रविवार, 26 नवंबर 2017

👉 सब अपने की समान

🔷 एक दिन गुरु द्रोणाचार्य जी युधिष्ठिर से कहा कि एक दुर्जन खोजकर लाओ। वे दूर दूर तक घूमने गये पर उन्हें कोई दुर्जन न मिला। हर किसी में सज्जनता और ईश्वर की झाँकी उन्हें दिखाई देती रही। लौटकर आये तो उन्होंने असफलता स्वीकार करते हुए कहा- ‘मुझे कोई दुर्जन दिखाई नहीं पड़ता।

🔶 तब गुरुजी ने दुर्योधन को कहा कि- एक सज्जन खोजकर लाओ। वे भी दूर दूर तक गये पर हर किसी में उन्हें दुर्जनता और दुष्टता ही दिखाई दी। एक भी आदमी संसार में उन्हें भला न दीखा। वे भी लौटकर आये और गुरु के सामने सज्जन न ढूँढ़ सकने की अपनी असफलता स्वीकार कर ली।

🔷 इस संसार में दुर्जनों और सज्जनों की कमी नहीं। सभी तरह के मनुष्य मौजूद है पर जो व्यक्ति जैसा होता है उसे अपने समान ही सब दीखते है।

📖 अखण्ड ज्योति जून 1961

कोई टिप्पणी नहीं:

👉 जीवन लक्ष्य और उसकी प्राप्ति भाग ३

👉 *जीवन का लक्ष्य भी निर्धारित करें * 🔹 जीवन-यापन और जीवन-लक्ष्य दो भिन्न बातें हैं। प्रायः सामान्य लोगों का लक्ष्य जीवन यापन ही रहता है। ...