🔶 एक हमारा प्याऊ है जो कभी सूखेगा नहीं। जो पसीने से लथपथ हो गये हैं, थक गये हैं, हमारे प्याऊ पानी, हमारी तपस्या में से उनको देते रहेंगे, उन्हें हरा-भरा बनाये रखेंगे। आप सब लोग हमारे प्याऊ से पानी पी सकते हैं। ब्राह्मण, सन्त का जीवन चलता रहेगा। हम प्याऊ बन्द नहीं कर सकते हैं। हमने एक चिकित्सालय-डिस्पेन्सरी खोला है। जो भी दुःखी हमारे पास आये, हमने उसे छाती से लगाया। उसकी बीमारी का, दुःख का बराबर ख्याल रखा है। सन्त का काम भाव-संवेदना का है। हमें अपने बच्चे को खिलाना है, बच्चों की देख−भाल करनी है, बच्चों को गुब्बारा बाँटना है, बच्चों के चेहरे पर मुसकराहट देखनी है। ये चीजें देखकर हमको खुशी होती है। हम बच्चों के स्कूल चलाते हैं। इसका मतलब क्या है? हमारा अस्पताल चलता है, डिस्पेन्सरी चलती है। प्याऊ चलाने से क्या मतलब है? यह आध्यात्मिक बात है। यह सन्त की बातें हैं। तो क्या आप सन्त की दुकान बन्द कर देंगे? नहीं, बन्द नहीं करेंगे, जब तक हम जिन्दा हैं। आगे भी चलता रहेगा।
🔷 आप लोगों को हमने कई बार कहा है, हजार बार कहा है कि आपकी जो समस्याएँ हैं, उसे आप लिखकर देवें। आप आधा घण्टे भी भगवान का नाम नहीं ले सकते हैं। आप कहते हैं कि हम आपके रास्ते पर चल सकते हैं। बेकार की बातें मत कीजिये। तराजू हमारे पास है। हम जानते हैं, हमारा भगवान जानता है कि आप क्या हैं? इसलिए हमने इस बार यह कहना शुरू कर दिया है कि आप हमारा समय नष्ट करने के बजाय लिखकर दे जाइये।
🔶 आप यहाँ न ध्यान करने आते हैं, न पूजा करने आते हैं, न मतलब की बात करने आते हैं, केवल घूमने आते हैं, किराया खर्च करते हैं। आप हमें बेअकल समझते हैं। हम आपकी नस-नस जानते हैं। इसलिए हमने बैखरी वाणी से बोलना बन्द कर दिया है। हमारे गुरु हम से बैखरी वाणी से नहीं बोलते, पश्यन्ति वाणी से बोलते हैं, परावाणी से बोलते हैं। आपकी बातों को हमने सुन लिया है और कहा है कि बेकार की रामकहानी कहकर हमारा समय क्यों खराब करते हैं? हमें राम कहानी से क्या मतलब है, आप मतलब की बात कहिये।
🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य (अमृतवाणी)
🔷 आप लोगों को हमने कई बार कहा है, हजार बार कहा है कि आपकी जो समस्याएँ हैं, उसे आप लिखकर देवें। आप आधा घण्टे भी भगवान का नाम नहीं ले सकते हैं। आप कहते हैं कि हम आपके रास्ते पर चल सकते हैं। बेकार की बातें मत कीजिये। तराजू हमारे पास है। हम जानते हैं, हमारा भगवान जानता है कि आप क्या हैं? इसलिए हमने इस बार यह कहना शुरू कर दिया है कि आप हमारा समय नष्ट करने के बजाय लिखकर दे जाइये।
🔶 आप यहाँ न ध्यान करने आते हैं, न पूजा करने आते हैं, न मतलब की बात करने आते हैं, केवल घूमने आते हैं, किराया खर्च करते हैं। आप हमें बेअकल समझते हैं। हम आपकी नस-नस जानते हैं। इसलिए हमने बैखरी वाणी से बोलना बन्द कर दिया है। हमारे गुरु हम से बैखरी वाणी से नहीं बोलते, पश्यन्ति वाणी से बोलते हैं, परावाणी से बोलते हैं। आपकी बातों को हमने सुन लिया है और कहा है कि बेकार की रामकहानी कहकर हमारा समय क्यों खराब करते हैं? हमें राम कहानी से क्या मतलब है, आप मतलब की बात कहिये।
🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य (अमृतवाणी)













































