शुक्रवार, 24 नवंबर 2017

👉 युग-मनीषा जागे, तो क्रान्ति हो (अन्तिम भाग)

🔶 मित्रो! मैं कह रहा था दर्शन की बात। दर्शन जिसको जन्म देती है, वह है—मनीषा। मनीषा को हम ऋतम्भरा—प्रज्ञा कह सकते हैं। दूसरे शब्दों में हम इसे गायत्री कह सकते हैं। श्रेष्ठ चिन्तन करने वाले के समूह का नाम है मनीषा। इस मनीषा का हम आह्वान करते हैं, उसकी पूजा करते हैं। मनीषा माँ है। माँ क्या करती है? माँ बच्चे के लिए समय-समय पर जरूरत की चीजें बनाकर खिलाती है, उसे छाती का दूध पिलाती है? हजम कर सके, ऐसी खुराक बनाकर देती है माँ। मनीषा वह है जो युग की आवश्यकताओं, समय की आवश्यकताओं, इनसान की आवश्यकताओं की तलाशती रहती है, समझती है व वैसी ही खुराक दर्शन की देती है, जिसकी जरूरत है। युग की मनीषा ध्यान रखती है कि आज के समय की जरूरत क्या है? पुराने समय का वह ढोल नहीं बजाती।
              
🔷 वह युग को समझती है, देश को समझती है और परिस्थितियों के अनुरूप युग को ढालने की कोशिश करती है, आस्थाओं से रहित हैवानी के गुलाम इनसान को आदमी बनाती है, उसे ऊँचा उठना सिखाती है व उसके घरों में स्वर्गीय परिस्थितियाँ पैदा करती हैं। ऐसी ही मनीषा का मैं आह्वान करता हूँ व कहता हूँ कि आप में से जो भी यह सेव कर सकें, वह स्वयं को धन्य बना लेगा, अपना जीवन सार्थक कर लेगा। आज बुद्धिवाद ही चारों ओर छाया है। ‘नो गॉड, नो सोल’ की बात कहता जमाना दीखता है। ये किसकी बात है? नास्तिकों की, वैज्ञानिकों की, बुद्धिवादों की। इन्होंने फिजाँ बिगाड़ी है? नहीं इनसे ज्यादा उन धार्मिकों ने, पण्डितों ने, बाबाजियों ने बिगाड़ी है जो उपदेश तो धर्म का देते हैं पर जीवनक्रम में उनके कहीं धर्म का राई-रत्ती भी नहीं है।
 
🔶 पुजारी की खुराफात देवी को सुना दें तो देवी शर्मिन्दा हो जाए। धर्म को व विज्ञान को सबको ठीक करना होगा मित्रो! और वह काम करेगी मनीषा। कुम्भ नहाइए बैकुण्ठ को जाइए, यह कौन-सा धर्म है? ऐसे धर्म को बदलना होगा व विज्ञान द्वारा दिग्भ्रान्त की जा रही पीढ़ी को भी मनीषा को ही मार्गदर्शन देना होगा। आपको युग की जरूरतें पूरी करनी चाहिए। आदमी के भीतर की आस्थाएँ कमजोर हो गई हैं, उन्हें ठीक करना चाहिए। आज की भाषा में बात कीजिए व लोगों का समाधान कीजिए। विज्ञान की भाषा में, नीति की, धर्म की, सदाचार की, आस्था की बात कीजिए व सबका मार्गदर्शन करिए। बताइए सबको कि आदर्शों ने सदैव जीवन में उतारने के बाद फायदा ही पहुँचाया है, नुकसान किसी का नहीं किया।

🔷 अब्राहम लिंकन ने बीच मेज पर खड़ा करके कहा था यह स्टो है। इसने अमेरिका के माथे पर लगा कलंक हटा दिया। आप क्या करना चाहते हैं? हम भारतीय संस्कृति को मेज पर खड़ा करके यह कहना चाहते हैं कि यह वह संस्कृति है जिसने दुनिया का कायाकल्प कर दिया। आज भी यह पूरी तरह से मार्गदर्शन देने में सक्षम है। मनीषी इसने ही पैदा किए। यदि मनीषी जाग जाएँ तो देश, समाज, संस्कृति सारे विश्व का कल्याण होगा। भगवान् करे, मनीषा जगे, जागे, जगाए व जमाना बदले। हमारा यह संकल्प है वह हम इसे करेंगे। आपको जुड़ने के लिए आमन्त्रित करते हैं। आज की बात समाप्त।
ॐ शान्ति।

🌹  समाप्त
✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य (अमृतवाणी)

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