सोमवार, 9 जुलाई 2018

👉 मनुष्य जाति के गौरव

🔷 संसार में ऐसे मनुष्यों की बड़ी आवश्यकता है जो ईमानदारी हो। जो भय या लोभ के कारण अपनी अन्तरात्मा को बेचते न हों। जो मचाई पर कायम रहने के लिए अपने प्राणों तक को भी उत्सर्ग कर सकें। जिन्होंने बनावट से घृणा करना और सचाई से प्यार करना सीखा है वस्तुतः वे ही ज्ञानी है।

🔶 कुतुबनुमा (दिशा सूचक यंत्र) की सुई जिस तरह सदा उत्तर दिशा में ही रहती है उसी तरह जिनकी अन्तरात्मा सदा सत्य की ओर उन्मुख रहती है वे ही मनुष्य जाति के गौरव है। ऐसे ही लोगों से मानवता धन्य होती है और उन्हीं से संसार की सुख शान्ति बढ़ती है। महान् व्यक्तियों की विशेषता यही होती है कि वे अपने चरित्र से विचलित नहीं होते। प्रलोभनों और आपत्तियों के बीच भी वे चट्टान की तरह अविचल बन रहते है।

📖 अखण्ड ज्योति से

कोई टिप्पणी नहीं:

👉 जीवन की सफलता

जीवन ऊर्जा का महासागर है। काल के किनारे पर अगणित अन्तहीन ऊर्जा की लहरें टकराती रहती हैं। इनकी न कोई शुरुआत है, और न कोई अन्त; बस मध्य है...