गुरुवार, 23 नवंबर 2017

👉 आत्मचिंतन के क्षण 23 Nov 2017

🔶 गलती करना बुरा नहीं है; बल्कि गलती को न सुधारना बुरा है। संसार के महान् पुरुषों ने अनेक प्रकार की गलतियाँ की हैं। रावण जैसा विद्वान् अपने दुष्कृत्यों से राक्षस जैसा बन गया। वाल्मीकि डकैत रहे हैं। सुर, तुलसी, कबीर, मीरा, रसखान आदि सांसारिक जीवन में गलती करते रहे थे, लेकिन इन्होंने गलती को सुधारा और आगे बढ़कर महापुरुष बने। स्मरण रखिए कि एक गलती को सुधारकर आप किसी न किसी क्षेत्र में आगे बढ़ जाते हैं।    

🔷 तू सूर्य और चन्द्र को अपने पास नहीं उतार सका इसका कारण उनकी दूरी नहीं, तेरी दूरी की भावना है। तू संसार को बदल नहीं पाया इसका कारण संसार की अपरिवर्तनशीलता नहीं, वरन् तेरे प्रयासों की शिथिलता है। जब तू यह कहता है कि मैं अपने में परिवर्तन नहीं कर सकता, तो इसे स्थिति और विवशता कहकर न टाल, साफ-साफ अपनी कायरता और अकर्मण्यता कह; क्योंकि इच्छा की प्रबलता ही कार्य की सिद्धि है।

🔶 शान्तिकुञ्ज अनौचित्य की नींव हिला देने वाला एक क्रान्तिकारी विश्वविद्यालय है। यहाँ से इक्कीसवीं सदी का विशालकाय आन्दोलन प्रकट होकर ऐसा चमत्कार करेगा कि उसके आँचल में भारत ही नहीं समूचे विश्व को आश्रय मिलेगा।

🔷 आत्मा का यथार्थ ज्ञान संपादन करना प्रत्येक मनुष्य का आवश्यक कर्तव्य है। आत्मा अत्यन्त सूक्ष्म, अचल, शुद्ध और सच्चिदानन्द रूप है। जो मनुष्य यथार्थ ज्ञान दृष्टि से आत्मा को नहीं जानता, किन्तु भ्रम व अज्ञानवश होकर उसको कर्ता, भोक्ता, सुखी, दुखी, स्थूल, कृश, अमुक का पिता, अमुक का पुत्र, अमुक की स्त्री, ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र इत्यादि भिन्न भिन्न प्रकार का समझना है, वह बड़ा अपराधी है।

✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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