सोमवार, 26 मार्च 2018

👉 आत्मावलोकन का सरल उपाय—एकान्तवास (भाग 6)

🔶 आप यहाँ रहिए, हम आपको पका देते हैं। आप आये थे, तब कच्चे बर्तन के रूप में थे और आप जब जाना तब हमारे अवे में पके हुए होकर जाना। मुर्गी अपने बच्चे को छाती से लगाये हुए बैठी रहती है, कछुवी अपने अण्डे को बालू में रख देती है; लेकिन देख−भाल करती रहती है। हम आपको कछुए के अण्डे की तरह कोठरी में बिठा तो गये हैं; पर आप यह मत सोचिए कि हम आपकी तरफ गौर नहीं करते और ध्यान नहीं देते। हम बराबर आपकी तरफ ध्यान दे रहे हैं। किस बात पर ध्यान दे रहे हैं? कि आपका मनःसंस्थान ऊँचा हो जाए, आपकी भावनाओं का स्तर ऊँचा हो जाए, आपके जीवन का लक्ष्य ऊँचा हो जाए, जिससे आपके व्यक्तित्व की गरिमा आगे बढ़ती हुई चली जाए।

🔷 हम केवल यही विचार करते हैं और कुछ विचार नहीं करते—आप सुन सकते हो, तो सुन लेना; नहीं सुन सकते, तो आप फिर हैं ही चिकने घड़ों की तरह; वैसे ही बने रहना, जैसे आए थे, वैसे ही चले जाना। मुर्गी अपने अण्डे को पकाने के लिए छाती से लगाये बैठी रहती है और आपको भी हम मुर्गी की तरह छाती से लगाये हुए हैं कि जब आप पकें, जब आप फूटें और जब आप फुदकना शुरू करें, चूजे की तरह, तो आपका बहुत शानदार जीवन होगा—हमारी भी महत्त्वाकांक्षा यही है। आप भी अपनी महत्त्वाकांक्षाओं को हमारी तरह गला पाएँ, तो मजा आ जाए! यहाँ क्या-क्या काम कराये जाते हैं? कई चीजें कराई जाती हैं—संयम करा रहे हैं, वास्तविक बात यह है।

🔶 आपको हमने कितनी बार कहा है कि आप आहार के बारे में संयम कीजिए और न सिर्फ आहार के बारे में, बल्कि विचारों के भी बारे में और न सिर्फ विचारों के बारे में, बल्कि उनके व्यवहार के बारे में भी। आपसे चार तपों का जिक्र किया था न, आपको चार तप यहाँ बराबर करते रहने चाहिए। धन के बारे में रोक है—आपको बाजार जाने की, इधर-उधर घूमने की, सैर-सपाटे करने की, मनसादेवी के पहाड़ पर चढ़ने की। पैसा खराब करने पर हमने रोक लगा दी है। जो पैसा आपको, निरन्तर जीवन के लिए नितान्त आवश्यक नहीं है, उसको खर्च मत कीजिए। कंजूसी करें, जमा करें। ना बाबा! कंजूसी के लिए कौन कहता है आपसे? अच्छे काम के लिए कोई खर्च नहीं है क्या? आप फिजूलखर्च जरा भी मत कीजिए और जो कुछ भी आपके पास धन है, उसको लगा दीजिए अच्छे कामों में।

.... क्रमशः जारी
✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य (अमृत वाणी)

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