बुधवार, 29 नवंबर 2023

👉 साधना

साधना किसे कहते हैं आपको मालूम नहीं? आप हनुमान जी की पूजा करते हैं, सन्तोषी माता की पूजा करते हैं। यह मन्त्र है, न यन्त्र है, न पूजा है। आप हनुमान जी या सन्तोषी माता को साधते हैं। अरे पहले अपने आपको तो साधिये न, पर यह जो जादूगरी आप करते हैं, वह बदमाशी के सिवा कुछ नहीं है। अगर आप पूजा- उपासना करते हैं, तो ठीक, यह आपकी मर्जी है, पर यह न तो कोई मन्त्र जप है, न भजन है, यह मात्र धूर्तगीरी है। पूजा के नाम पर यदि आप ऐसी बदमाशी करते हैं तो आपकी मर्जी, पर इससे कुछ होने वाला नहीं है। पहले आप समर्पण करना सीखिये, यह मोटी- मोटी बातें थीं जो हमने किसी तरह से आपसे कह दीं।

हमारे गुरुजी की यही मर्जी है कि हम आपमें से- हर आदमी में से ब्राह्मण तथा सन्त को जिन्दा करें और हम यही चाहते हैं कि अगर हमारे अन्दर बल हो तथा आपके अन्दर ब्राह्मणत्व तथा साधु हो तो वह जिन्दा हो जाए। इस विदाई के अवसर पर यही कहकर हम आप लोगों को विदा कर रहे हैं। मित्रों, गुरुजी ने हमेशा दिया है, आगे भी देते रहेंगे, शर्त एक ही है कि आप अपनी ब्राह्मण तथा सन्त की प्रवृत्ति जिन्दा करें। आप जाइये एवं अपने- अपने कामों में जुट जाइये।

✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
📖 वाङमय- नं 68 पेज 1.13

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