👉 समर्पण का सुख

दीपक जल रहा था। घृत चुकने को आया। लौ क्षीण हो चली। वायु के झोंकों ने देखा अब दीपक पर विजय पाना आसान है तो वे वृन्द−वृन्द मिलकर तेज आक्रमण कर...