�� हम बदलेंगे - युग बदलेगा, हम सुधरेंगे - युग सुधरेगा
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“मनुष्य कुछ भी नहीं है, वह एक चलता फिरता धूल-पिण्ड है, उसकी शक्तियाँ सीमित हैं। वह नियति के हाथ की कठपुतली है, भाग्य का खिलौना और हर समय काल...
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