शुक्रवार, 20 दिसंबर 2019

👉 श्रद्धा, सिद्धान्तों के प्रति हो (भाग ३)

यह नहीं करेंगे तो क्या हो जाएगा? यदि आपकी श्रद्धा कायम रही तो फिर एक नई चीज पैदा होगी। तो उसमें से अंकुर जरूर पैदा होगा। फिर क्या पैदा होगा—आपको काम करने की लगन पैदा होगी। काम करने की ऐसी लगन कि आपने जो काम शुरू किया है उसको पूरा करने के लिए कितने मजबूत कदम उठाए जाएँ, कितने तेज कदम उठाए जाएँ, यह आपसे करते ही बनेगा। आप फिर यह नहीं कहेंगे कि हमने छह घण्टे काम कर लिया, चार घण्टे काम कर लिया। यहाँ बैठे हैं, वहाँ बैठे हैं। ओवरटाइम लाइए और ज्यादा काम हम क्यों करेंगे? नहीं, फिर आप काम किए बिना रह नहीं सकेंगे।

हमारा भी यही हुआ। श्रद्धा जब उत्पन्न हुई तो हमने यह सोचा कि कहीं ऐसा न हो कि प्रलोभन हमको खींचने लगे। तो वहाँ से घर की सम्पत्ति को त्याग करने से लेकर के स्त्री के जेवरों से लेकर के और जो कुछ भी था, सबको त्याग करते चले आए कि कहीं प्रलोभन खींचने नहीं लगें। प्रलोभन खींचने नहीं पाएँ और वह श्रद्धा हमको निरन्तर बढ़ाती हुई चली आई। फिर उसने लगन को कम नहीं होने दिया। घीयामण्डी के मकान में १७ वर्ष तक बिना बिजली के हमने काम किया। न उसमें पंखा था, न उसमें बल्ब। मकान मालिक से झगड़ा हो गया था, सो मकान मालिक कहता था कि मकान खाली करो तो उसने बिजली के सेंक्शन पर साइन नहीं किये थे और बिजली हमको नहीं मिली। १७ वर्षों तक हम केवल मिट्टी के तेल की बत्ती जलाकर रात के दो बजे से लेकर सबेरे तक अपना पूजा-पाठ से लेकर के और अपना लेखन-कार्य तक बराबर करते रहे। पंखा था नहीं, घोर गर्मियों के दिनों में लू में भी काम करते रहे। १८ घण्टे काम करते रहे। यह काम हमने किया।

अब क्या बात रह गईं— दो बातों के अलावा। दो बातों में से आप में से हर आदमी को देखना चाहिए कि हमारी श्रद्धा कमजोर तो नहीं हुई। एक ओर हमारी लगन कमजोर तो नहीं हुई अर्थात् परिश्रम करने के प्रति जो हमारी उमंग और तरंग होनी चाहिए, उसमें कमी तो नहीं आ रही। किसान अपने घर के काम समझता है तो सबेरे से उठता है और रात के नौ-दस बजे तक बराबर घर के कामों में लगा रहता है। वह १८ घण्टे काम करता है। किसी से शिकायत नहीं करता कि हमको १८ घण्टे रोज काम करना पड़ता है। हमें अवकाश नहीं मिला या हमको इतवार की छुट्टी नहीं मिली और हमको यह नहीं हुआ, वह नहीं हुआ, इसकी कोई शिकायत नहीं करता क्योंकि वह समझता है कि हमारा काम है। यह हमारी जिम्मेदारी हे। खेत को रखना, जानवरों को रखना और बाल-बच्चों की देख−भाल करना यह हमारा काम है। जिम्मेदारी हर आदमी को दिन-रात काम करने के लिए लगन लगाती है और वह आपके प्रति भी है। आपको भी व्यक्तिगत जीवन में अपनी श्रद्धा को कायम रखना—एक और अपनी लगन को जीवंत रखना—दो काम तो आपके व्यक्तिगत जीवन के है, वह आपको करने चाहिए।

.... क्रमशः जारी
✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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