गुरुवार, 15 मार्च 2018

👉 प्रायश्चित क्यों? कैसे? (भाग 5)

🔷 आप समझ गए न, उनकी इच्छा कब और कैसे पूरी हुई? आप यह बात नोट कीजिए, आपको पिछले वाले पापों से निजात पाने के लिए कुछ-न करना ही होगा। क्या करना चाहिए? इस ओर ध्यान दीजिए। भविष्य के निर्माण की ओर ध्यान दें, यह तो बहुत अच्छी बात है, पर भूतकाल को भुला मत दीजिए। आप यह विचार कीजिए कि आपने कितनी गलतियाँ की, उनकी एक बार लिस्ट बना लीजिए। गलतियाँ दो तरह की होती हैं—एक गलतियाँ वह, जो आपने दूसरों को नुकसान पहुँचाने के लिए की हैं और एक गलतियाँ वह, जो आपने अपनी उन्नति में रुकावट डाल करके आलस्य और प्रमाद के रूप में की हैं। इन दोनों गलतियों को आप नोट कर लीजिए और एक फेहरिस्त बना लीजिए।

🔶 आप नोट कर लेंगे और फेहरिस्त बन लेंगे, तो पता चलेगा कि कितना बड़ा जखीरा अपनी बुराइयों का, अपने ही सिर पर लाद के रखा है, इसको दूर करने के की कोशिश कीजिए। क्या कोशिश करें? यही तो एक विकल्प है। एक काम यह कीजिए कि अपना जी खोल करके अपने मन की गाँठ को हल्का कर लीजिए, जैसा कोई चीज खा जाते हैं, गन्दी चीज खा जाते हैं, तो उलटी कराई जाती है। आप मुँह के रास्ते उलटी कर दीजिए। आपने जो कुछ भी पाप-कर्म किये हैं, उन सबको एक बार जी खोल के कह दीजिए। किससे कहें? दूसरों के सामने तो मैं आपको सलाह नहीं दे सकता कि आप हर एक के सामने कहते फिरें, क्योंकि दूसरे आदमी इसका गलत फायदा उठाते हैं, नाजायज फायदा उठाते हैं।

🔷 हमको हजारों घटनाएँ याद हैं। स्त्रियों से उनके पतियों ने कसम खिलाकर उगलवा लिया कि उनसे क्या गलती हो गई, फिर जिन्दगी भर के लिए उनकी एसी फजीहत की कि वह बेचारी सोचती रहीं कि सच्चाई अगर हम न बताते, तो नफे में रहते। दुनिया बड़ी निकम्मी है, दुनिया बड़ी पाजी है। आप हर आदमी से अपनी कमजोरियाँ कहते फिरें, ऐसा तो मैं नहीं कहूँगा, लेकिन आपको मेरी एक सलाह है कि एक बार अपना जी खोलकर हमसे सब कुछ कह दीजिए। अपनी हर घटना को बता दीजिए, विस्तार से बता दीजिए, कहीं दुराव न हो, कहीं छुपाव न हो। आप क्या करेंगे? अरे भाई साहब! हमें क्या करना है? हर आदमी गलतियों से भरा पड़ा है।

🔶 आपकी गलतियों में मुझे जायका लेने का, मजा लेने का, दिल्लगीबाजी करने का और बकवास करने का हमारे पास कहाँ समय है? हमारे यहाँ तो केवल दुःखी-ही आते हैं। धोबी की दुकान है। हर आदमी मैला कपड़ा ले करके आता है और हम धोते रहते हैं। हमको न किसी से व्यंग्य करने की फुर्सत है, न मजाक करने की फुर्सत है, न घृणा करने की फुर्सत है, केवल धोबी के तरीके से लोगों के कपड़े धोने की फुर्सत है, इसलिए आपको अपने मन के पापों को एक बार ठीक कर लेना चाहिए।

.... क्रमशः जारी
✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य (अमृत वाणी)

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