गुरुवार, 17 मई 2018

👉 भगवान कैसे दिखाई देंगे? (भाग 1)

🔷 भगवान की व्यक्तिगत सूरतों को ईश्वर, अल्लाह, हरि, जेंहोवाह, स्वर्गीय-पिता, विष्णु, शिव आदि कहा जाता है।

🔶 वेदान्ती- लोग उन्हें ब्रह्म कहते हैं। हर्वट-स्पेन्सर उन्हें “जो न जाना जा सके” ऐसा कहते हैं। सकोपेन हेनर उन्हें ‘इच्छा’ के नाम से पुकारते हैं। ‘पूर्ण’, ‘पुरुषोत्तम’ आदि नामों से भी कुछ लोग उन्हें पुकारते हैं और स्पिनोजा उन्हें ‘तत्व’ कहकर सम्बोधन करते हैं।

🔷 भगवान को पहचानने में, धर्म में, विश्वास और उनकी पूजा में निष्ठा होनी चाहिये। यह विषय किसी गोष्ठी या क्लब में बैठ कर बहस करने का नहीं है। यह तो सत्य-आत्म की प्राप्ति का विषय है। यह मानव की सबसे गहरी आवश्यकता की पूर्ति है।

🔶 अतः अपने जीवन को उच्च बनाने के लिये धर्म की शरण लो। उसकी प्राप्ति के लिये प्रति-क्षण उद्योग करो और प्रत्येक पल धार्मिक बनने के लिये जीवित रहो। बिना धर्म के जीवन से मृत्यु बहुत अच्छी है।

.... क्रमशः जारी
✍🏻 श्री स्वामी शिवानन्दजी सरस्वती
📖 अखण्ड-ज्योति 1946 नवम्बर पृष्ठ 5

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