शुक्रवार, 4 अक्तूबर 2019

👉 मेरे सदगुरु के दरबार में...

मेरे सदगुरु के दरबार में "द" शब्द वाली वस्तु "स" शब्द में बहुत ही जल्दी बदलती है...!

जैसे दुःख बदल जाता है सुख में------

दुविधा बदल जाती है सुविधा में ------

दुर्गुण बदल जाते हैं सद्गुण में ------

दुर्बलता बदल जाती है सबलता में----

दरिद्रता बदल जाती है संपन्नता में------

दुर्विचार बदल जाते हैं सद्विचार में-----

दुर्व्यव्हार बदल जाता है सद्व्यव्हार में-------

दुष्परिणाम बदल जाते हैं सुपरिणाम में------

दुराचार बदल जाता है सदाचार में---

दाग बदल जाते हैं साख में----

दुर्भावना बदल जाती है सद्भावना में ------

और
कुसंग बदल जाते हैं सत्संग में..!!

👉 जीवन लक्ष्य और उसकी प्राप्ति भाग ३

👉 *जीवन का लक्ष्य भी निर्धारित करें * 🔹 जीवन-यापन और जीवन-लक्ष्य दो भिन्न बातें हैं। प्रायः सामान्य लोगों का लक्ष्य जीवन यापन ही रहता है। ...