मंगलवार, 3 मार्च 2020

👉 श्वास

श्वास की डोर से जीवन की माला गुँथी है। जिन्दगी का हर फूल इससे जुड़ा और इसी में पिरोया है। श्वासों की लय और लहरें इन्हें मुस्कराहटें देती हैं। इनमें व्यतिरेक, व्यवधान, बाधाएँ-विरोध और गतिरोध होने लगे तो सब कुछ अनायास ही मुरझाने और मरने लगता है। शरीर हो या मन दोनों ही श्वासों की लय से लयबद्ध होते हैं। इसकी लहरें ही इन्हें सींचती हैं, जीवन देती हैं। यहाँ तक कि सर्वथा मुक्त एवं सर्वव्यापी आत्मा का प्रकाश भी श्वासों की डोर के सहारे ही जीवन में उतरता है।
  
श्वासों की लय बदलते ही जीवन के रंग-रूप अनायास ही बदलने लगते हैं। क्रोध, घृणा, करुणा, वैर, राग-रोष, ईर्ष्या-अनुराग प्रकारान्तर से श्वास की लय की भिन्न-भिन्न अवस्थाएँ ही हैं। यह बात कहने-सुनने की नहीं, अनुभव करने की है। यदि महीने भर की सभी भाव दशाओं एवं अवस्थाओं का चार्ट बनाया जाय तो जरूर पता चल जाएगा कि श्वास की कौन सी लय हमें शान्ति व विश्रान्ति देती है? किस लय में मौन और शान्त, सुव्यवस्थित होने का अनुभव होता है? किस लय के साथ अनायास ही जीवन में आनन्द घुलने लगता है? ध्यान और समाधि भी श्वासों की लय की परिवर्तनशीलता ही है।
  
श्वास की गति वलय को जागरूक हो परिवर्तित करने की कला ही तो प्राणायाम है। यह मानव द्वारा की गयी अब तक की सभी खोजों में महानतम है। यहाँ तक कि चाँद और मंगल ग्रह पर मनुष्य के पहुँच जाने से भी महान्। क्योंकि शरीर से मनुष्य कहीं भी जा पहुँचे, वह जस का तस रहता है। परन्तु श्वास की लय के परिवर्तन से तो उसका जीवन ही बदल जाता है। हालांकि यह लय परिवर्तन होना चाहिए आन्तरिक होशपूर्वक, जो प्राणायाम की किसी बँधी-बँधायी विधि द्वारा सम्भव नहीं है। यदि विधि ही खोजनी हो, तो प्रत्येक श्वास के साथ होशपूर्वक रहना होगा। और साथ ही श्वास-श्वास के साथ भगवन्नाम के जप का अभ्यास करना होगा। ऐसा हो तो श्वासों की लय के साथ जीवन की लय बदल जाती है।

✍🏻 डॉ. प्रणव पण्ड्या
📖 जीवन पथ के प्रदीप से पृष्ठ १९९

2 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

Abhutpurva or naveen

Completely Freedom ने कहा…

जी .अपने बहोत ही अच्छे से व्यक्त किया. पर आजकल लोगो के पास कहा छोटी-छोटी बाते और क्रियाएं करने का समय है। बस अपने-अपने जीवन में भागे जा रहे जबकि सिर्फ एक बार ही इसको क्रिया में लेकर इसकी अनुभूति करे तो उनके जीवन की प्राथमिकताएं बदल जाए। और ऐसी है हमारी सब योगिक क्रियाएं और यही है सच्ची आध्यात्मिकता काश थोड़े बहोत लोग जो जानते है, वो इस आध्यात्मिकता शब्द को धर्मो से अलग करदे तो ही आध्यात्मिकता उसका ऊँचे से ऊँचा सिखर प्राप्त कर सकती है और सही में मनुष्यो का उद्धार हो सकता है 🙏🏼

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