सोमवार, 15 जुलाई 2019

👉 इन ग्रन्थों में मंत्रों में छिपे पड़े हैं अति गोपनीय प्रयोग (भाग 29)

आध्यात्मिक चिकित्सा की जितनी सूक्ष्मता व व्यापकता, सैद्धान्तिक सच्चाई एवं प्रायोगिक गहराई वेदों में है, उतनी और कहीं नहीं। यह सुदीर्घ अनुभव का सच है। जिसे समय- समय पर अनेकों ने खरा पाया है। वेद मंत्रों में आध्यात्मिक चिकित्सा के सिद्धान्तों का महाविस्तार बड़ी पारदर्शिता से किया गया है। इसमें मानव जीवन के सभी गोपनीय, गहन व गुह्य आयामों का पारदर्शी उद्घाटन है। साथ में बड़ा ही सूक्ष्म विवेचन है। यहाँ आध्यात्मिक चिकित्सा का सैद्धान्तिक पथ जितना उन्नत है, उसका प्रायोगिक पक्ष उतना ही समर्थ है। ऋग्, यजुष एवं सामवेद के मंत्रों के साथ अथर्ववेद के प्रयोग तो अद्भुत एवं अपूर्व हैं। इनके लघुतम अंश से अपने जीवन में महानतम चमत्कार किए जा सकते हैं। यह विषय इतना विस्तृत है कि इसके विवेचन के लिए इस लघु लेख का अल्प कलेवर पर्याप्त नहीं है। जिज्ञासु पाठकों का यदि आग्रह रहा तो बाद में इसके विशिष्ट प्रायोगिक सूक्तों में वर्णित चिकित्सा विधि को बताया जाएगा।

अभी तो यहाँ इतना ही कहना है कि वेद में मुख्य रूप से आध्यात्मिक चिकित्सा की दो ही धाराएँ बही हैं। इनमें से पहली है यौगिक और दूसरी है तांत्रिक। ये दोनों ही धाराएँ बड़ी समर्थ, सबल एवं सफल हैं। इनके प्रभाव बड़े आश्चर्यकारी एवं विस्मयजनक हैं। बाद के दिनों में महर्षियों ने इन दोनों विधियों के सिद्धान्त एवं प्रयोग को श्रीमद्भगवद्गीता एवं श्री दुर्गासप्तशती में समाहित किया है। हमारे जिज्ञासु पाठकों को हो सकता है थोड़ा अचरज हो, परन्तु यह सच है कि इन दोनों ग्रन्थों में से प्रत्येक में मूल रूप से ७०० मंत्र हैं। इस सम्बन्ध में आध्यात्मिक चिकित्सकों के प्रायोगिक अनुभव कहते हैं कि इन दोनों पवित्र ग्रन्थों में कथा भाग से कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण इनके मंत्र प्रयोग हैं। जिन्हें यदि कोई सविधि सम्पन्न कर सके तो जिन्दगी की हवाएँ और फिजाएँ बदली जा सकती हैं।

इस सम्बन्ध में एक घटना उल्लेखनीय है। यह घटना महर्षि अरविन्द के जीवन की है। उन दिनों वे अलीपुर जेल की काल कोठरी में कैद थे। पुस्तकों के नाम पर उनके पास वेद की पोथियाँ, श्रीमद्भगवद्गीता एवं दुर्गासप्तशती ही थी। इन्हीं का चिन्तन- मनन इन दिनों उनके जीवन का सार सर्वस्व था। वह लिखते हैं कि साधना करते- करते ये महामंत्र स्वयं ही उनके सामने प्रकट होने लगे। यही नहीं इन ग्रन्थों में वर्णित महामंत्रों ने स्वयं प्रकट होकर उन्हें अनेकों तरह की योग विधियों से परिचित कराया। यह त्रिकाल सत्य है कि श्रीमद्भगवद्गीता के प्रयोग साधक को योग के गोपनीय रहस्यों की अनुभूति देते हैं। वह अपने आप ही आध्यात्मिक चिकित्सा के यौगिक पक्ष में निष्णात हो जाता है।

.... क्रमशः जारी
✍🏻 डॉ. प्रणव पण्ड्या
📖 आध्यात्मिक चिकित्सा एक समग्र उपचार पद्धति पृष्ठ 43

कोई टिप्पणी नहीं:

👉 जीवन की सफलता

जीवन ऊर्जा का महासागर है। काल के किनारे पर अगणित अन्तहीन ऊर्जा की लहरें टकराती रहती हैं। इनकी न कोई शुरुआत है, और न कोई अन्त; बस मध्य है...