बुधवार, 29 अगस्त 2018

👉 गलत परम्परा न डालूँगा

🔷 सुकरात को प्राण दण्ड की आज्ञा सुनाई गई। वे जेल में बन्द थे। उनके परम शिष्य क्रीटो ने जेल इसे भाग निकलने का सारा प्रबन्ध कर दिया और कहा गुरुदेव अब यहाँ से चुपचाप भाग चलिये और अपना जीवन बचाइए। सुकरात ने ऐसा करने से स्पष्ट इंकार कर दिया। उनने कहा-राजकीय कानूनों का पालन करना प्रजा का धर्म है। यदि मैं इस प्रकार कानून की अवज्ञा करके अपने प्राण बचाने के लिये भाग चलूँ तो प्रजा में एक गलत परम्परा का जनम होगा।

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