बुधवार, 27 सितंबर 2017

👉 हमारा लक्ष्य

🔴 एक बार की बात है एक नगर के राजा ने यह घोषणा करवा दी कि कल जब मेरे महल का मुख्य दरवाज़ा खोला जायेगा तब जिस व्यक्ति ने जिस वस्तु को हाथ लगा दिया वह वस्तु उसकी हो जाएगी! इस घोषणा को सुनकर सभी नगरवासी रात को ही नगर के दरवाज़े पर बैठ गए और सुबह होने का इंतजार करने लगे! सब लोग आपस में बातचीत करने लगे कि मैं अमुक वस्तु को हाथ लगाऊंगा! कुछ लोग कहने लगे मैं तो स्वर्ण को हाथ लगाऊंगा, कुछ लोग कहने लगे कि मैं कीमती जेवरात को हाथ लगाऊंगा, कुछ लोग घोड़ों के शौक़ीन थे और कहने लगे कि मैं तो घोड़ों को हाथ लगाऊंगा, कुछ लोग हाथीयों को हाथ लगाने की बात कर रहे थे, कुछ लोग कह रहे थे कि मैं दुधारू गौओं को हाथ लगाऊंगा, कुछ लोग कह रहे थे कि राजा की रानियाँ बहुत सुन्दर है मैं राजा की रानीयों को हाथ लगाऊंगा, कुछ लोग राजकुमारी को हाथ लगाने की बात कर रहे थे! कल्पना कीजिये कैसा अद्भुत दृश्य होगा वह!!
                 
🔵 उसी वक्त महल का मुख्य दरवाजा खुला और सब लोग अपनी अपनी मनपसंद वस्तु को हाथ लगाने दौड़े! सबको इस बात की जल्दी थी कि पहले मैं अपनी मनपसंद वस्तु को हाथ लगा दूँ ताकि वह वस्तु हमेशा के लिए मेरी हो जाएँ और सबके मन में यह डर भी था कि कहीं मुझ से पहले कोई दूसरा मेरी मनपसंद वस्तु को हाथ ना लगा दे!

🔴 राजा अपने सिंघासन पर बैठा सबको देख रहा था और अपने आस-पास हो रही भाग दौड़ को देखकर मुस्कुरा रहा था! कोई किसी वस्तु को हाथ लगा रहा था और कोई किसी वस्तु को हाथ लगा रहा था! उसी समय उस भीड़ में से एक छोटी सी लड़की आई और राजा की तरफ बढ़ने लगी! राजा उस लड़की को देखकर सोच में पड़ गया और फिर विचार करने लगा कि यह लड़की बहुत छोटी है शायद यह मुझसे कुछ पूछने आ रही है! वह लड़की धीरे धीरे चलती हुई राजा के पास पहुंची और उसने अपने नन्हे हाथों से राजा को हाथ लगा दिया! राजा को हाथ लगाते ही राजा उस लड़की का हो गया और राजा की प्रत्येक वस्तु भी उस लड़की की हो गयी!

🔵 जिस प्रकार उन लोगों को राजा ने मौका दिया था और उन लोगों ने गलती की ठीक उसी प्रकार ईश्वर भी हमे हर रोज मौका देता है और हम हर रोज गलती करते है! हम ईश्वर को हाथ लगाने अथवा पाने की बजाएँ ईश्वर की बनाई हुई संसारी वस्तुओं की कामना करते है और उन्हें प्राप्त करने के लिए ही यत्न करते है पर हम कभी इस बात पर विचार नहीं करते कि यदि ईश्वर हमारे हो गए तो उनकी बनाई हुई प्रत्येक वस्तु भी हमारी हो जाएगी !

🔴 ईश्वर बिलकुल माँ की तरह ही है, जिस प्रकार माँ अपने बच्चे को गोदी में उठाकर रखती है कभी अपने से अलग नहीं होने देती ईश्वर भी हमारे साथ कुछ ऐसा ही खेल खेलते है! जब कोई बच्चा अपनी माँ को छोड़कर अन्य खिलौनों के साथ खेलना शुरू कर देता है तो माँ उसे उन खिलौनों के खेल में लगाकर अन्य कामों में लग जाती है ठीक इसी प्रकार जब हम ईश्वर को भूलकर ईश्वर की बनाई हुई वस्तुओं के साथ खेलना शुरू कर देते है तो ईश्वर भी हमे उस माया में उलझाकर हमसे दूर चले जाते है पर कुछ बुद्धिमान मनुष्य ईश्वर की माया में ना उलझकर ईश्वर में ही रमण करते है और उस परम तत्व में मिल जाते है फिर उनमें और ईश्वर में कोई भेद नहीं रहता! इसी बात को गुरु ग्रन्थ साहिब में इन शब्दों में कहा गया है–

"जाके वश खान सुलतान, ताके वश में सगल जहान"

अर्थ – जिसके वश में ईश्वर होते है, उसके वश में सारी दुनिया होती है ।

6 टिप्‍पणियां:

Pankaj ने कहा…

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kunal patidar ने कहा…

यह बात सत्य है कि हम ईश्वर को पाने की अपेक्षा भौतिक वस्तुओं की और आकर्षित होते है। परंतु आज के युग मे जबकि सभी कार्यो के लिए, सभी वस्तुओ के के लिए आपको धन की आवश्यकता होती है, ईश्वर प्राप्ति आसान है?
यदि सभी ईश्वर प्राप्ति के के लिये लगेंगे तो संसार का संतुलन नही बिगड़ेगा ?

Naresh Jaiswal ने कहा…

Inspiring

Arun Trikha ने कहा…

We never understand the existance of God.The day we recognise HIM we forget everything.

gaurav arya ने कहा…

Don't worry God ko pane ke liye khi Jane ki ya apna kaam chodke kuch or special krne ki jrurat nhi h he stay inside you so keep calm with joy and remember him always in your life.

एक साधक ने कहा…

सारे देवता पृथ्वी का चक्कर लगाने गये, अर्थात संसार से अपने लिए उपलब्धियां खोजने गये। परन्तु श्री गणेश जी की प्रज्ञा जागी उन्होमने सोचा संसार की दौड़ लगाने से अच्छा कि उसकी कारण सत्ता का ही चक्कर लगा लेते हैं, अर्थात उन्हे ही अपने जीवन लक्ष्य का केन्द्र बना लेते हैं। श्री गणेश जी अपने इसी तत्वबोध के कारण सबसे श्रेष्ठ सिद्ध हो गए।

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