गुरुवार, 14 फ़रवरी 2019

👉 दूसरों की बात भी सुनें

लोग सोचते हैं कि हमारे पास जितना धन अधिक होगा , जितनी संपत्ति, जितने साधन अधिक होंगे, उतना हम अधिक सुखी हो जाएंगे। जबकि यह कोरी भ्रांति है। संसार में देखा यह जा रहा है कि जिसके पास जितनी अधिक संपत्ति है वह उतना ही अधिक दुखी, परेशान और चिंता ग्रस्त है। उसे अपनी संपत्ति खो जाने चुरा लिए जाने और लूट लिए जाने का भय है। तो कृपया इस भ्रांति से बाहर निकलें, कि बहुत धन संपत्ति होने पर बहुत सुखी हो जाएंगे। वास्तविकता तो यह है कि यह भौतिक धन संपत्ति केवल जीवन रक्षा मात्र के लिए सहयोगी है, इससे अधिक नहीं। इससे कोई आत्मिक आनंद मानसिक शांति नहीं मिलती। हाँ, जीवन रक्षा अवश्य होती है।

जीवन रक्षा के लिए तो बहुत थोड़े साधन चाहिएँ। उसके बाद तो व्यक्ति केवल अपनी इच्छाएं ही पूरी करता रहता है। और आश्चर्य की बात यह है कि जितनी इच्छाएं पूरी करता जाता है इच्छाएं उतनी ही बढ़ती जाती हैं। फिर इच्छाओं का कोई अंत नहीं आता। इसलिए व्यक्ति सदा दुखी रहता है। और यदि वह अपनी इच्छाओं को थोड़ा नियंत्रित करके दूसरों के लिए कुछ त्याग करे, सेवा करे, माता-पिता का आदर सम्मान करे, बुजुर्गों एवं  विद्वानों के निर्देश का पालन करे, उनकी सेवा करे, प्राणियों की रक्षा करे, सच्ची विद्या का प्रचार करे, सच्चाई और ईमानदारी से जिए, यदि इस प्रकार के कार्य करें और इसमें तप त्याग तपस्या करे, तो उसे जो आनंद और शांति मिलेगी, वह संसार के किसी बाजार में धन से नहीं खरीदी जा सकती। इसलिए आनंद और शांति के लिए त्याग करें, लोभ नहीं।

बहुत से लोगों को हमेशा यह शिकायत रहती है कि मेरे घर के लोग, मेरे मित्र, रिश्तेदार मुझे समझते ही नहीं। मेरी भावनाओं को नहीं समझते, मेरी बातों को नहीं समझते , जो मैं चाहता हूं वह करते नहीं। यदि ध्यान से देखा जाए तो वास्तव में इस शिकायत में में काफी कुछ सच्चाई भी है। लोग वास्तव में दूसरे की बात को पूरे ध्यान से सुनते नहीं हैं।

प्रायः देखा जाता है कि वे अपनी बात कहने में ज्यादा रुचि रखते हैं, दूसरे की बात सुनना उनको पसंद नहीं । इसलिए वे दूसरे की बात सुनते ही नहीं। जब सुनते ही नहीं, तो उस पर विचार क्या करेंगे? जब विचार ही नहीं करेंगे तो क्या समझेंगे? जब समझते ही नहीं तो दूसरे के अनुकूल व्यवहार कैसे कर पाएंगे?

इसलिए जब लोग एक दूसरे के अनुकूल व्यवहार नहीं करते, तो आपस में शिकायत बढ़ती जाती है। और बढ़ते बढ़ते एक दिन बारुद की तरह विस्फोट होता है। और उसके बहुत दुष्परिणाम सामने आते हैं। लड़ाई होती है झगड़े होते हैं कोर्ट केस होते हैं। और कभी-कभी लोग दुखी परेशान होकर हत्या या आत्महत्या तक भी कर लेते हैं।
तो इन सब दुष्परिणामों से बचने के लिए दूसरों की बात ध्यान पूर्वक सुनें, उनके सही अभिप्राय को समझने की कोशिश करें, और ठीक-ठीक समझकर न्याय पूर्वक व्यवहार करें। तभी आप सबका जीवन सुखमय हो सकता है।

कोई टिप्पणी नहीं:

👉 को धर्मानुद्धरिष्यसि?

हिमालय के हिमशिखरों से बहती हुई बासन्ती बयार हमारे दिलों को छूने आज फिर आ पहुँची है। इस बयार में दुर्गम हिमालय में महातप कर रहे महा-ऋषिय...