रविवार, 26 जनवरी 2020

👉 वासन्ती हूक, उमंग और उल्लास यदि आ जाए जीवन में (भाग ४)

कुण्डलिनी क्या होती है? कुण्डलिनी हम करुणा को कहते हैं, विवेकशीलता को कहते हैं। करुणा उसे कहते हैं जिसमें दूसरों के दुःख-दर्द को देखकर के आदमी रो पड़ता है। विवेक यह कहता है कि फैसला करने के लिए हमको ऊँचा आदमी होना चाहिए जैसे कि जापान का गाँधी कागावा हुआ। उसने अपना सम्पूर्ण जीवन बीमार लोगों, पिछड़े लोगों, दरिद्रों और कोढ़ियों की सेवा में लगा दिया। चौबीसों घण्टे उन्हीं लोगों के बीच वह काम में रहता। कौन कराता था उससे यह सब? करुणा कराती थी। इसी को हम कुण्डलिनी कहते हैं, जो आदमी के भीतर हलचल पैदा कर देती है, रोमांच पैदा कर देती है, एक दर्द पैदा कर देती है, भगवान जब किसी इनसान के भीतर आता है तो एक दर्द के रूप में आता है, करुणा के रूप में आता है।

भगवान मिट्टी का बना हुआ जड़ नहीं है, वह चेतन है और चेतना का कोई रूप नहीं हो सकता, कोई शक्ल नहीं हो सकती। ब्रह्म चेतन है और चेतन केवल संवेदना हो सकती है और संवेदना कैसी होती है? विवेकशीलता के रूप में और करुणा के रूप में। आदर्श हमारे पास हों और वास्तविक हों तो उनके अन्दर एक ऐसा मैग्नेट है जो इनसान की सहानुभूति, जनता का समर्थन और भगवान की सहायता तीनों चीजें खींचकर लाता हुआ चला जाता है। कागावा के साथ यही हुआ। जब उसने दुखियारों की सेवा करनी शुरू कर दी तो उसको यह तीनों चीजें मिलती चली गईं। आदमी के भीतर जब करुणा जाग्रत होती है तो सन्त बन जाता है, ऋषि बन जाता है। हिन्दुस्तान के ऋषियों का इतिहास ठीक ऐसा ही रहा है।

जिस किसी का कुण्डलिनी जागरण जब होता है तो ऋद्धियाँ आती हैं, सिद्धियाँ आती हैं, चमत्कार आते हैं। उससे यह अपना भला करता है और दूसरों का भला करता है। मेरा गुरु आया मेरी कुण्डलिनी जाग्रत करता चला गया। हम जो भी प्राप्त करते हैं, अपनी करुणा को पूरा करने के लिए, विवेकशीलता को पूरा करने के लिए खर्च कर देते हैं और उसके बदले मिलता है असीम सन्तोष, शान्ति और प्रसन्नता। दुःखी और पीड़ित आदमी जब यहाँ आँखों में आँसू भरकर आते हैं तो सांसारिक दृष्टि से उनकी सहायता कर देने पर मुझे बड़ी प्रसन्नता होती है। शारीरिक से लेकर मानसिक बीमारों तक, दुखियारों एवं मानसिक दृष्टि से कमजोरों से लेकर गिरे हुए आदमी तक, जो पहले कैसा घिनौना जीवन जीते थे, उनके जीवन में जो हेर-फेर हुए हैं, उनको देखकर बेहद खुशी होती है जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता। यह कुण्डलिनी का चमत्कार है।

.... क्रमशः जारी
✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

1 टिप्पणी:

Unknown ने कहा…

Umaria jile me chote karykrm jari rakhna iske bad jila ka ayojan hoga tatpachat jile me aewmedh mahayagya hoga

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