गुरुवार, 21 नवंबर 2019

👉 शक्ति - साधना

शक्ति में समूचा अस्तित्त्व सिमटा है। जड़-चेतन इसी के रूप हैं। कहीं इसकी सुप्त निष्क्रियता झलकती है, तो कहीं इसकी जाग्रत् सक्रियता के दर्शन होते हैं। जीवन के विविध रूप इसी से प्रकटे हैं। पशु-पक्षियों में, वृक्ष-वनस्पतियों में इसी की चेतनता लहराती है। इसकी ही ऊर्जा गति-प्रगति, विकास-विस्तार के अनेक रूप धरती है। सचमुच ही जीवन और जगत् शक्तिमय है। शक्ति के सिवा यहाँ कुछ भी नहीं।
  
शक्ति-लीला का यह रहस्य मानव जीवन में सबसे गहरा है। स्थूल, सूक्ष्म एवं कारण शरीर, अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय एवं आनन्दमय कोश शक्ति की विविध रहस्यमयी धाराओं को ही प्रकट करते हैं। मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपुर, अनाहत, विशुद्धि, आज्ञा व सहस्रार चक्र में महाशक्ति अपने अनेकों रहस्यों को उजागर करती है। कुण्डलिनी महाशक्ति तो जैसे मानव जीवन का अधिष्ठान ही है। जगन्माता आदिशक्ति स्वयं ही इस परम रूप में प्रतिष्ठित होकर मानवीय जीवन को सर्वश्रेष्ठ होने का गौरव प्रदान करती हैं।
  
शक्ति-लीला के इस रहस्य से जो अनजान-अनभिज्ञ रहते हैं, वे शक्ति-समुद्र में वास करते हुए भी दीन-दुःखी व दयनीय बने रहते हैं। ‘सागर-बिच मीन पियासी’ यही उनकी जीवन कहानी होती है। जो इस रहस्य को जानने की साधना करते हैं, वे आदिशक्ति की सन्तान होने का गौरव पाते हैं। उनके रोम-रोम में शक्ति के समुद्र लहराते हैं। उनकी नाड़ियों व शिराओं में ऊर्जा की धाराएँ उफनती हैं। शक्ति-साधकों के लिए कहीं भी कुछ भी असम्भव नहीं रहता।
  
असम्भव को सम्भव करने वाली शक्ति साधना की यह परम विद्या गायत्री महामंत्र के चौबीस अक्षरों में समायी है। जो अनुभवी हैं वे इस सच्चाई को जानते हैं। नवरात्रि के नौ दिनों का प्रति क्षण इस दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है। जो शक्ति-साधक इन क्षणों के महत्त्व को पहचान कर गायत्री महाशक्ति की साधना में तल्लीन होंगे वे शक्ति स्रोत बने बिना न रहेंगे। जीवन और जगत् की अनेकों रहस्यमयी शक्ति के अनुदानों से उनका जीवन कृतार्थ होगा।

✍🏻 डॉ. प्रणव पण्ड्या
📖 जीवन पथ के प्रदीप से पृष्ठ १२८

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