सोमवार, 20 नवंबर 2017

👉 युग-मनीषा जागे, तो क्रान्ति हो (भाग 4)

🔶 सुकरात ने अपने समय में अपने समाज को एक ही दिशा देना शुरू किया, जिसका ताम था ‘दर्शन’। विचार नहीं। विचार तो अखबारों में, गन्दी किताबों में रोज छपते रहते हैं। कितना भ्रामक अज्ञान फैलाने वाले अख़बार रोज निकलते रहते हैं। इनकी बाबत मैं आपसे नहीं कहता। मैं आपसे कहता हूँ—‘दर्शन’ की बाबत। सुकरात का दर्शन जिन दिनों पैदा होने लगा और विद्यार्थियों को पढ़ाया जाने लगा तो हुकूमत काँप उठी। हुकुम दिया गया कि यह आदमी बागी है। इस आदमी को जहर पिला देना चाहिए। डाकू-चोर एक या दो पूरे समाज को हिलाकर रख देता है। दार्शनिक दुनिया को उलट-पलट देता है। ईसा सन्त थे, नहीं दार्शनिक थे।
             
🔷 सन्त तो समाज में ढेर सारे हैं, जो एक पाँव पर खड़े रहते हैं, पानी नहीं पीते, दूध नहीं पीते। बाबाजी की बात नहीं कह रहा मैं। ईसा कौन थे? दार्शनिक थे। उन्होंने अपने समय को बदलने वाला दर्शन दिया था। दर्शन वह, जो आदमी के अन्तरंग को छूने वाला दर्शन जब कभी आता है तो गजब करके रख देता है। लेखक भी, कवि भी ढेर सारे हैं, मालदार आदमी बहुत हुए हैं परन्तु दार्शनिक जब भी कभी हुए हैं तो मजा आ गया है। गजब हो गया हैं, समाज को हिला दिया गया है।
 
🔶 कुछ हवाले दूँ आपको। रूसो नाम का एक दार्शनिक हुआ है, जिसने सबसे पहले एक विचार दिया, अन्तरंग को छूने वाला, आदमी के मस्तिष्क को छूने वाला, समाज की व्यवस्था पर असर डालने वाला। दर्शन दिया रूसो ने जिसे डेमोक्रेसी नाम दिया गया। डेमोक्रेसी के बारे में मजाक उड़ाया गया था। जिन दिनों यह दर्शन प्रस्तुत किया गया, कहा गया कि यह पागलों की बातें हैं। लेकिन पागलों की बात आप देखते हैं? सारी दुनिया में घुमा-फिरा के डेमोक्रेसी आ गई है। यह विचार एक दार्शनिक ने दिया था और उसने सारी दुनिया को हिलाकर रख दिया और हवाले दूँ आपको। एक नाम है नीत्से। उसका वह हिस्सा तो नहीं बताऊँगा जिसमें उसने यह कहा था कि खुदा खत्म हो गया, खुदा को हमने जमीन में गाड़ दिया पर यह वह आदमी था जिसने कहा था कि आदमी को सुपरमैन बनना चाहिए।

🔷 आदमी को गई-गुजरी स्थिति में नहीं रहना चाहिए। अपने आपका विकसित करना चाहिए और दूसरों को ऊँचा उठाने की अपनी सामर्थ्य एकत्रित करनी चाहिए। यह किसकी फिलॉसफी है? नीत्से की। आपको मैं इतिहास इसीलिए बता रहा हूँ कि आप समझें कि दर्शन कितनी जबर्दस्त चीज है? दर्शन उस चीज का नाम है जो कौमों को बदलकर रख देता है, बिरादरियों को, मुल्कों को, परिस्थितियों को बदल देता है। दर्शन बड़े शानदार होते हैं। वे भले हों अथवा बुरे हों, कितनी ताकत होती है उनमें, यह आपको जानना चाहिए। मैं आपको अपने जीवन की एक घटना सुना दूँ दर्शन की बाबत।

....क्रमशः जारी
✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य (अमृतवाणी)

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