शुक्रवार, 24 नवंबर 2017

👉 दुनिया के सारे धर्म हैं, गायत्री मंत्र में

🔶 जो धर्म प्रेम, मानवता और भाईचारे का सन्देश देने के लिए बना था, आज उसी के नाम पर हिंसा और कटुता बढ़ाई जा रही है। इसलिये आज एक ऐसे विश्व धर्म की आवश्यकता महसूस की जा रही है, जो दिलों को जोडऩे वाला हो। हर धर्म में ऐसी बातें और प्रार्थनाये हैं, जो सभी धर्मों को रिप्रजेंट करती हैं। हिन्दुओं में गायत्री मन्त्र के रुप में ऐसी ही प्रार्थना है, जो हर धर्म का सार हैं।

🔷 हिन्दू – ईश्वर प्राणाधार, दु:खनाशक तथा सुख स्वरुप है । हम प्रेरक देव के उत्तम तेज का ध्यान करें। जो हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर बढ़ाने के लिए पवित्र प्रेरणा दें।

🔶 ईसाई – हे पिता! हमें परीक्षा में न डाल, परन्तु बुराई से बचा। क्योंकि राज्य, पराक्रम तथा महिमा सदा तेरी ही हैं।

🔷 इस्लाम – हे अल्लाह! हम तेरी ही वन्दना करते हैं और तुझी से सहायता चाहते हैं। हमें सीधा मार्ग दिखा, उन लोगों का मार्ग, जो तेरे कृपापात्र बने, न कि उनका, जो तेरे कोपभाजन बने तथा पथभ्रष्ट हुए।

🔶 सिख – ओंकार (ईश्वर) एक है। उसका नाम सत्य है, वह सृष्टिकर्ता, समर्थ पुरुष, निर्भय, निर्वैर, जन्मरहित तथा स्वयंभू है। वह गुरु की कृपा से जाना जाता है।

🔷 यहूदी – हे जेहोवा! (परमेश्वर) अपने धर्म के मार्ग में मेरा पथ-प्रदर्शन कर, मेरे आगे अपने सीधे मार्ग को दिखा।

🔶 शिंतो – हे परमेश्वर! हमारे नेत्र भले ही अभद्र वस्तु देखें। परन्तु हमारे हृदय में अभद्र भाव उत्पन्न न हो। हमारे कान चाहे अपवित्र बातें सुनें तो भी हमारे में अभद्र बातों का अनुभव न हो।

🔷 पारसी – वह परम् गुरु! (अहुरमज्द-परमेश्वर) अपने ऋत तथा सत्य के भण्डार के कारण, राजा के समान महान् है। ईश्वर के नाम पर किये गये परोपकारों से मनुष्य प्रभु प्रेम का पात्र बनता है।

🔶 दाओ! (ताओ) – "ब्रह्म" चिन्तन एवं पकड़ से परे है। केवल उसी के अनुसार आचरण ही उत्तम धर्म है।

🔷 जैन – अर्हन्तों को नमस्कार! सिद्धों को नमस्कार! आचार्यों को नमस्कार! उपाध्यायों को नमस्कार! और सब साधुओं को नमस्कार!

🔶 बौद्ध धर्म – मैं बुद्ध की शरण में हूँ! मैं धर्म की शरण में हूँ! मैं संघ की शरण में हूँ!

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