रविवार, 29 मार्च 2020

👉 बासन्ती रंग व उमंग

वसन्त में रंग व उमंग है। ये बासन्ती रंग व उमंग सदा ही भारतीय संस्कृति व संस्कारों से सराबोर हैं। बासन्ती बयार में ये घुले-मिले हैं। ये रंग हैं पवित्रता के, उमंग हैं प्रखरता की। इन रंगों में भगवान् का भावभरा स्मरण छलकता है, तो उमंग में सद्गुरु के प्रति समर्पण की झलक झिलमिलाती है। इस बासन्ती रंग में श्रद्धा के सजल आँसुओं के साथ इसकी उमंग में प्रज्ञा का प्रखर तेज है। इन रंगों में निष्ठा की अनूठी चमक के साथ इसकी उमंगों में अटूट नैतिकता सदा छायी रहती है।
  
वसन्त के ये रंग यदि विवेक का प्रकाश अपने में समेटे हैं, तो इसकी उमंगों में वैराग्य की प्रभा है। वसन्त के इन रंगों की अद्भुत छटा में त्याग की पुकार है और इसकी उमंगों में बलिदानी शौर्य की महाऊर्जा है। वसन्त के इन्हीं रंगों व उमंगों ने हमेशा ही भारतीय संस्कृति को संजीवनी व संस्कारों को नवजीवन दिया है। इन बासन्ती रंगों व उमंगों को अपने में धारण करके भारत माता की सुपुत्रियों व सपूतों ने हँसते-हँसते स्वयं को बलिदान करके सद्ज्ञान व सन्मार्ग को प्रकाशित किया है।
  
यदि कभी काल के कुटिल कुचक्र के कारण बासन्ती रंग व उमंग फीके पड़े हैं, तो इसी के साथ भारत की संस्कृति व संस्कारों की छवि भी धूमिल हुई है। जब कभी किसी ने बासन्ती रंग व उमंग को प्रकाशित व ऊर्जावान् करने का सत्प्रयास किए तो उसी के साथ भारत की संस्कृति व संस्कार भी अपने आप समुज्ज्वल हो गए। युगऋषि परम पूज्य गुरुदेव पं० श्रीराम शर्मा आचार्य ने भी इसी प्रक्रिया को अपनाकर युग परिवर्तन की बासन्ती बयार प्रवाहित की। उनके द्वारा प्रेरित व प्रवाहित परिवर्तन की बयार में बासन्ती रंगों का अनूठा उनका प्यार है, तो साथ हैं बासन्ती उमंगों के तपपुञ्ज अंगार भी। जो उन्हीं के इस जन्मशताब्दी वर्ष में नव वसन्त का सन्देश सुना रहे हैं।

✍🏻 डॉ. प्रणव पण्ड्या
📖 जीवन पथ के प्रदीप से पृष्ठ २१०

5 टिप्‍पणियां:

बबलू कुमार ने कहा…

आदरणीय ब्लॉग लेखक महोदय,यह अशोभनीय ही है कि आज के पोस्ट में गुरूदेव द्वारा लिखित वाक्य से पहले डा साहब का वाक्य पढने को मिला है अतः इस मानवीय भूलों में सुधार करना अनिवार्य है ।

बबलू कुमार ने कहा…

आदरणीय ब्लॉग लेखक महोदय, यह अशोभनीय ही है कि आज के पोस्ट में गुरूदेव द्वारा लिखित वाक्य से पहले डा साहब का वाक्य पढने को मिला है अतः इस मानवीय भूलों में सुधार करना अनिवार्य जान पडता है।

उम्मेदसिंह नरावत ने कहा…

गुरूवर की जन्मशताब्दी पर शत शत नमन.
मेरे जीवन में यह 77 वां बसंत है.जब से होश संभाला है बसंत बहार के रंग सदा फीके ही रहे हैं|प्रार्थना है कि बसंती रंगों की इस बहार का रुख मेरे जीवन की ओर भी मोड़ दो|
जय श्री गुरु देव!!

उम्मेदसिंह नरावत ने कहा…

जन्मशताब्दी वर्ष पर शत शत नमन.

Arvind singh Bhadoria ने कहा…

40 दिन के अनुष्ठान का आवाहन शांतिकुन्ज ने किया, संकल्प कराया बहुत आनंद आया सफलता पूर्वक उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ, मेरा अनुरोध है कि पुरश्चरण का भी संकल्प करायें जिससे उसमें किसी प्रकार की त्रुटि न हो एवं शांतिकुन्ज का , गंरुवर का संरक्षण प्राप्त हो सके। निर्धारित समय सीमा में पूरा हो सके, नवदुर्गा के साथ में पुरश्चरण का भी संकल्प लिया है कृपया संरक्षण प्रदान करें। 2000-2001 से यह सिलसिला चल रहा है। गुरुदेव के वांगमय में मैने पढा था कि एक पुरश्चरण करके तो देखो, किसी गलती की चिन्ता मत करो, मैं सम्भाल लूगा। ओर मैने जो शुरुआत की आज तक नही रुकी क्या गलत है क्या सही ये गुरुदेव पर छोड दिया है।

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