बुधवार, 15 अप्रैल 2020

👉 आत्मचिंतन के क्षण 15 April 2020

अपने माता-पिता गुरुजनों आदि के साथ उन पर एहसान चढ़ाने वाली भाषा न बोलें।

जीवन में अनेक बार व्यक्तियों का आपस में टकराव हो जाता है। माता-पिता के साथ, गुरुजनों के साथ, मित्रों के साथ, पड़ोसियों के साथ, व्यापारियों और ग्राहकों के साथ इत्यादि , अनेक जगह पर टकराव हो जाता है। कभी-कभी यह टकराव, गलतियों के कारण होता है, और कभी-कभी एक दूसरे के व्यवहार को ठीक तरह से न समझने के कारण, भ्रांतियों से भी ऐसा टकराव हो जाता है।

यह टकराव हो जाना कोई आश्चर्य की बात नहीं है, स्वाभाविक है। क्योंकि सभी लोग अल्पज्ञ और अल्पशक्तिमान् हैं। अल्पज्ञ और अल्पशक्तिमान होने के कारण अनेक बार भूल चूक हो जाती है। गलतियां हो जाती हैं। किसी भी व्यक्ति से हो सकती हैं। केवल परमात्मा ही एक ऐसा तत्व है जो कभी गलती नहीं करता. उसे छोड़ कर सभी से कुछ न कुछ छोटी बड़ी गलतियां हो जाती हैं।

जब कभी ऐसी गलतियां हो जाएं, तो आपस में लड़ाई झगड़ा आरोप प्रत्यारोप इत्यादि का व्यवहार नहीं करना चाहिए। विशेष रूप से अपने माता-पिता और गुरुजनों के साथ तो ऐसा झगड़ा कभी भी नहीं करना चाहिए।

चाहे आप प्रधानमंत्री पद पर भी क्यों न पहुंच जाएं, तब भी आप अपने माता-पिता के सामने तो छोटे ही रहेंगे। क्योंकि आपको उनके ही आशीर्वाद से सेवा से प्रशिक्षण से अनेक प्रकार के सहयोग से ऊंची ऊंची योग्यताएं प्राप्त हुई हैं। इसलिए उनके साथ सदा नम्रता का व्यवहार रखना चाहिए। जैसा कि आजकल हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री जी अपनी माता जी के चरण स्पर्श करते और उनका आशीर्वाद लेकर आगे बढ़ रहे हैं। यह बात सबको मालूम है.

जब हम सब अल्पज्ञ हैं, गलतियाँ होनी संभव हैं, तो बड़ी नम्रता से अपनी गलतियाँ स्वीकार कर लेनी चाहिएँ,  और समस्याओं को निपटा देना चाहिए। बड़े बुजुर्गों के साथ असभ्यतापूर्ण या एहसान चढ़ाने वाली भाषा न बोलें, कि मैंने आपके लिए यह काम किया, वह काम किया, और आपने मेरे साथ यह किया, यह ठीक नहीं किया इत्यादि। बड़ों के साथ ऐसा व्यवहार करना असभ्यता है। इस प्रकार की असभ्यता नहीं करनी चाहिए।

इसलिए कभी माता पिता या गुरुजनों के साथ टकराव हो भी जाए, तो उनके उपकारों को याद रखें, और उनके साथ नम्रता पूर्वक ही व्यवहार करें। गलतियाँ हो जाने पर आपस में मिल बैठकर शांति से उन्हें सुलझा लेना चाहिए। यदि आपस में न सुलझे, तो किसी अन्य बुद्धिमान परिवार के अनुभवी बुजुर्ग अथवा किसी विद्वान की सहायता से उस समस्या को सुलझा लेना चाहिए। इससे आपका परिवार संगठित व्यवस्थित सुखी और संपन्न बना रहेगा । अन्यथा आपका परिवार कुछ ही समय में आपसी भ्रांतियों के कारण नष्ट हो जाएगा

कोई टिप्पणी नहीं:

👉 जीवन लक्ष्य और उसकी प्राप्ति भाग ३

👉 *जीवन का लक्ष्य भी निर्धारित करें * 🔹 जीवन-यापन और जीवन-लक्ष्य दो भिन्न बातें हैं। प्रायः सामान्य लोगों का लक्ष्य जीवन यापन ही रहता है। ...