बुधवार, 8 जुलाई 2020

👉 सबका प्रिय बनना है तो...

क्रोध तो दूध का एक उबाल है। जब तक आग रहेगी जब तक दूध उबलेगा लेकिन जब आग ठंडी पड़ जाएगी तो दूध भी बैठ जाएगा। अपेक्षा की उपेक्षा क्रोध है। आप किसी से अपेक्षा रखते हैं और जब उसकी उपेक्षा होती है तो क्रोध आता है। अपेक्षा ही मत रखिए तो फिर आपको कोई भी आपको क्रोध नहीं दिला सकता।

क्रोध जहर है तो क्षमा अमृत है। क्षमा आदत में हो और क्षमा की आदत हो तो जीवन में खुशियां ही खुशियां है । अगर आदमी दिमाग की गर्मी हटाए और जुबान में नरमी लाए तो परिवार में बल्ले-बल्ले हो जाए। मनुष्य समाज में जीता है। सबके साथ सबके बीच में रहता है। अगर उसे सभी का प्रिय बनना है तो वह नम्र बने, बड़ों के सामने झुकना सीखे, अहंकार के हिमालय से उतर कर विनम्रता की कार में सवारी करना सीखे। हर टक्कर अंतत लौटकर उस पर ही हमला करती है। अत: गलती होने पर परस्पर में क्षमा याचना करते चलें।

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