मारेंगे कि तुझे याद रहेगा। हमारा बेटा, हमारी पत्नी-यही रटता रहेगा कि कुछ समाज के लिए, भगवान् के लिए भी करेगा। नहीं गुरुजी हम तो हनुमान चालीस पढ़ते हैं, गायत्री चालीसा पढ़ते हैं। अरे स्वार्थी कहीं का, तेरी तो अक्ल खराब हो गयी है। अहंकार बढ़ गया है। हमने आपमें से हर किसी को कहा है कि आप ब्राह्मण बनिये। नहीं गुरुजी, हमने तो चन्दा इकट्ठा कर लिया, तो हम क्या करेंगे इसका? आप आदमी तो बनें पहले। आप आदमी बनना सीखें। आप घटियापन छोड़िये, सुबह से शाम तक काम कीजिये। पात्रता बढ़ाइये।
🔶 ऋषियों ने अपने रक्त को एक घड़े में भरा था, जिससे सीताजी उत्पन्न हुई थीं। आपको भी संस्कृति की सीता की खोज करनी है। समाज के लिए, संस्कृति के लिए आप भी अपना समय, अपना पैसा निकालिये, अपना रक्त निकालिये। आप अपने आप को निचोड़िये तो सही। निचोड़ने के नाम पर अँगूठा दिखाते हैं, त्याग के नाम पर जीभ निकालते हैं। बकवास के नाम पर, घूमने के नाम पर बिना मतलब के आडम्बर बना रखे हैं। अपने आपको निचोड़िये। आप अपने को यदि निचोड़ेंगे तो फिर देख लेना आप क्या बन जाते हैं? हमने अपने आपको निचोड़ा तो देखिये क्या बन गये?
🌹 क्रमशः जारी
✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य (अमृतवाणी)
















