शुक्रवार, 17 जनवरी 2020

👉 सन्त का सान्निध्य

सन्त का सान्निध्य अनूठा है। इसके रहस्य गहरे हैं। सन्त के सान्निध्य में जो दृश्य घटित होता है वह थोड़ा है। लेकिन जो अदृश्य में घटता है वह ज्यादा है। उसका महत्त्व और मोल-अनमोल है। सन्त का सान्निध्य नियमित होता रहे, इसमें निरन्तरता बनी रहे तो अपने आप ही जीवनक्रम बदलने लगता है। मन में जड़ जमाये बैठी उल्टी आस्थाएँ-मान्यताएँ-आग्रह फिर से उलटकर सीधे होने लगते हैं। सन्त के सान्निध्य में विचार परिवर्तन-जीवन परिवर्तन के क्रांति स्फुलिंग यूँ ही उड़ते रहते हैं। इनके दाहक स्पर्श से जीवन की अवांछनीयताओं का दहन हुए बिना नहीं रहता।
  
सन्त के सान्निध्य में सत् का सत्य बोध अनायास हो जाता है। पर यह हो पाता है सन्त के चित् के कारण, उसके चैतन्य प्रवाह की वजह से। हालाँकि यह अदृश्य में घटित होता है, परन्तु इसकी अनुभूति आनन्द बनकर अस्तित्व में बरसती रहती है। यह आश्चर्यकारी परिवर्तन उन सभी में होता है जो सन्त के सान्निध्य में सजग होकर रहते हैं। यह ऐसा अनुभव है जिसे जब मन करे तभी पाया जा सकता है। बस इसके लिए चाहिए सन्त का सान्निध्य।
  
इस सम्बन्ध में बड़ा पावन प्रसंग है-सन्त फरीद के जीवन का। बिलाल नाम के एक व्यक्ति को कुछ षड्यन्त्रकारी लोगों ने उनके पास भेजा। उसने सन्त फरीद को कई तरह से परेशान करने की कोशिश की, पर वह सन्त शान्त रहे। सन्त की इस अचरज भरी शान्ति ने बिलाल के मन को छू लिया और वह उन्हीं के साथ रहने लगा। उसे सन्त के साथ रहते हुए कई वर्ष बीत गये। इन वर्षों में उसमें कई आध्यात्मिक परिवर्तन हुए। हालाँकि उसने इसके लिए कोई साधना नहीं की थी। बाबा फरीद के एक शिष्य ने थोड़ा हैरान होते हुए इसका रहस्य जानना चाहा। बाबा फरीद ने हँसते हुए कहा-सन्त का सान्निध्य स्वयं में साधना है। सन्त के सान्निध्य में अदृश्य आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रवाह उमड़ता रहता है जो न चाहने पर भी पास रहने वाले के व्यक्तित्व के ऊपरी और भीतरी परतों को प्रभावित करता है। यह प्रक्रिया अदृश्य रूप में उसके चित्त एवं चेतना को घेरती है और परिणाम में अपने आप ही सन्त के सान्निध्य में आध्यात्मिक व्यक्तित्व जन्म पा जाता है।

✍🏻 डॉ. प्रणव पण्ड्या
📖 जीवन पथ के प्रदीप से पृष्ठ १६२

कोई टिप्पणी नहीं:

👉 जीवन लक्ष्य और उसकी प्राप्ति भाग ३

👉 *जीवन का लक्ष्य भी निर्धारित करें * 🔹 जीवन-यापन और जीवन-लक्ष्य दो भिन्न बातें हैं। प्रायः सामान्य लोगों का लक्ष्य जीवन यापन ही रहता है। ...