आओ हे श्रीराम आज फिर जन्म धरो,
जन्म धरो हे जन्म धरो,
आओ हे श्रीराम आज फिर जन्म धरो।
अयोध्या के आस तुम्ही हो, दशरथ के तो श्वास तुम्ही हो,
कौसल्या की सुनी गोद बुलाए, जन जन के विश्वास तुम्ही हो,
रघुकुल के नायक हे रघुवर, जीवों का दर्द हरो।
आओ हे श्रीराम आज फिर जन्म धरो,
आओ हे गुणधाम आज फिर जन्म धरो।
लखन सरीखा कौन अनुरागी, भरत बने कैसे फिर त्यागी,
शत्रुघ्न की तो बात ना पूछो, वो तो बन बैठा वैरागी,
अनुजों के करतार तुम्ही हो, आकर ज्येष्ठ बनो।
आओ हे श्रीराम आज फिर जन्म धरो,
आओ हे गुणधाम आज फिर जन्म धरो।
मात सुमित्रा तुम पर वारी, कैकेयी भी जाए बलिहारी,
दुनियां में और कौन है ऐसा, तेरी छवि है सबसे न्यारी,
मर्यादा पुरुषोत्तम आओ, नयनों को तृप्त करो,
आओ हे श्रीराम आज फिर जन्म धरो,
आओ हे गुणधाम आज फिर जन्म धरो।
मानवता फिर आज पुकारे, तुम बिन हमको कौन उबारे,
जग के पालनकर्ता तुम हो, पल पल हम तुमको ही निहारे,
प्राणिमात्र की विकल व्यथा है, आकर कष्ट हरो,
आओ हे श्रीराम आज फिर जन्म धरो, आओ हे गुणधा
जन्म धरो हे जन्म धरो,
आओ हे श्रीराम आज फिर जन्म धरो।
अयोध्या के आस तुम्ही हो, दशरथ के तो श्वास तुम्ही हो,
कौसल्या की सुनी गोद बुलाए, जन जन के विश्वास तुम्ही हो,
रघुकुल के नायक हे रघुवर, जीवों का दर्द हरो।
आओ हे श्रीराम आज फिर जन्म धरो,
आओ हे गुणधाम आज फिर जन्म धरो।
लखन सरीखा कौन अनुरागी, भरत बने कैसे फिर त्यागी,
शत्रुघ्न की तो बात ना पूछो, वो तो बन बैठा वैरागी,
अनुजों के करतार तुम्ही हो, आकर ज्येष्ठ बनो।
आओ हे श्रीराम आज फिर जन्म धरो,
आओ हे गुणधाम आज फिर जन्म धरो।
मात सुमित्रा तुम पर वारी, कैकेयी भी जाए बलिहारी,
दुनियां में और कौन है ऐसा, तेरी छवि है सबसे न्यारी,
मर्यादा पुरुषोत्तम आओ, नयनों को तृप्त करो,
आओ हे श्रीराम आज फिर जन्म धरो,
आओ हे गुणधाम आज फिर जन्म धरो।
मानवता फिर आज पुकारे, तुम बिन हमको कौन उबारे,
जग के पालनकर्ता तुम हो, पल पल हम तुमको ही निहारे,
प्राणिमात्र की विकल व्यथा है, आकर कष्ट हरो,
आओ हे श्रीराम आज फिर जन्म धरो, आओ हे गुणधा
- डॉ आरती कैवर्त 'रितु'






















